नौकरीपेशा यानी वेतनभोगी (Salaried) कर्मचारियों के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने का सीजन पूरी तरह शुरू हो चुका है। अधिकांश कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को फॉर्म 16 (Form 16) जारी कर दिए हैं या जल्द ही करने वाली हैं। कई टैक्सपेयर्स फॉर्म 16 हाथ में आते ही बिना सोचे-समझे तुरंत आईटीआर फाइल करने की जल्दबाजी करते हैं, जिसे टैक्स एक्सपर्ट्स एक बड़ी गलती मानते हैं।
इन गलतियों के कारण अटक सकता है रिफंड

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टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फॉर्म 16 में सैलरी के आंकड़ों में गड़बड़ी, गलत पैन (PAN) नंबर, छूटी हुई डिडक्शन या टीडीएस (TDS) का सरकारी खाते में जमा न होना जैसी कमियां आपके रिफंड को अटका सकती हैं। इतना ही नहीं, ऐसी गलतियों के कारण आयकर विभाग से स्क्रूटनी का नोटिस भी आ सकता है। इसलिए आईटीआर दाखिल करने से पहले अपने फॉर्म 16 में नीचे दी गई 6 जरूरी चीजों को अच्छी तरह वेरिफाई कर लें:
1. अपने पर्सनल डिटेल्स और पैन (PAN) को अच्छे से जांचें

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फॉर्म 16 मिलते ही सबसे पहला काम अपनी बुनियादी जानकारियों को चेक करना है। दस्तावेज पर आपका नाम, पैन कार्ड नंबर (PAN Number), एम्प्लॉयर (कंपनी) का नाम, कंपनी का टैन (TAN) नंबर, फाइनेंशियल ईयर (वित्तीय वर्ष) और असेसमेंट ईयर (कर निर्धारण वर्ष) बिल्कुल सही दर्ज होना चाहिए। पैन या टैन में एक छोटे से लेटर की गलती भी आपके टीडीएस क्रेडिट को रोक सकती है।
2. सैलरी स्लिप (Pay Slips) से करें आंकड़ों का मिलान

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फॉर्म 16 में दिखाई गई कुल सैलरी (Gross Salary) का अपनी मंथली सैलरी स्लिप और सालाना सैलरी स्टेटमेंट से मिलान करें। चेक करें कि आपको मिले सभी भत्ते (Allowances), बोनस और अन्य हिस्से फॉर्म 16 में सही तरीके से दिखाए गए हैं या नहीं। यदि दोनों के आंकड़ों में कोई अंतर या मिसमैच दिखता है, तो तुरंत अपनी कंपनी के पेरोल विभाग से संपर्क करें।
3. निवेश पर मिलने वाली टैक्स छूट (Deductions & Exemptions) देखें

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अक्सर टैक्सपेयर्स यह मान लेते हैं कि उनके द्वारा घोषित सभी निवेश फॉर्म 16 में आ ही गए होंगे, जो कि गलत है। ध्यान से देखें कि:
Section 80C: पीपीएफ (PPF), ईएलएसएस (ELSS) और एलआईसी (LIC) प्रीमियम की छूट सही है या नहीं।
Section 80D: हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम का क्लेम दर्ज है या नहीं।
Section 80CCD: नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में किए गए अतिरिक्त योगदान का ब्योरा देखें।
इसके अलावा होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट और कंपनी को घोषित किए गए अन्य खर्चों को भी री-चेक करें।
4. टैक्स रिजीम (Tax Regime) की करें पहचान

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यह वेरिफाई करना बेहद जरूरी है कि आपकी कंपनी ने किस टैक्स रिजीम (Old vs New Tax Regime) के आधार पर आपका टीडीएस (TDS) कैलकुलेट किया है। दोनों रिजीम में टैक्स लायबिलिटी अलग-अलग होती है। हालांकि, ध्यान रहे कि भले ही कंपनी ने ओल्ड या न्यू में से किसी एक रिजीम से टैक्स काटा हो, आप आईटीआर फाइल करते समय नियमों के अनुसार अपनी पसंद की दूसरी रिजीम चुनकर टैक्स का फायदा ले सकते हैं।
5. AIS और Form 26AS से मिलान है सबसे जरूरी कदम

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यह आईटीआर फाइलिंग का सबसे महत्वपूर्ण स्टेप है। अपने फॉर्म 16 का मिलान इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर अपने एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और फॉर्म 26AS (Form 26AS) से जरूर करें।
मिसमैच से बचें: फॉर्म 16 में जितना टीडीएस (TDS) कटा हुआ दिख रहा है, उतना ही टैक्स क्रेडिट आपके फॉर्म 26AS में भी रिफ्लेक्ट होना चाहिए। अगर सरकारी रिकॉर्ड (26AS) में टीडीएस कम दिख रहा है, तो इसका मतलब कंपनी ने आपका काटा हुआ टैक्स सरकार के पास जमा नहीं किया है।
6. गलती मिलने पर तुरंत कंपनी को रिपोर्ट करें

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अगर आपको फॉर्म 16 में सैलरी, डिडक्शन, पैन या टीडीएस से जुड़ी कोई भी छोटी या बड़ी गलती नजर आती है, तो उसे नजरअंदाज न करें। तुरंत अपनी कंपनी के एचआर (HR) या फाइनेंस डिपार्टमेंट से संपर्क करें। ऐसी स्थिति में कंपनी को अपनी टीडीएस रिटर्न संशोधित (Revised TDS Return) करनी होगी और आपको एक नया व सही फॉर्म 16 जारी करना होगा, जिसके बाद ही आपको आईटीआर फाइल करना चाहिए।
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