15 रुपये के आंवले से शख्स बन गया करोड़पति, किसान की कमाई आपको भी कर देगी हैरान

राजस्थान के भरतपुर जिले के पेंघोरे गांव निवासी किसान अमर सिंह आज आंवले की खेती और इसकी सही प्रोसेसिंग के जरिए करोड़ों का सालाना टर्नओवर वाला कारोबार खड़ा कर चुके हैं. उनकी यात्रा यह साबित करती है कि खेती को अगर बिजनेस की नजर से देखा जाए तो मिट्टी से बड़ी आमदनी संभव है.

amla farming
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राजस्थान के भरतपुर जिले के पेंघोरे गांव निवासी किसान अमर सिंह आज आंवले की खेती और इसकी सही प्रोसेसिंग के जरिए करोड़ों का सालाना टर्नओवर वाला कारोबार खड़ा कर चुके हैं. उनकी यात्रा यह साबित करती है कि खेती को अगर बिजनेस की नजर से देखा जाए तो मिट्टी से बड़ी आमदनी संभव है.

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शुरुआत और आंवले का चुनाव

शुरुआत और आंवले का चुनाव2 / 8

अमर सिंह शुरू में आम खेती से घर चला रहे थे, लेकिन उसमें आय कम मिलने के कारण उन्हें ऑटो चलाना भी पड़ा. 1997 में एक कृषि प्रदर्शनी में आंवले की अच्छी आय की संभावना देखकर उन्होंने अपनी 2.2 एकड़ जमीन पर आंवले की खेती की दिशा में कदम रखा. उन्होंने बागवानी विभाग से महज 1200 रुपये में 60 आंवले के पौधे खरीदकर लगाए और धीरे–धीरे इन्हें 70–80 और पेड़ों तक बढ़ाया.

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पहले फसल से ही बड़ी कमाई

पहले फसल से ही बड़ी कमाई3 / 8

लगभग पांच साल की इंतजार के बाद आंवले के पेड़ फलने लगे और उस पहली ही फसल से अमर सिंह ने लगभग 7 लाख रुपये की आय कमाकर खुद को लाखों के किसान से बदल दिया. यह आंकड़ा उन्हें यह साबित कर दिया कि फल बागवानी से लंबी अवधि में बहुत बेहतर रिटर्न मिल सकता है. इसके बाद उन्होंने आंवले की खेती को अपनी मुख्य आय का स्रोत बना दिया और नए पेड़ लगाकर क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों को बढ़ाया.

कच्चा आंवला नहीं, बल्कि प्रोसेस्ड उत्पाद

कच्चा आंवला नहीं, बल्कि प्रोसेस्ड उत्पाद4 / 8

शुरू में आंवला मंडी में 2–3 रुपये प्रति किलो तक बिकता था, जबकि इसके मुरब्बा, कैंडी और जूस की कीमत उससे कई गुना अधिक थी. इस बात को समझकर अमर सिंह ने सिर्फ कच्चा फल बेचने से आगे बढ़कर वैल्यू–एडेड उत्पादों पर फोकस किया. उन्होंने 2007 के आसपास मुरब्बा बनाने की व्यावसायिक तकनीक सीखकर अपनी प्रोसेसिंग यूनिट तक बनाने का फैसला लिया.

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अपनी प्रोसेसिंग यूनिट और ब्रांडिंग

अपनी प्रोसेसिंग यूनिट और ब्रांडिंग5 / 8

2005 के आसपास लगभग 5 लाख रुपये के निवेश से अमर सिंह ने अपनी मुरब्बा फैक्ट्री स्थापित की और अलग–अलग फ्लेवर में आंवले का मुरब्बा, कैंडी और अन्य प्रोडक्ट्स तैयार करने लगे. उन्होंने अपने प्रोडक्ट्स को 'अमृता' जैसे ब्रांड नाम के साथ बाजार में उतारा, जिससे ग्राहकों को पैकेजिंग और क्वालिटी के प्रति विश्वास जमा. आज आंवले से तैयार ये प्रोडक्ट्स न सिर्फ स्थानीय बाजार में बल्कि दूर–दूर तक बिक रहे हैं.

