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बीकानेर के स्वाद को सात समंदर पार पहुंचाने वाले बिकाजी फूड्स (Bikaji Foods) के संस्थापक शिव रतन अग्रवाल की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक स्कूल ड्रॉपआउट से लेकर 13430 करोड़ रुपये का साम्राज्य खड़ा करने तक का सफर बेहद प्रेरणादायक है।
बीकानेर के भुजिया किंग शिव रतन अग्रवाल

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आज बिकाजी का नाम सुनते ही जुबान पर स्वाद आ जाता है, लेकिन इसके पीछे शिव रतन अग्रवाल का दशकों का संघर्ष और अटूट विजन है। उन्होंने एक पारिवारिक विवाद के बाद शून्य से शुरुआत की और आज दुनिया के सबसे बड़े नमकीन ब्रांड्स में से एक खड़ा कर दिया।
विरासत में मिला स्वाद: हल्दीराम के संस्थापक के पोते हैं शिव रतन

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शिव रतन अग्रवाल को नमकीन का कारोबार विरासत में मिला था। वे हल्दीराम (Haldiram's) के संस्थापक गंगाबिशन 'हल्दीराम' अग्रवाल के पोते हैं। पारिवारिक व्यवसाय में बंटवारे के बाद, उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाने की ठानी और 1986 में 'बिकाजी' की नींव रखी।
8वीं के बाद छोड़ दी थी पढ़ाई, पर व्यापार की समझ थी जबरदस्त

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शिव रतन अग्रवाल ने केवल 8वीं कक्षा तक ही पढ़ाई की और स्कूल ड्रॉपआउट हो गए। लेकिन किताबी ज्ञान की कमी को उन्होंने अपने 'बिजनेस सेंस' से पूरा किया। उन्हें पता था कि बीकानेरी भुजिया में वह जादू है जिसे अगर सही तरीके से पैकेज किया जाए, तो यह वैश्विक बन सकता है।
बिकाजी नाम के पीछे की दिलचस्प कहानी

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ब्रांड का नाम बिकाजी बीकानेर के संस्थापक राव बीकाजी के नाम पर रखा गया है। शिव रतन अग्रवाल चाहते थे कि उनके उत्पाद की पहचान बीकानेर की संस्कृति और गौरव से जुड़ी रहे। उन्होंने पारंपरिक स्वाद के साथ आधुनिक तकनीक का ऐसा मेल किया कि बिकाजी घर-घर की पसंद बन गया।
ऑटोमेशन और पैकेजिंग: जिसने बदल दी भुजिया की दुनिया

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शिव रतन अग्रवाल ने महसूस किया कि हाथ से भुजिया बनाने की एक सीमा है। उन्होंने भारत में भुजिया बनाने के लिए बड़ी मशीनें और ऑटोमेशन पेश किया। उनकी दूरदर्शिता ही थी कि आज बिकाजी रोजाना सैकड़ों टन नमकीन और मिठाइयों का उत्पादन करता है।
13,430 करोड़ का मार्केट कैप और अमिताभ बच्चन का साथ

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आज बिकाजी फूड्स शेयर बाजार (Stock Market) में लिस्टेड कंपनी है, जिसका मार्केट कैप ₹13,400 करोड़ के पार पहुंच गया है। सदी के महानायक अमिताभ बच्चन इस ब्रांड का चेहरा हैं। शिव रतन अग्रवाल की यह कहानी साबित करती है कि सफलता के लिए डिग्री नहीं, जज्बा जरूरी है।