क्या पहाड़ों की चढ़ाई झेल पाएगी आपकी इलेक्ट्रिक कार? EV से जाने के पहले जान लें 5 कड़वे सच

क्या आपकी इलेक्ट्रिक कार सच में लेह-लद्दाख की खतरनाक चढ़ाई झेल पाएगी? पहाड़ों पर EV की बैटरी, चार्जिंग और रेंज से जुड़े ऐसे सच सामने आए हैं जिन्हें जानकर कई लोग ट्रिप प्लान बदल सकते हैं.

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ठंड में तेजी से घट सकती है बैटरी रेंज

ठंड में तेजी से घट सकती है बैटरी रेंज2 / 7

ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तापमान अक्सर शून्य से नीचे पहुंच जाता है. ऐसी ठंड में लिथियम-आयन बैटरी की परफॉर्मेंस प्रभावित होने लगती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा ठंड में EV की रेंज 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है. यानी शहर में 300 किलोमीटर चलने वाली कार पहाड़ों में काफी कम दूरी तय कर पाएगी.

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चढ़ाई के दौरान तेजी से खत्म होती है बैटरी

चढ़ाई के दौरान तेजी से खत्म होती है बैटरी3 / 7

मैदानी सड़कों की तुलना में पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाना कहीं ज्यादा मुश्किल होता है. खड़ी चढ़ाई पर मोटर को अधिक ताकत लगानी पड़ती है, जिससे बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है. खारदुंग ला जैसे ऊंचे दर्रों पर चढ़ते समय बिजली की खपत सामान्य से कई गुना बढ़ सकती है. इसी वजह से ड्राइवर को बार-बार रेंज की चिंता सताने लगती है.

चार्जिंग स्टेशन की कमी बढ़ाती है टेंशन

चार्जिंग स्टेशन की कमी बढ़ाती है टेंशन4 / 7

लेह शहर में कुछ चार्जिंग स्टेशन जरूर मौजूद हैं, लेकिन दूरदराज के इलाकों में अब भी चार्जिंग सुविधा बहुत सीमित है. नुब्रा वैली या पैंगोंग लेक जैसे क्षेत्रों में EV चार्ज करना मुश्किल हो सकता है. अगर होटल के सामान्य प्लग से चार्ज करना पड़े, तो बैटरी फुल होने में लगभग पूरा दिन लग सकता है. कई बार बिजली कटौती भी बड़ी समस्या बन जाती है.

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भारी बैटरी और खराब रास्तों की चुनौती

भारी बैटरी और खराब रास्तों की चुनौती5 / 7

इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी पैक का वजन काफी ज्यादा होता है. पहाड़ों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों और पत्थरों पर भारी गाड़ी को संभालना आसान नहीं होता. अगर बैटरी पैक नीचे से किसी पत्थर से टकरा जाए, तो नुकसान काफी महंगा साबित हो सकता है. कुछ मामलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ सकता है.

हर बार काम नहीं आती रीजेनरेटिव ब्रेकिंग

हर बार काम नहीं आती रीजेनरेटिव ब्रेकिंग6 / 7

कई लोग मानते हैं कि पहाड़ों से उतरते समय EV की बैटरी अपने-आप चार्ज होती रहती है. यह सही है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है. अगर बैटरी पहले से लगभग फुल है, तो रीजेनरेटिव ब्रेकिंग काम नहीं करेगी. ऐसे में पूरी तरह सामान्य ब्रेक्स पर निर्भर रहना पड़ता है, जो लंबे ढलान पर गर्म होकर कमजोर पड़ सकते हैं.

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पहाड़ों पर EV ले जाने से पहले करें पूरी तैयारी

पहाड़ों पर EV ले जाने से पहले करें पूरी तैयारी7 / 7

अगर आप इलेक्ट्रिक कार से लेह-लद्दाख जाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले चार्जिंग पॉइंट्स की पूरी जानकारी जरूर रखें. बैकअप प्लान, सही मौसम और बैटरी की स्थिति पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. फिलहाल EV टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में सफर के दौरान अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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