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गठिया, एसिडिटी, मोटापा या कफ की समस्या ? बाबा रामदेव ने बताया वात, पित्त और कफ को संतुलित करने के घरेलू तरीके

बाबा रामदेव के अनुसार वात, पित्त और कफ के असंतुलन से कई बीमारियां होती हैं. जानिए इन तीनों दोषों से जुड़ी समस्याएं और उनके लिए बताए गए घरेलू उपाय.

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आयुर्वेद के अनुसार शरीर का स्वास्थ्य वात, पित्त और कफ नामक तीन दोषों के संतुलन पर निर्भर करता है. जब इनमें से किसी एक दोष का संतुलन बिगड़ता है, तो शरीर में विभिन्न प्रकार की बीमारियां जन्म लेने लगती हैं. योग गुरु बाबा रामदेव का कहना है कि आज अधिकांश लोग किसी न किसी रूप में इन त्रिदोषों के असंतुलन से प्रभावित हैं.

उन्होंने हाल ही में एक वीडियो में बताया कि सही खान-पान, योग, प्राणायाम और कुछ पारंपरिक घरेलू उपायों की मदद से इन दोषों को संतुलित रखा जा सकता है. आइए जानते हैं कि किस दोष से कौन-सी समस्याएं जुड़ी हैं और उनके लिए उन्होंने क्या उपाय बताए.

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कफ दोष बढ़ने पर कौन-सी समस्याएं होती हैं ?

बाबा रामदेव के अनुसार कफ बढ़ने पर शरीर में बलगम बनने लगता है. इसके कारण नाक बंद होना, गले में कफ जमना, सांस फूलना, आंखों में सूजन, मोटापा, शरीर में सूजन और इन्फ्लेमेशन जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं.

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कफ के लिए घरेलू उपाय

सुबह खाली पेट अनार में चुटकी भर सेंधा नमक डालकर खाएं.
रोज सुबह पपीता खाएं.
दोपहर में 25 से 50 ग्राम भुना हुआ चना खाएं.
इसके साथ काली किशमिश, मुनक्का या द्राक्ष लें.
दूध में हल्दी, अदरक, शिलाजीत, मुलेठी और अश्वगंधा डालकर अच्छी तरह उबालकर पिएं.
नस्य के लिए अणु तेल, बादाम रोगन या सरसों के तेल का उपयोग करें.
नियमित रूप से प्राणायाम करें.

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बाबा रामदेव का कहना है कि ये उपाय कफ को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं.

वात दोष बढ़ने पर कौन-सी बीमारियां हो सकती हैं ?

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उनके अनुसार वात दोष का संबंध शरीर की नसों, जोड़ों और गति से है. वात बढ़ने पर जोड़ों का दर्द, गठिया, नसों की समस्याएं और कई अन्य विकार उत्पन्न हो सकते हैं.

उन्होंने वात रोगों में निम्न समस्याओं का उल्लेख किया—

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गठिया (अर्थराइटिस)
रूमेटॉइड फैक्टर (RA Factor) से जुड़ी समस्याएं
एचएलए-बी27 (HLA-B27) से संबंधित रोग
फाइब्रोमायल्जिया (Fibromyalgia)
ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया (Trigeminal Neuralgia)
पार्किंसन रोग (Parkinson’s Disease)
अल्जाइमर रोग (Alzheimer’s Disease)

वात के लिए बताए गए घरेलू उपाय

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हल्दी, मेथी और सोंठ का पाउडर लें.
सुबह खाली पेट एलोवेरा, गिलोय, पारिजात, निर्गुंडी और सहजन का रस पिएं.
एलोवेरा, अंकुरित मेथी और कच्ची हल्दी को गाय के घी में लहसुन, हींग और जीरे के साथ हल्का पकाकर सब्जी की तरह खाएं.
नियमित योग और प्राणायाम करें.

पित्त दोष बढ़ने पर कौन-सी समस्याएं होती हैं ?

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बाबा रामदेव के अनुसार पित्त बढ़ने से शरीर में गर्मी बढ़ जाती है. इससे एसिडिटी, अल्सर, त्वचा संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव जैसी परेशानियां हो सकती हैं.

उन्होंने पित्त से जुड़ी समस्याओं में शामिल किया—

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एसिडिटी
अल्सर
स्किन प्रॉब्लम्स
गुस्सा
तनाव
एंग्जायटी
डिप्रेशन

पित्त के लिए बताए गए घरेलू उपाय

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सुबह खाली पेट लौकी का जूस पिएं.
एलोवेरा, व्हीटग्रास, पेठा, बेल, दूर्वा और नीम का सेवन करें.
त्रिफला और नीम के पत्तों का चूर्ण तैयार करके सेवन करें.
शरीर को ठंडा रखने वाले खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करें.
योग और आयुर्वेद पर दिया जोर

बाबा रामदेव का कहना है कि केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय लोगों को योग, प्राणायाम, आयुर्वेद और प्राकृतिक जीवनशैली अपनानी चाहिए. उनका मानना है कि पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति और संतुलित आहार से कई सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव किया जा सकता है.

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ध्यान रखें

यह लेख बाबा रामदेव द्वारा बताए गए आयुर्वेदिक और पारंपरिक घरेलू उपायों पर आधारित है. वात, पित्त और कफ आयुर्वेद की अवधारणाएं हैं और आधुनिक चिकित्सा में इनका प्रत्यक्ष वैज्ञानिक समकक्ष नहीं माना जाता. यदि आपको गठिया, अल्सर, पार्किंसन, अल्जाइमर, अस्थमा, ऑटोइम्यून रोग या कोई अन्य गंभीर बीमारी है, तो डॉक्टर की सलाह और निर्धारित उपचार को न छोड़ें. आयुर्वेदिक उपायों को पूरक (complementary) रूप में अपनाने से पहले भी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है.

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First published on: Jul 11, 2026 02:40 PM

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