गंगा एक्सप्रेसवे से सीधे जुड़ेंगे हापुड़ और मेरठ! दो नए इंटरचेंज को मिली मंजूरी, अब आसानी से पूरा होगा कई जिलों का सफर
उत्तर प्रदेश के हापुड़-किठौर मार्ग और हापुड़-मेरठ बॉर्डर पर बनने जा रहे नए रैंप से सफर तो आसान होगा ही, साथ ही आस-पास के गांवों और औद्योगिक क्षेत्रों की तस्वीर भी पूरी तरह बदल जाएगी.
Written By: Azhar Naim|Updated: Jun 20, 2026 18:22
Edited By : Azhar Naim|Updated: Jun 20, 2026 18:22
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गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर बड़ा अपडेट. (Image: AI)
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उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और रिहायशी जिलों में शुमार हापुड़ और मेरठ के लोगों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. काफी समय से स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए अब गंगा एक्सप्रेसवे पर दो नए डायरेक्ट इंटरचेंज बनाने का काम शुरू हो गया है. यूपीडा (UPEIDA) ने इस अहम परियोजना को हरी झंडी दे दी है और जमीन को चिह्नित करने का काम भी तेजी से पूरा कर लिया गया है. माना जा रहा है कि, इस नए फैसले से न सिर्फ वाहनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि हापुड़ और मेरठ के आस-पास के इलाकों में जमीन, घर और गोदाम (Warehouses) खरीदने वाले लोगों के लिए निवेश के बेहतरीन रास्ते भी खुलेंगे.
गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway), कुल लंबाई 594 किलोमीटर (मेरठ से प्रयागराज तक)
नए इंटरचेंज के स्थान
1. हापुड़-किठौर मार्ग (अटोला गांव के पास) 2. हापुड़-मेरठ सीमा (Border) पर
सटीक लोकेशन
जिला सीमा पर स्थित अटोला गांव और शफीआबाद लौटी का संयुक्त बॉर्डर क्षेत्र
आवश्यक भूमि का विवरण
अटोला में 51,393 वर्ग मीटर और किठौर लिंक रोड के लिए लगभग 3 हेक्टेयर जमीन
जमीन अधिग्रहण की लागत
किठौर मार्ग के लिए चिह्नित जमीन के टुकड़े की अनुमानित लागत करीब ₹10.18 करोड़
नोडल एजेंसी
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA)
वर्तमान स्थिति और समय सीमा
जमीन की मार्किंग पूरी, किसानों से खरीद प्रक्रिया शुरू; अगले छह महीनों में तैयार होने का लक्ष्य
अभी कैसी है स्थिति?
वर्तमान में स्थिति यह है कि गंगा एक्सप्रेसवे हापुड़-किठौर सड़क के ऊपर से गुजरता है और नीचे सिर्फ एक छोटा अंडरपास है. इसके कारण किठौर और अटोला जैसे दर्जनों गांवों के लोगों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए कई किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था, जिससे उनका समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते थे. अब यहां नया रैंप बनने से गाड़ियां और भारी ट्रक सीधे नीचे की सड़क से एक्सप्रेसवे पर आ-जा सकेंगे. इसके अलावा, हापुड़ के चार बड़े औद्योगिक क्षेत्रों-सिम्भावली ईस्ट, सिम्भावली वेस्ट, सदरपुर और पूठ के फैक्ट्री मालिकों को अपने माल की सप्लाई दिल्ली, मेरठ और प्रयागराज भेजने में जो देरी होती थी, वह समस्या भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. इतना ही नहीं, गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाले इन इंटरचेंजों के बनने के बाद हापुड़, मेरठ, बागपत, बिजनौर, मवाना और किठौर क्षेत्रों के बीच आना-जाना पहले से अधिक आसान और तेज हो जाएगा.
भविष्य में होने वाले फायदे
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है. किसानों के साथ बातचीत करके नया एलाइनमेंट तैयार कर लिया गया है और छह महीने के भीतर इन प्रवेश द्वारों को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. इस नए कनेक्टिविटी अपग्रेड से इन मुख्य क्षेत्रों और लोगों को सबसे बड़ा फायदा पहुंचने वाला है:
आस-पास के जिलों को लाभ: हापुड़ और मेरठ के साथ-साथ बागपत, बिजनौर, मवाना और किठौर जैसे कस्बों का दिल्ली और पूर्वी यूपी से संपर्क बेहद आसान हो जाएगा.
व्यापार को मिलेगी रफ्तार: हापुड़ के चारों एक्टिव इंडस्ट्रियल जोन के उत्पाद अब बिना किसी ट्रैफिक जाम के सीधे और कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे.
गांवों का होगा विकास: अटोला और शफीआबाद लौटी समेत दर्जनों ग्रामीण इलाकों के लोगों को रोजगार और बेहतर यातायात की सीधी सुविधा मिलेगी.
