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सुनील जाखड़ पंजाबियों को कर रहे गुमराह; भारत-अमेरिका समझौता किसान और देश विरोधी: कुलदीप धालीवाल

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर किसानों के हित बेचने का आरोप लगाया है. कुलदीप धालीवाल ने सुनील जाखड़ को चुनौती दी कि वे बताएं यह समझौता छोटे और गरीब किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है.

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Edited By : Palak Saxena Updated: Feb 8, 2026 19:51

आम आदमी पार्टी पंजाब ने तथाकथित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की कड़ी निंदा की है. पार्टी ने इसे एक खतरनाक, किसान-विरोधी और देश-विरोधी समझौता बताया है जो भारतीय कृषि को तबाह कर देगा और लाखों किसानों को आर्थिक बर्बादी की ओर धकेल देगा.

आम आदमी पार्टी पंजाब के मुख्य प्रवक्ता और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने कहा कि भाजपा नेता सुनील जाखड़ इस समझौते का जश्न मना रहे हैं, जबकि वे इसके भारत के गरीब और छोटे किसानों पर पड़ने वाले विनाशकारी परिणामों को या तो समझ नहीं रहे या जानबूझकर छुपा रहे हैं.

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धालीवाल ने कहा कि सुनील जाखड़ कह रहे हैं कि ‘आप’ चुप है. मैं साफ कर दूं कि हम चुप नहीं हैं. जिस दिन से यह समझौता घोषित हुआ, उसी दिन से पिछले दस दिनों से हम आपत्तियां उठा रहे हैं. असल में भाजपा ने देश को अंधेरे में रखा. प्रधानमंत्री संसद में नहीं बोल सके. देश को इस समझौते की जानकारी डोनाल्ड ट्रंप के ट्वीट से मिली.

उन्होंने बताया कि ट्रंप ने अपने बयानों में बार-बार ‘एग्रीकल्चर’ यानी कृषि शब्द का इस्तेमाल किया, जो हर भारतीय किसान के लिए चिंता का विषय होना चाहिए. उन्होंने कहा कि हमारी चिंता सीधी और गंभीर है – यह समझौता भारतीय बाजारों को भारी सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोल देता है, जो सीधे तौर पर उन भारतीय किसानों के लिए खतरा है जिन्हें पहले से ही बहुत कम या कोई सरकारी मदद नहीं मिलती.

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धालीवाल ने लाल ज्वार (रेड सॉर्गम) का उदाहरण देते हुए बताया कि इसका 75 प्रतिशत उत्पादन अमेरिका में होता है, जबकि भारत में इसे महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों के गरीब किसान बिना किसी एमएसपी समर्थन के उगाते हैं.

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी लाल ज्वार और अन्य अमेरिकी अनाज व डेयरी उत्पाद भारतीय बाजारों में आ गए तो हमारी मक्का, बाजरा और देसी फसलें तबाह हो जाएंगी. पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के किसान बर्बाद हो जाएंगे.

उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर सब्सिडी वाली अमेरिकी कपास भारत में आई तो कपास किसानों का क्या होगा? अगर अमेरिकी बादाम और अखरोट बाजार में छा गए तो जम्मू-कश्मीर के किसान कहां जाएंगे? हिमाचल और कश्मीर के सेब उत्पादक सस्ते अमेरिकी सेबों के सामने कैसे टिकेंगे? और इसके बाद आने वाले डेयरी व अन्य कृषि उत्पादों का क्या होगा?

धालीवाल ने भाजपा सरकार पर भारत के हितों को पूरी तरह समर्पित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पहले भारतीय सामान पर 2.8 प्रतिशत टैरिफ लगता था. ट्रंप के आने के बाद टैरिफ बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया. अब भारतीय निर्यात पर 18 प्रतिशत टैरिफ है. वहीं दूसरी ओर, भारत ने अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ 60 प्रतिशत से घटाकर लगभग शून्य कर दिया है. उन्होंने कहा कि यह कोई व्यापार समझौता नहीं है, यह आर्थिक समर्पण है.

सुनील जाखड़ पर तीखा प्रहार करते हुए धालीवाल ने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी तो जाखड़ इंदिरा गांधी की प्रशंसा गाते थे. आज वे नरेंद्र मोदी की प्रशंसा गाते हैं. लेकिन वे कभी किसानों या पंजाबियों के लिए नहीं बोलते. किसानों के लिए बोलिए, अपने राजनीतिक आकाओं के लिए नहीं.

धालीवाल ने दोहराया कि यह समझौता भारतीय किसानों के खिलाफ है, राष्ट्रीय हित के खिलाफ है, भारतीय कृषि को तबाह कर देगा और किसानों को दिवालियापन और आत्महत्या की ओर धकेल देगा.

उन्होंने पूछा कि अमेरिका को अपने बचे हुए कृषि उत्पादों के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार मिल गया. लेकिन हमारे किसान कहां जाएंगे? इसका जवाब कौन देगा?

धालीवाल ने सुनील जाखड़ और भाजपा सरकार को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि भारत की जनता को बताएं कि यह समझौता भारतीय किसानों के हित में कैसे है? पहले एक सवाल का जवाब दें – जब अमेरिकी लाल ज्वार, मक्का, कपास, सेब और बादाम हमारे बाजारों में आ जाएंगे तो भारतीय किसानों को क्या फायदा होगा?

धालीवाल ने भाजपा पंजाब के नेताओं को चेतावनी दी कि बोलने से पहले सोचें और देश को गुमराह करना बंद करें. उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी इस “किसान-विरोधी साजिश” का हर स्तर पर पर्दाफाश करती रहेगी.

First published on: Feb 08, 2026 07:51 PM

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