करोड़ों का टर्नओवर और रोजगार

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समय के साथ अमर सिंह का आंवला आधारित बिजनेस इतना बढ़ गया कि उनकी सालाना बिक्री लगभग 25–26 लाख से होकर करोड़ों के घरे पहुंच गई है. उनकी प्रोसेसिंग इकाई ने गांव के दर्जनों लोगों को सीधा रोजगार दिया है, जिसमें कई युवा और महिलाएं भी शामिल हैं. इस तरह वह सिर्फ खुद की आय बढ़ाने वाले किसान नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले सोशल–एंटरप्रेन्योर भी बन गए हैं.

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मॉडर्न टेक्नोलॉजी और बिजनेस माइंडसेट

मॉडर्न टेक्नोलॉजी और बिजनेस माइंडसेट7 / 8

अमर सिंह ने खेती में सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर नहीं रहते हुए नए तरीके अपनाए, जैसे बेहतर किस्में, समय पर देखभाल और उत्पादन की गुणवत्ता पर ध्यान देना. साथ ही, उन्होंने बाजार अनुसंधान के आधार पर कौन‑से प्रोडक्ट अधिक मांग में हैं, यह समझकर अपनी लाइन अपडेट की. यह दोहरा फोकस-खेती की दक्षता और मार्केट-ओरिएंटेड विचार-उन्हें एग्री–बिजनेस टाइकून की कतार में ले आया.

किसानों के लिए रोल मॉडल

किसानों के लिए रोल मॉडल8 / 8

भरतपुर और आसपास के क्षेत्रों में अमर सिंह की कहानी आज एक प्रेरणास्रोत बन चुकी है, जो खेती को घाटे का सौदा नहीं, बल्कि योजनाबद्ध व्यवसाय के रूप में देखने की प्रेरणा देती है. राजस्थान के कई किसान अब आंवले और दूसरे फलों की बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं, क्योंकि व्यवस्थित खेती से लाखों–करोड़ों की आय की संभावना दिख रही है. उनकी जर्नी यह दिखाती है कि खेती में थोड़ा सा दिमाग, थोड़ी सी तकनीक और लंबी दूरी की सोच लगाई जाए तो मुनाफे की कोई सीमा नहीं रह जाती.

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लेखक के बारे में

Akarsh Shukla

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला न्यूज 24 के साथ बतौर चीफ सब एडिटर जुड़े हुए हैं. मूल रूप से नोएडा, उत्तर प्रदेश के रहने वाले आकर्ष ने पत्रकारिता का सफर 2016 में प्रिंट मीडिया से शुरू हुआ, बाद में उन्होंने डिजिटल मीडिया का रुख किया. आकर्ष शुक्ला ने गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री हासिल की. आकर्ष ने दिल्ली के अखबार वूमेन एक्सप्रेस में काम किया. इसके बाद नवोदय टाइम्स, ओपेरा न्यूज, वनइंडिया, इंडिया डॉट कॉम (जी मीडिया ग्रुप) में विभिन्न पदों पर कार्य किया. आकर्ष शुक्ला अक्टूबर, 2025 से न्यूज24 से जुड़े हुए हैं, जहां वो मुख्य रूप से राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय और राजनीति से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं. इसके साथ ही आकर्ष शिफ्ट हेड के तौर पर टीम का नेतृत्व भी करते हैं. आकर्ष ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के अलावा संसद से जुड़ी खबरों को कवर किया है. उनकी राजनीति में गहरी रुचि है, इस कारण वह राजनीति से जुड़ी खबरों को आसान शब्दों में लिखने में माहिर हैं. डिग्री और डिप्लोमा: आकर्ष शुक्ला ने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक (BA) की डिग्री के बाद गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (GJUS&T) हिसार, हरियाणा से मास्टर ऑफ मास कम्युनिकेशन (MJMC) पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. आकर्ष शुक्ला ने DICS इंस्टीट्यूट से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में 2 साल का डिप्लोमा भी किया है. पत्रकारिता में अनुभव: 10 वर्ष से अधिक
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