तेल कंपनियों ने 3 जुलाई 2026 के लिए एलपीजी सिलेंडर की नई रेट लिस्ट जारी कर दी है। इस बार रेस्टोरेंट और ढाबा मालिकों को बड़ी राहत मिली है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।
कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹183.50 हुआ सस्ता, रेस्टोरेंट-ढाबा मालिकों को मिली बड़ी राहत

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19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में ₹183.50 की बड़ी कटौती की गई है। इस फैसले से हलवाई, रेस्टोरेंट और ढाबा मालिकों को बड़ी राहत मिली है, जिनका कारोबार लगातार बढ़ती कीमतों की वजह से प्रभावित हो रहा था।
घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम स्थिर; जून में बढ़ी थीं कीमतें

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आम जनता के इस्तेमाल वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू सिलेंडर की कीमतों में आज कोई बदलाव नहीं हुआ है। बता दें कि जून के महीने में घरेलू सिलेंडर के दाम ₹29 बढ़ाए गए थे, जिसके बाद से कीमतें उसी स्तर पर स्थिर हैं।
साल 2026 में कब-कब बढ़े थे कमर्शियल सिलेंडर के दाम? देखें पूरा ग्राफ

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1 जनवरी: ₹111 बढ़कर ₹1691.50 पर पहुंचा।
फरवरी: ₹49 की और बढ़ोतरी, कीमत ₹1740.50 हुई।
1 मार्च: ₹28 महंगा होकर ₹1768.50 हुआ।
7 मार्च: ₹114.50 का और इजाफा, दाम ₹1883.00 पहुंचे।
1 अप्रैल: ₹195.50 की बढ़ोतरी हुई।
1 मई: ₹993 के रिकॉर्ड बंपर उछाल के साथ रेट ₹3071.50 के हाई लेवल पर पहुंचे।
1 जून: ₹42 और बढ़कर दाम ₹3113.50 के चरम पर पहुंच गए थे।
रसोई गैस और कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम

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नई दिल्ली ₹942.00 | ₹2,930.00,
कोलकाता ₹968.00 | ₹3,081.50 ,
मुंबई ₹941.50 | ₹2,885.50 ,
चेन्नई ₹957.50 | ₹3,106.00 ,
गुरुग्राम ₹950.50 | ₹2,947.50 ,
नोएडा ₹939.50 | ₹2,930.00 ,
बेंगलुरु ₹944.50 | ₹3,021.00 ,
भुवनेश्वर ₹968.00 | ₹3,114.50 ,
चंडीगढ़ ₹951.50 | ₹2,954.50 ,
हैदराबाद ₹994.00 | ₹3,191.00 ,
जयपुर ₹945.50 | ₹2,957.50 ,
लखनऊ ₹979.50 | ₹3,052.50 ,
पटना ₹1,031.50 | ₹3,227.00 ,
तिरुवनंतपुरम ₹951.00 | ₹2,971.50,
भारत में LPG का इस्तेमाल 8% तक घटा, PPAC की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

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PPAC की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के शुरुआती 6 महीनों में देश में एलपीजी की खपत में 8% की गिरावट आई है। जनवरी से जून 2026 के बीच भारत में 14.7 मिलियन टन एलपीजी की खपत हुई, जो पिछले साल इसी अवधि में 15.9 मिलियन टन थी।सरकार के मुताबिक, खपत में यह कमी वैश्विक सप्लाई चेन में आई रुकावट की वजह से है। भारत अपनी जरूरत का 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका 90% हिस्सा खाड़ी देशों से 'होर्मुज जलडमरूमध्य' के रास्ते आता है। अमेरिका-ईरान तनाव के चलते इस रास्ते की नाकेबंदी से सप्लाई प्रभावित हुई है।