पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भारी तनाव के बीच भारत सरकार ने देश में ईंधन की जमाखोरी और किल्लत को रोकने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक नया आदेश जारी करते हुए इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल यूजर्स के पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने पर रोक लगा दी है। गुरुवार को जारी इस नए नोटिफिकेशन के बाद रिटेल आउटलेट्स पर हाई-स्पीड डीजल (HSD) की बिक्री की अधिकतम सीमा भी तय कर दी गई है। आइए, समझते हैं कि सरकार का यह नया नियम क्या है और इससे आम जनता को क्या राहत मिलेगी।
पेट्रोल पंपों से थोक खरीद पर 90 दिनों का बैन

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सरकार के नए नोटिफिकेशन के मुताबिक, बड़े कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के पेट्रोल पंप से तेल खरीदने पर शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक रोक रहेगी। इन्हें अब अपनी जरूरत का ईंधन केवल बल्क सेल पॉइंट्स से ही लेना होगा।
एक दिन में 200 लीटर से ज्यादा डीजल नहीं मिलेगा

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नए आदेश के तहत रिटेल आउटलेट डीलरों से कहा गया है कि वे किसी भी एक ग्राहक या गाड़ी को एक दिन में 200 लीटर से अधिक हाई-स्पीड डीजल नहीं बेच सकते। सरकार ने साफ कर दिया है कि पंपों से खरीदे गए इस हाई-स्पीड डीजल को बाजार में मुनाफा कमाने के लिए आगे दोबारा नहीं बेचा जा सकता (No Re-selling)।
रिटेल और बल्क रेट में 39 रुपये से ज्यादा का अंतर

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दरअसल, दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर आम जनता के लिए डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर है, जबकि बड़े उद्योगों के लिए थोक (Bulk) बाजार में इसकी कीमत ₹134.50 प्रति लीटर पहुंच चुकी है। लगभग ₹39.30 प्रति लीटर के इस भारी अंतर के कारण बड़े कमर्शियल यूजर्स खुदरा पेट्रोल पंपों से ही तेल खरीदने लगे थे। सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता को वैश्विक महंगाई के झटके से बचाने के लिए खुदरा दाम स्थिर रखे हैं, इसलिए इस विसंगति को दूर करने के लिए नया आदेश लाना पड़ा।
क्या होता है हाई-स्पीड डीजल (HSD) और कहां होता है इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल?

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हाई-स्पीड डीजल (High-Speed Diesel) पेट्रोलियम से बना एक मानक ईंधन है, जो भारी मशीनों और परिवहन के लिए जरूरी है। इसका मुख्य इस्तेमाल भारी कमर्शियल ट्रकों, कंस्ट्रक्शन साइट की बड़ी क्रेन, खेतों में ट्रैक्टर व थ्रेशर, फैक्ट्रियों के डीजल जनरेटर (DG Sets) और गैस टर्बाइन चलाने के लिए किया जाता है। साथ ही इसका यूज ऑफ-रोड कंस्ट्रक्शन, खेती की मशीनों और पेट्रोलियम ड्रिलिंग के उपकरणों को चलाने में किया जाता है। डीजल जनरेटर और गैस टर्बाइन में मुख्य ईंधन के तौर पर इसका इस्तेमाल होता है। सरकार के इस नए नियम से इन सभी उद्योगों को अब सीधे बल्क डीलरों से ही तेल उठाना होगा।