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अगर आप FASTag से जुड़ी जानकारी या Annual Pass लेने के लिए इंटरनेट पर सर्च कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए. एक छोटी सी लापरवाही आपको साइबर ठगी का शिकार बना सकती है. नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने चेतावनी जारी की है कि FASTag के नाम पर फर्जी वेबसाइटें तेजी से लोगों को निशाना बना रही हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप सही जानकारी के साथ सतर्क रहें. नीचे जानिए इस ठगी से बचने के 7 अहम तरीके.

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FASTag के नाम पर फर्जी वेबसाइटों से सावधान- NHAI ने बताया है कि FASTag Annual Pass के नाम पर कई नकली वेबसाइटें चल रही हैं, जो खुद को सरकारी पोर्टल जैसा दिखाकर लोगों से पैसे वसूल रही हैं.

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गूगल सर्च में ऊपर दिखने वाली साइट भी हो सकती है फर्जी- ठग पेड विज्ञापनों और SEO की मदद से अपनी नकली वेबसाइट को सर्च रिजल्ट में ऊपर दिखाते हैं, जिससे लोग उसे असली समझ लेते हैं.

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असली जैसी दिखती है पेमेंट साइट- ये वेबसाइटें NHAI या FASTag के आधिकारिक पेमेंट पेज की हूबहू कॉपी होती हैं, जिससे यूजर को धोखे का अंदाजा नहीं हो पाता.

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मांगी जाती हैं निजी और वाहन की जानकारी- लिंक पर क्लिक करने के बाद यूजर से मोबाइल नंबर, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर और बैंक या कार्ड से जुड़ी डिटेल्स भरवाई जाती हैं.

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पैसा सीधे ठगों के खाते में चला जाता है- पेमेंट गेटवे असली जैसा दिखाई देता है, लेकिन भुगतान करते ही पैसा साइबर अपराधियों के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है.

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पेमेंट के बाद नहीं मिलता कोई असली कन्फर्मेशन- भुगतान के बाद न तो FASTag पास मिलता है और न ही सही रसीद. कई बार वेबसाइट कुछ समय बाद गायब भी हो जाती है.

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वल आधिकारिक चैनल से ही लें FASTag सेवा- NHAI के अनुसार FASTag या Annual Pass केवल अधिकृत बैंक, मान्यता प्राप्त ऐप या आधिकारिक सरकारी प्लेटफॉर्म (जैसे Rajmarg App) से ही खरीदें. किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले URL जरूर जांचें और OTP या कार्ड डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें.