
1 / 7
आज गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में जारी उथल-पुथल के बीच भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए हैं। राहत की बात यह है कि वैश्विक तनाव के बावजूद आज भी आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है।
ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में हलचल

2 / 7
मिडिल ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण रूट पर संकट के बावजूद, भारतीय तेल कंपनियों ने आज 23 अप्रैल को भी ईंधन की कीमतों को स्थिर रखा है।
महानगरों का हाल: दिल्ली से मुंबई तक क्या हैं आज के भाव?

3 / 7
देश के चारों बड़े महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम जस के तस बने हुए हैं। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का बोझ खुद झेल रही हैं ताकि उपभोक्ताओं को अचानक झटका न लगे:
नई दिल्ली: पेट्रोल ₹94.72 | डीजल ₹87.62
मुंबई: पेट्रोल ₹104.21 | डीजल ₹92.15
कोलकाता: पेट्रोल ₹103.94 | डीजल ₹90.76
चेन्नई: पेट्रोल ₹100.75 | डीजल ₹92.34
अन्य प्रमुख शहरों के रेट्स: हैदराबाद में सबसे महंगा तो चंडीगढ़ में सस्ता!

4 / 7
स्थानीय टैक्स और वैट (VAT) के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतें भिन्न होती हैं। आज भी हैदराबाद में कीमतें सबसे ऊंचे स्तर पर हैं:
हैदराबाद: पेट्रोल ₹107.46 | डीजल ₹95.70
बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 | डीजल ₹89.02
पटना: पेट्रोल ₹105.58 | डीजल ₹93.80
चंडीगढ़: पेट्रोल ₹94.30 | डीजल ₹82.45
आखिर शहरों में क्यों अलग होते हैं दाम? जानें गणित

5 / 7
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ही देश में तेल के दाम अलग क्यों होते हैं? दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले एक्साइज टैक्स के अलावा, हर राज्य सरकार अपना अलग 'वैट' (VAT) वसूलती है। इसके साथ ही फ्रेट चार्जेस (ढुलाई का खर्च) और डीलर कमीशन जुड़ने के बाद हर शहर का रेट बदल जाता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर

6 / 7
दुनिया के कुल तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। ईरान-इजरायल संकट के कारण इस रास्ते में रुकावट की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है। भारतीय अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि घरेलू सप्लाई पर असर न पड़े।
क्या आने वाले दिनों में बढ़ेंगे दाम? एक्सपर्ट्स की राय

7 / 7
फिलहाल सरकार कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश कर रही है ताकि महंगाई नियंत्रण में रहे। हालांकि, अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होता है, तो आने वाले समय में मामूली बढ़ोत्तरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।