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भारतीय बाजार में, विभिन्न कार कंपनियां कुछ समय से अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतें बढ़ा रही हैं। हालांकि कार निर्माता कंपनियां आमतौर पर सालाना आधार पर अपने मॉडलों की कीमतें बढ़ाती हैं, लेकिन ये बढ़ोतरी आमतौर पर साल की शुरुआत में और कभी-कभी नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत में होती है।
एक और वृद्धि देखने को मिल सकती है

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हालांकि, अब कीमतों में बढ़ोतरी की रफ्तार तेज हो गई है। कई लोग वाहनों की कीमतों में बार-बार हो रही वृद्धि पर सवाल उठा रहे हैं। वस्तुओं की बढ़ती लागत, आपूर्ति श्रृंखला में गड़बड़ी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण जल्द ही वाहनों की कीमतों में एक और वृद्धि देखने को मिल सकती है।
GST 2.0 के बाद कीमतों में आई थी गिरावट

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सितंबर 2025 में जीएसटी सुधार के बाद कारों की मांग बढ़ी, लेकिन उद्योग में जारी चुनौतियों का असर मार्जिन पर पड़ रहा है। ऑटोकार के अनुसार, हुंडई मोटर्स ने बताया कि कमोडिटी की बढ़ती कीमतों के कारण पिछली तिमाही में मार्जिन लगभग 120 बेसिस पॉइंट कम हो गया, हालांकि इसका कुछ असर एक बार का ही था।
ऑटोमोबाइल कंपनी को उम्मीद

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ऑटोमोबाइल कंपनी को उम्मीद है कि इस वित्तीय वर्ष में वाहनों की मांग बढ़ेगी। कंपनी को घरेलू मांग में 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि की उम्मीद है। बढ़ती कीमतें केवल हुंडई तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य कंपनियां भी इसी तरह के रुझान का सामना कर रही हैं। महिंद्रा ने हाल ही में बोलेरो के कई मॉडलों की कीमतें बढ़ाई हैं।
एसयूवी की कीमतों में बढ़ोतरी

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अप्रैल में, कंपनी ने अपनी कई एसयूवी की कीमतों में 2.5 प्रतिशत तक की वृद्धि की। केवल वाहनों की ही नहीं, बल्कि ट्रैक्टरों की कीमतों में भी वृद्धि की गई है। इन वृद्धियों का कारण कच्चे माल की बढ़ती लागत है। कंपनी का कहना है कि वस्तुओं की बढ़ती लागत से विनिर्माण लागत भी बढ़ रही है।
छोटी कारें भी हो सकती हैं महंगी

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कंपनियां आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन लाने, एक ही स्रोत पर निर्भरता कम करने और आवश्यक पुर्जों का स्टॉक बढ़ाने के लिए स्थानीयकरण पर जोर दे रही हैं।