आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी में करियर बनाने का सपना देखने वाले छात्रों के लिए देहरादून से अच्छी खबर है. तुलाज यूनिवर्सिटी, जिसे हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया है, अब उत्तर भारत के उन चुनिंदा विश्वविद्यालयों में शामिल हो गई है जहाँ AI और नई तकनीक को शिक्षा के केंद्र में रखा गया है.
यूजीसी और नैक से ए प्लस मान्यता प्राप्त इस यूनिवर्सिटी को चार में से 3.34 अंक मिले हैं. स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद यूनिवर्सिटी को पूर्ण शैक्षणिक स्वायत्तता मिल गई है. यानी अब वह अपने कोर्स खुद तय कर सकती है, नई specialisations जोड़ सकती है और अपनी डिग्री खुद दे सकती है.
“हमारा मकसद है कि यहाँ से निकलने वाला हर छात्र — चाहे वो बी.टेक करे, एमबीए करे या लॉ पढ़े — AI और नई तकनीक की ठोस समझ लेकर जाए. आज के नौकरी बाज़ार की यही सबसे बड़ी माँग है.” — रौनक जैन, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, तुलाज यूनिवर्सिटी.
एआईएमएल, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी — कोर्स की पूरी रेंज
“हमारा मकसद है कि यहाँ से निकलने वाला हर छात्र चाहे वो बी.टेक करे, एमबीए करे या लॉ पढ़े AI और नई तकनीक की ठोस समझ लेकर जाए. आज के नौकरी बाज़ार की यही सबसे बड़ी माँग है.”
तुलाज यूनिवर्सिटी में AI और उभरती तकनीक से जुड़े कई कोर्स चल रहे हैं. बी.टेक में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड मशीन लर्निंग (एआईएमएल), डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी और फुल स्टैक डेवलपमेंट की पढ़ाई होती है. बीसीए और एमसीए में भी एआईएमएल, साइबर सिक्योरिटी और फुल स्टैक डेवलपमेंट के अलग ट्रैक हैं.
बंधन में एमबीए बिजनेस एनालिटिक्स और एमबीए डिजिटल मार्केटिंग के कोर्स हैं. इस साल से लॉ स्कूल भी शुरू हुआ है जिसमें एलएलबी, बीए एलएलबी और बीबीए एलएलबी की पढ़ाई होगी. इसके अलावा बीएससी एग्रीकल्चर, बी फार्मा, पत्रकारिता एवं जनसंचार और एम.टेक के कोर्स भी उपलब्ध हैं.
यूनिवर्सिटी का कहना है कि AI को यहाँ सिर्फ एक विषय की तरह नहीं बल्कि पूरी शिक्षा व्यवस्था की सोच में शामिल किया गया है. स्मार्ट क्लासरूम, AI-enabled लर्निंग सिस्टम, IoT लैब और फैब लैब इसी का हिस्सा हैं.
आईआईटी-आईआईएम से जुड़ाव, 2,000 से ज्यादा शोध पत्र
शोध के मामले में तुलाज यूनिवर्सिटी का रिकॉर्ड मजबूत बताया जा रहा है. अब तक 2,000 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और 30 से ज्यादा पेटेंट दर्ज हैं. एमएसएमई और स्टार्टअप उत्तराखंड से मान्यता प्राप्त टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर में 20 से ज्यादा स्टार्टअप काम कर रहे हैं. सरकार से अब तक डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा के शोध अनुदान मिल चुके हैं.
आईआईटी और आईआईएम के साथ शैक्षणिक सहयोग इस यूनिवर्सिटी को उत्तर भारत की बाकी निजी यूनिवर्सिटी से अलग करता है. ड्रोन तकनीक पर काम करने के लिए एक विशेष उत्कृष्टता केंद्र भी बनाया गया है.
700 से ज्यादा प्लेसमेंट ड्राइव, 22 एकड़ का आवासीय परिसर
प्लेसमेंट के मामले में यहाँ अब तक 700 से ज्यादा कैंपस भर्ती अभियान चल चुके हैं और 25 से ज्यादा कंपनियों के साथ करार है. प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा और उद्योग जगत से सीधे जुड़ाव के ज़रिए छात्रों को पहले दिन से नौकरी के लिए तैयार किया जाता है.
तुलाज यूनिवर्सिटी का 22 एकड़ का वाई-फाई सक्षम आवासीय परिसर देहरादून में स्थित है. यहाँ 70,000 से ज्यादा किताबों की लाइब्रेरी, फुटबॉल और एथलेटिक्स स्टेडियम, क्रिकेट मैदान, शूटिंग रेंज, योग केंद्र और 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है. एनसीसी और एनएसएस की इकाइयाँ भी सक्रिय हैं.
25 से अधिक राज्यों और छह देशों के छात्र यहाँ मिलकर पढ़ते हैं. अब तक 7,000 से ज्यादा पूर्व छात्र देश-विदेश में काम कर रहे हैं.
“अगर आप उत्तर भारत में ऐसे विश्वविद्यालय की तलाश में हैं जहाँ AI, Data Science और Cybersecurity की पढ़ाई के साथ-साथ मज़बूत placement और research ecosystem भी हो — तो तुलाज यूनिवर्सिटी, देहरादून एक गंभीर विकल्प है.”
स्टेट प्राइवेट यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के साथ तुलाज यूनिवर्सिटी अब उत्तर भारत की उन गिनी-चुनी यूनिवर्सिटी में शामिल हो गई है जहाँ तकनीक, शोध, उद्योग जगत से जुड़ाव और छात्रों का समग्र विकास एक साथ हो रहा है. यूनिवर्सिटी का टैगलाइन ‘Where Bharat Innovates’ इसी सोच को दर्शाता है.
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