भारत में इलेक्ट्रिक कारों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. शहरों में लोग अब EV पर लंबी दूरी तक सफर करने लगे हैं. लेकिन जब बात लेह-लद्दाख, स्पीति या ऊंचे पहाड़ी इलाकों की आती है, तो हालात पूरी तरह बदल जाते हैं. पहाड़ों पर कम तापमान, लंबी चढ़ाई और कम चार्जिंग स्टेशन जैसी चुनौतियां EV यूजर्स के लिए बड़ी परेशानी बन सकती हैं. अगर आप भी अपनी इलेक्ट्रिक कार लेकर पहाड़ों की ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो पहले इन जरूरी बातों को जान लेना बेहतर होगा.
ठंड में तेजी से घट सकती है बैटरी रेंज

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ऊंचे पहाड़ी इलाकों में तापमान अक्सर शून्य से नीचे पहुंच जाता है. ऐसी ठंड में लिथियम-आयन बैटरी की परफॉर्मेंस प्रभावित होने लगती है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्यादा ठंड में EV की रेंज 20 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकती है. यानी शहर में 300 किलोमीटर चलने वाली कार पहाड़ों में काफी कम दूरी तय कर पाएगी.
चढ़ाई के दौरान तेजी से खत्म होती है बैटरी

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मैदानी सड़कों की तुलना में पहाड़ी रास्तों पर गाड़ी चलाना कहीं ज्यादा मुश्किल होता है. खड़ी चढ़ाई पर मोटर को अधिक ताकत लगानी पड़ती है, जिससे बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है. खारदुंग ला जैसे ऊंचे दर्रों पर चढ़ते समय बिजली की खपत सामान्य से कई गुना बढ़ सकती है. इसी वजह से ड्राइवर को बार-बार रेंज की चिंता सताने लगती है.
चार्जिंग स्टेशन की कमी बढ़ाती है टेंशन

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लेह शहर में कुछ चार्जिंग स्टेशन जरूर मौजूद हैं, लेकिन दूरदराज के इलाकों में अब भी चार्जिंग सुविधा बहुत सीमित है. नुब्रा वैली या पैंगोंग लेक जैसे क्षेत्रों में EV चार्ज करना मुश्किल हो सकता है. अगर होटल के सामान्य प्लग से चार्ज करना पड़े, तो बैटरी फुल होने में लगभग पूरा दिन लग सकता है. कई बार बिजली कटौती भी बड़ी समस्या बन जाती है.
भारी बैटरी और खराब रास्तों की चुनौती

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इलेक्ट्रिक कारों में बैटरी पैक का वजन काफी ज्यादा होता है. पहाड़ों के ऊबड़-खाबड़ रास्तों और पत्थरों पर भारी गाड़ी को संभालना आसान नहीं होता. अगर बैटरी पैक नीचे से किसी पत्थर से टकरा जाए, तो नुकसान काफी महंगा साबित हो सकता है. कुछ मामलों में आग लगने का खतरा भी बढ़ सकता है.
हर बार काम नहीं आती रीजेनरेटिव ब्रेकिंग

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कई लोग मानते हैं कि पहाड़ों से उतरते समय EV की बैटरी अपने-आप चार्ज होती रहती है. यह सही है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है. अगर बैटरी पहले से लगभग फुल है, तो रीजेनरेटिव ब्रेकिंग काम नहीं करेगी. ऐसे में पूरी तरह सामान्य ब्रेक्स पर निर्भर रहना पड़ता है, जो लंबे ढलान पर गर्म होकर कमजोर पड़ सकते हैं.
पहाड़ों पर EV ले जाने से पहले करें पूरी तैयारी

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अगर आप इलेक्ट्रिक कार से लेह-लद्दाख जाने की योजना बना रहे हैं, तो पहले चार्जिंग पॉइंट्स की पूरी जानकारी जरूर रखें. बैकअप प्लान, सही मौसम और बैटरी की स्थिति पर ध्यान देना बेहद जरूरी है. फिलहाल EV टेक्नोलॉजी तेजी से आगे बढ़ रही है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में सफर के दौरान अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं.