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पूंजीगत व्यय में तेजी का सीधा संबंध नए उद्योगों, बेहतर कनेक्टिविटी और रोजगार अवसरों से है: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

मध्यप्रदेश में पूंजीगत व्यय, GSDP और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ आर्थिक मजबूती के संकेत मिले हैं. उद्योग, सेवा और कृषि क्षेत्र में सुधारों के जरिए सरकार ने 2047 तक विकसित राज्य का लक्ष्य तय किया है.

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Edited By : Palak Saxena Updated: Feb 17, 2026 22:59

वित्तीय ताकत और विकास के संकेत

अभूतपूर्व पूंजीगत व्यय (Capex):

हमारी सरकार के गठन के बाद से पूंजीगत व्यय में 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. वर्ष 2023-24 में पूंजीगत व्यय ₹56,539 करोड़ था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर ₹82,513 करोड़ होने का अनुमान है. यह सरकार के अधोसंरचना निवेश फोकस को दर्शाता है.

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पूंजीगत व्यय में तेजी का सीधा संबंध नए उद्योगों, बेहतर कनेक्टिविटी और रोजगार अवसरों से है. इससे स्पष्ट है कि सरकार केवल घोषणाएँ नहीं कर रही, बल्कि जमीन पर निवेश कर रही है.

कर्नाटक का वर्ष 2025-26 का पूंजीगत व्यय ₹71,336 करोड़ था, जबकि मध्यप्रदेश का पूंजीगत व्यय ₹82,513 करोड़ अनुमानित है यानी विकसित कहे जाने वाले राज्यों को भी पीछे छोड़ा गया.

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मजबूत GSDP वृद्धि:

सरकार बनने के पहले वर्ष में GSDP में 10% से अधिक वृद्धि हुई और दूसरे वर्ष में 11% से अधिक अनुमानित है. लगातार दो वर्षों तक दो अंकों की वृद्धि के साथ कुल 22.56% की बढ़ोतरी हुई है. यह अधोसंरचना, MSME और कृषि सुधारों की सफलता दर्शाता है.
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प्रति व्यक्ति आय (PCI) में उछाल:

2023-24 में ₹1,41,756 से बढ़कर 2025-26 में ₹1,69,050 अनुमानित — मात्र दो वर्षों में 19.25% की वृद्धि. यह “समृद्ध मध्यप्रदेश” विज़न की उपलब्धि है.

भावांतर योजना:

किसानों को बाजार उतार-चढ़ाव से सुरक्षा, विश्वास में वृद्धि और अधिक उत्पादन को प्रोत्साहन.

उर्वरक वितरण डिजिटलीकरण:

ऐप आधारित स्टॉक जांच, GPS ट्रैकिंग और आधार लिंक्ड वितरण से सही किसान तक समय पर खाद पहुँच रही है.

दाल उत्पादन:

लगभग 225 लाख टन उत्पादन, करीब 6% वृद्धि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती.
महिला दाल उत्पादक समूह व ‘लखपति दीदी’ पहल: ग्रामीण महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं.

सेवा क्षेत्र:

अर्थव्यवस्था में 37% हिस्सेदारी, पिछले वर्ष 15.8% की मजबूत वृद्धि — पर्यटन, IT और वित्तीय सेवाएँ प्रमुख आधार.

युवाओं के लिए रोजगार:

सेवा क्षेत्र विस्तार से नए अवसर और “उद्योग एवं रोजगार वर्ष” को बल.

उद्योग क्षेत्र:

9.93% वृद्धि. GIS-2025 से लगभग ₹30 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव, जिनमें ₹8.5 लाख करोड़ जमीन पर उतर चुके.
MSME और स्टार्टअप:
लगभग ₹2,900 करोड़ सहायता, 1,723 सक्रिय स्टार्टअप, कंपनी पूंजीकरण में 13.6% वृद्धि, CSR व्यय लगभग ₹600 करोड़.

रोजगार सृजन:

73,669 नई नौकरियाँ.

भविष्य की दिशा:

सेमीकंडक्टर व ड्रोन जैसी नई औद्योगिक नीतियाँ लक्ष्य 2047 तक विकसित राज्य.

First published on: Feb 17, 2026 10:59 PM

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