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तमिलनाडु के लिए NDA में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय? जल्द लग सकती है मुहर, जानिए- क्या बनाया गया है मास्टर प्लान

2021 में AIADMK और भाजपा ने एनडीए के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में एनडीए को कुल 75 सीटें मिली थीं, जिनमें AIADMK ने 66 और बीजेपी ने 4 सीटें जीती थीं.

Author Written By: Kumar Gaurav Updated: Jan 7, 2026 15:15
पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी दो दिन के दिल्ली दौरे पर आए हुए हैं.

तमिलनाडु में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए की सीट शेयरिंग की तस्वीर तेजी से साफ होती दिख रही है. सूत्रों के मुताबिक, तय माना जा रहा है कि पीएमके आगामी विधानसभा चुनाव एनडीए के साथ मिलकर लड़ेगी. बताया जा रहा है कि एनडीए में पीएमके के अंबुमणि रामदास गुट को 18 विधानसभा सीटें और 1 राज्यसभा सीट देने पर सहमति बनी है. सीट शेयरिंग को अंतिम रूप देने के लिए AIADMK प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी दो दिवसीय दिल्ली दौरे पर हैं. बुधवार शाम वह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं. इस बैठक में तमिलनाडु में सीट शेयरिंग पर अंतिम मुहर लगाई जा सकती हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस मुलाकात में बीजेपी, AIADMK और पीएमके के बीच सीटों के बंटवारे, साझा रणनीति और चुनावी समन्वय पर अंतिम सहमति बन सकती है.

भाजपा जहां तमिलनाडु में एनडीए को एक मजबूत और संगठित विकल्प के रूप में पेश करना चाहती है, वहीं AIADMK गठबंधन की धुरी बने रहकर अपने प्रभाव को सुरक्षित रखना चाहती है.

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पीएमके का वन्नियार वोट बैंक उत्तर और मध्य तमिलनाडु में निर्णायक माना जाता है. ऐसे में सीमित लेकिन प्रभावी सीटें देकर एनडीए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है. वहीं, राज्यसभा सीट का आश्वासन पीएमके नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व देने का संकेत माना जा रहा है.

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2021 में किसे मिले थे कितने वोट

2021 विधानसभा चुनाव का संदर्भ भी इस रणनीति को समझने में अहम है. 2021 में AIADMK और भाजपा ने एनडीए के तहत मिलकर चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में एनडीए को कुल 75 सीटें मिली थीं, जिनमें AIADMK ने 66 और बीजेपी ने 4 सीटें जीती थीं. सहयोगी दलों ने भी कुछ सीटें जीती थीं. वोट शेयर की बात करें तो डीएमके को करीब 38 फीसदी वोट मिले थे, जो सबसे ज्यादा था. AIADMK को करीब 33 फीसदी, कांग्रेस को 4-4.3 फीसदी, जबकि बीजेपी को करीब 2.6 फीसदी वोट मिले थे.

अमित शाह की तमिलनाडु यात्रा

हाल के महीनों में अमित शाह की तमिलनाडु यात्रा ने सियासी हलचल और तेज कर दी. गृह मंत्री ने न सिर्फ एक बड़ी सार्वजनिक सभा को संबोधित किया, बल्कि बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक भी ली. इससे साफ संकेत मिला कि पार्टी राज्य में संगठन और चुनावी रणनीति दोनों मोर्चों पर आक्रामक तैयारी में है.

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भाजपा पर किस पर फोकस?

बीजेपी इस बार कोयंबटूर, मदुरै और चेन्नई पर खास फोकस कर रही है. पार्टी ने पारंपरिक रूप से शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में अपनी पैठ बनाई है. कोयंबटूर की दो सीटों पर बीजेपी मजबूती से दावा ठोक रही है, जबकि चेन्नई महानगर की 3 से 4 सीटों पर पार्टी की नजर है, जहां मध्यम वर्गीय वोटर्स और हिंदी भाषी आबादी निर्णायक भूमिका में मानी जाती है.

सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह की रणनीति सिर्फ बीजेपी को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एनडीए को चुनावी तौर पर अभेद्य बनाने की है. इसी कड़ी में बीजेपी, AIADMK के दोनों धड़ों – टीटीवी दिनाकरन और ओ. पन्नीरसेल्वम को EPS के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन में वापस लाने की कोशिश कर रही है. अगर यह सियासी ‘सोशल इंजीनियरिंग’ सफल होती है, तो डीएमके के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी तय मानी जा रही है. रामेश्वरम रीजन में भी पार्टी इसी समीकरण के तहत उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है.

EPS–अमित शाह की बैठक के बाद तमिलनाडु में एनडीए का चुनावी ब्लूप्रिंट लगभग तय हो सकता है. इसके बाद गठबंधन की औपचारिक घोषणा और साझा नैरेटिव के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी की जाएगी.

First published on: Jan 07, 2026 03:15 PM

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