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न्यूयॉर्क की जगमगाती सड़कों के नीचे एक ऐसा रहस्य छिपा है जो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को शक्ति प्रदान करता है। लिबर्टी स्ट्रीट पर ज़मीन से लगभग 25 मीटर नीचे स्थित फेडरल रिजर्व का स्वर्ण भंडार न केवल अमेरिकी समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक विश्वास का भी प्रतीक है। यहां हजारों टन सोना संग्रहित है, जो उन देशों का है जो अपनी मुद्राओं और वायदा को सुरक्षित रखना चाहते हैं।
तिजोरी दुनिया की सबसे सुरक्षित

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न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक में स्थित यह सोने का तिजोरी दुनिया की सबसे सुरक्षित जगहों में से एक मानी जाती है। इस तिजोरी की सुरक्षा किसी साधारण ताले से नहीं, बल्कि 90 टन के एक विशाल स्टील सिलेंडर से की जाती है। इसकी तकनीक इतनी उन्नत है कि एक बार दरवाजा बंद हो जाने पर, चाहकर भी इसे अगले दिन तक खोला नहीं जा सकता। जमीन के काफी नीचे बनी यह तिजोरी प्राकृतिक आपदाओं और बाहरी हमलों से पूरी तरह सुरक्षित है। यहां सोने की सुरक्षा के लिए बनाए गए सख्त नियम इसे दुनिया की सबसे भरोसेमंद तिजोरी बनाते हैं।
6,300 टन सोना

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अनुमान है कि इस विशाल तिजोरी में लगभग 6,300 टन सोना संग्रहित है। इसका अनुमानित मूल्य एक ट्रिलियन डॉलर (लगभग 83 लाख करोड़ रुपये) से अधिक है, जो अमेरिकी जीडीपी का लगभग चार प्रतिशत है। इसमें सोने की बिस्कुट और सिल्लियों के रूप में पांच लाख से अधिक सोने की छड़ें भी रखी हैं। यह भंडार वैश्विक वित्तीय स्थिरता के लिए एक मजबूत आधार का काम करता है, क्योंकि कई देश अपनी मुद्राओं का मूल्य बनाए रखने के लिए अपने स्वर्ण भंडार को यहीं संग्रहित करते हैं।
भंडार में जर्मनी का नाम भी शामिल

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इस स्वर्ण भंडार में जर्मनी का नाम भी शामिल है, जिसके पास दुनिया का सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार है। अमेरिका के बाद जर्मनी के पास विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण भंडार है। आंकड़ों के अनुसार, न्यूयॉर्क स्थित इस भंडार में लगभग 1,200 टन जर्मन सोना रखा है, जिसकी कीमत लगभग 200 अरब डॉलर है। हालांकि, हाल के वर्षों में जर्मनी के भीतर से ही इस सोने को वापस अपने देश लाने की मांग उठी है। जर्मनी के अलावा, इटली से लगभग 1,060 टन और नीदरलैंड से लगभग 190 टन सोना भी इस भंडार में सुरक्षित रखा गया है।
भारत भी शामिल

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भारत उन 60 से अधिक देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शामिल है जिनके पास न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक में सोना जमा है। भारत के अलावा, स्विट्जरलैंड, लेबनान, बेल्जियम और आईएमएफ जैसे संगठन भी अपना बहुमूल्य भंडार वहीं रखते हैं। यह सोना किसी निजी व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरी तरह से सरकारी केंद्रीय बैंकों और वैश्विक संस्थानों का है, और अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है।