कीमतों में आएगा उछाल: एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ लॉजिस्टिक्स पार्क, कमर्शियल प्लॉट्स और आवासीय कॉलोनियों की मांग बढ़ने से जमीनों के दाम तेजी से बढ़ेंगे.
उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और रिहायशी जिलों में शुमार हापुड़ और मेरठ के लोगों के लिए एक बड़ी खबर आ रही है. काफी समय से स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए अब गंगा एक्सप्रेसवे पर दो नए डायरेक्ट इंटरचेंज बनाने का काम शुरू हो गया है. यूपीडा (UPEIDA) ने इस अहम परियोजना को हरी झंडी दे दी है और जमीन को चिह्नित करने का काम भी तेजी से पूरा कर लिया गया है. माना जा रहा है कि, इस नए फैसले से न सिर्फ वाहनों की रफ्तार बढ़ेगी, बल्कि हापुड़ और मेरठ के आस-पास के इलाकों में जमीन, घर और गोदाम (Warehouses) खरीदने वाले लोगों के लिए निवेश के बेहतरीन रास्ते भी खुलेंगे.
गंगा एक्सप्रेसवे (Ganga Expressway), कुल लंबाई 594 किलोमीटर (मेरठ से प्रयागराज तक)
नए इंटरचेंज के स्थान
1. हापुड़-किठौर मार्ग (अटोला गांव के पास) 2. हापुड़-मेरठ सीमा (Border) पर
सटीक लोकेशन
जिला सीमा पर स्थित अटोला गांव और शफीआबाद लौटी का संयुक्त बॉर्डर क्षेत्र
आवश्यक भूमि का विवरण
अटोला में 51,393 वर्ग मीटर और किठौर लिंक रोड के लिए लगभग 3 हेक्टेयर जमीन
जमीन अधिग्रहण की लागत
किठौर मार्ग के लिए चिह्नित जमीन के टुकड़े की अनुमानित लागत करीब ₹10.18 करोड़
नोडल एजेंसी
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA)
वर्तमान स्थिति और समय सीमा
जमीन की मार्किंग पूरी, किसानों से खरीद प्रक्रिया शुरू; अगले छह महीनों में तैयार होने का लक्ष्य
अभी कैसी है स्थिति?
वर्तमान में स्थिति यह है कि गंगा एक्सप्रेसवे हापुड़-किठौर सड़क के ऊपर से गुजरता है और नीचे सिर्फ एक छोटा अंडरपास है. इसके कारण किठौर और अटोला जैसे दर्जनों गांवों के लोगों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने के लिए कई किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता था, जिससे उनका समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते थे. अब यहां नया रैंप बनने से गाड़ियां और भारी ट्रक सीधे नीचे की सड़क से एक्सप्रेसवे पर आ-जा सकेंगे. इसके अलावा, हापुड़ के चार बड़े औद्योगिक क्षेत्रों-सिम्भावली ईस्ट, सिम्भावली वेस्ट, सदरपुर और पूठ के फैक्ट्री मालिकों को अपने माल की सप्लाई दिल्ली, मेरठ और प्रयागराज भेजने में जो देरी होती थी, वह समस्या भी पूरी तरह खत्म हो जाएगी. इतना ही नहीं, गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाले इन इंटरचेंजों के बनने के बाद हापुड़, मेरठ, बागपत, बिजनौर, मवाना और किठौर क्षेत्रों के बीच आना-जाना पहले से अधिक आसान और तेज हो जाएगा.
भविष्य में होने वाले फायदे
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, प्रोजेक्ट पर युद्ध स्तर पर काम चल रहा है. किसानों के साथ बातचीत करके नया एलाइनमेंट तैयार कर लिया गया है और छह महीने के भीतर इन प्रवेश द्वारों को चालू करने का लक्ष्य रखा गया है. इस नए कनेक्टिविटी अपग्रेड से इन मुख्य क्षेत्रों और लोगों को सबसे बड़ा फायदा पहुंचने वाला है:
आस-पास के जिलों को लाभ: हापुड़ और मेरठ के साथ-साथ बागपत, बिजनौर, मवाना और किठौर जैसे कस्बों का दिल्ली और पूर्वी यूपी से संपर्क बेहद आसान हो जाएगा.
व्यापार को मिलेगी रफ्तार: हापुड़ के चारों एक्टिव इंडस्ट्रियल जोन के उत्पाद अब बिना किसी ट्रैफिक जाम के सीधे और कम समय में बड़े बाजारों तक पहुंच सकेंगे.
गांवों का होगा विकास: अटोला और शफीआबाद लौटी समेत दर्जनों ग्रामीण इलाकों के लोगों को रोजगार और बेहतर यातायात की सीधी सुविधा मिलेगी.
कीमतों में आएगा उछाल: एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ लॉजिस्टिक्स पार्क, कमर्शियल प्लॉट्स और आवासीय कॉलोनियों की मांग बढ़ने से जमीनों के दाम तेजी से बढ़ेंगे.