क्या आपको पता है कि जो गैस सिलेंडर आप घर लाते हैं, उसकी असली कीमत ₹1600 के पार है? नीति आयोग के पूर्व चीफ अमिताभ कांत ने खुलासा किया है कि वैश्विक संकट के बीच भी सरकार कैसे अपनी जेब से पैसे भरकर आपके रसोई का बजट बिगड़ने से रोक रही है। इस बीच सरकारी तेल कंपनियों ने एलपीजी के नए रेट्स जारी कर दिए हैं। जानें आपके शहर में गैस सिलेंडर की क्या कीमत है।
14.2 किग्रा (घरेलू सिलेंडर) और19 किग्रा (कमर्शियल सिलेंडर) की कीमत

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नई दिल्ली: ₹942.00 । ₹3,113.50,
नोएडा : ₹939.50 । ₹3,113.50,
मुंबई : ₹941.50 । ₹3,067.50,
बेंगलुरु : ₹944.50 । ₹3,198.00,
जयपुर : ₹945.50 । ₹3,141.00,
थिरुवनंतपुरम : ₹951.00 । ₹3,152.00,
चंडीगढ़ : ₹951.50 । ₹3,136.00,
चेन्नई : ₹957.50 । ₹3,283.00,
गुरुग्राम : ₹950.50 । ₹3,130.00,
कोलकाता : ₹968.00 । ₹3,255.50,
भुवनेश्वर : ₹968.00 । ₹3,290.00,
लखनऊ : ₹979.50 । ₹3,236.00,
हैदराबाद : ₹994.00 । ₹3,367.00,
पटना : ₹1,031.50 । ₹3,400.00,
अलग-अलग राज्यों में क्यों कीमत में है अंतर

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अलग-अलग राज्यों में लोकल टैक्स और ट्रांसपोर्टेशन चार्ज की वजह से कीमतों में अंतर दिखाई देता है। इस लिस्ट में जहां नोएडा में घरेलू सिलेंडर सबसे किफायती (₹939.50) है, वहीं पटना में घरेलू और कमर्शियल दोनों ही सिलेंडरों के दाम सबसे ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं। अपनी जेब का बजट देखने के लिए इस लिस्ट को सेव कर लें!
जिन्हें मिला है उज्ज्वला का साथ, उनके लिए सिलेंडर सिर्फ ₹642 का! सीधे ₹958 की बचत

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अगर आपके पास उज्ज्वला योजना का कनेक्शन है, तो महंगाई आपके आस-पास भी नहीं फटक सकती। सरकार इस पर ₹958 की बंपर छूट दे रही है। यानी दुनिया में भले ही हाहाकार मचा हो, भारत के गरीब परिवारों को सबसे सस्ता ईंधन मिल रहा है।
आधार लिंक और घरेलू रिफाइनरियों का दम, अब कोई नहीं मार सकता जनता का हक!

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कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने देश के अंदर भी बड़ा बदलाव किया। रिफाइनरियों को हाईटेक किया गया जिससे देश में गैस का उत्पादन बढ़ा। साथ ही आधार कार्ड और डिजिटल चेकिंग के जरिए बिचौलियों और ब्लैक मार्केटिंग का खेल खत्म कर दिया गया।
भारत ने रातों-रात बदल डाला गेम! 41 देशों से मंगाया माल

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भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी बाहर से खरीदता है। जब दुनिया में युद्ध और संकट की वजह से गैस मिलनी मुश्किल हुई, तो भारत ने चालाकी दिखाई। केवल कुछ देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी लिस्ट बढ़ाकर 41 देशों की कर दी, जिससे देश में कभी गैस की किल्लत नहीं हुई।