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Minimum Wage: नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन के बाद आपके मन में ये सवाल जरूर आया होगा कि दुनिया में मजदूरों को सबसे ज्यादा सैलरी कहां मिलती है और कहां सबसे कम? क्या बाकी देशों में भी मजदूरों के हालात इतने ही बुरे हैं? आइये मिनिमम वेज नियमों को जानते हैं
दुनिया में कहां मिलती है सबसे ज्यादा मजदूरी? जानें टॉप देशों का हाल

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आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए न्यूनतम वेतन एक बड़ा हथियार है। आज के दौर में बढ़ती महंगाई के बीच कई विकसित देशों ने अपने नागरिकों के लिए भारी-भरकम न्यूनतम मजदूरी तय कर रखी है। इसमें लक्जमबर्ग (Luxembourg) दुनिया में सबसे ऊपर है।
नंबर 1 लक्जमबर्ग: महीने की सैलरी जानकर उड़ जाएंगे होश!

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यूरोप का छोटा सा देश लक्ज़मबर्ग अपने कुशल (Skilled) कामगारों को दुनिया में सबसे ज्यादा पैसा देता है। यहां 18 साल से ऊपर के कुशल लोगों को हर महीने करीब US$3,670 (लगभग ₹3,42,172) की न्यूनतम मजदूरी मिलती है।
नीदरलैंड और जर्मनी: प्रति घंटा कमाई में हैं आगे

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नीदरलैंड्स में प्रति घंटा न्यूनतम मजदूरी करीब ₹1,557 (US16.70)है। वहीं, जर्मनी में यह ₹1,385 (US14.86) प्रति घंटा है। इन देशों में मासिक वेतन के बजाय काम के घंटों के आधार पर भुगतान का नियम ज्यादा प्रभावी है।
न्यूजीलैंड: ट्रेनिंग लेने वालों को भी मिलता है अच्छा पैसा

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न्यूजीलैंड में कामगारों के लिए न्यूनतम मज़दूरी ₹1,247 (US$13.38) प्रति घंटा है। खास बात यह है कि जो लोग अभी ट्रेनिंग ले रहे हैं या नई नौकरी शुरू कर रहे हैं, उन्हें भी सरकार ने ₹998 प्रति घंटा मिलना अनिवार्य किया है।
भारत में क्या है स्थिति? स्किल के हिसाब से मिलता है दाम

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भारत में न्यूनतम मजदूरी राज्य और स्किल लेवल पर निर्भर करती है। केंद्र सरकार के दायरे में आने वाले वर्कर्स के लिए नियम कुछ इस प्रकार हैं:
हाइली स्किल्ड: ₹1,035/दिन
स्किल्ड वर्कर्स: ₹954/दिन
सेमी-स्किल्ड: ₹868/दिन
न्यूनतम मजदूरी क्यों है जरूरी? शोषण से सुरक्षा

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सरल शब्दों में कहें तो न्यूनतम मजदूरी का मतलब है 'आर्थिक सुरक्षा'। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी कंपनी किसी मजदूर का शोषण न करे और उसे भोजन, घर और कपड़े जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए पर्याप्त राशि मिले।
सबसे कम न्यूनतम मजदूरी देने वाले प्रमुख देशों की सूची

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दुनिया में जहां एक तरफ लक्ज़मबर्ग और स्विट्जरलैंड जैसे देश हैं जो लाखों में न्यूनतम मजदूरी देते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे देश भी हैं जहाँ पूरे महीने की मेहनत के बदले मिलने वाली राशि किसी मजाक जैसी लगती है। अक्सर युद्ध, अस्थिर अर्थव्यवस्था और अत्यधिक मुद्रास्फीति (Inflation) इन देशों में कम सैलरी का कारण बनती हैं। यहां दुनिया के सबसे कम न्यूनतम मजदूरी देने वाले प्रमुख देशों की सूची दी गई है।