वक्फ संशोधन बिल 2025 लोकसभा में पास हो गया है। बीजेपी ने जहां इसे मुस्लिम समुदाय के विकास और देश की उन्नति के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया तो विपक्ष ने केंद्र सरकार पर बिल पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। लोकसभा में इस विधेयक को पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार मस्जिदों के प्रबंधन या धार्मिक क्रियाकलापों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।
उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि सेंट्रल वक्फ बोर्ड में कम से कम दो महिलाएं, राज्य वक्फ बोर्ड में एक महिला सदस्य जरूर रहेंगी। उनका कहना था कि हम किसी जाति-धर्म की वजह से सांसद नहीं बने हैं, आपका ट्रस्ट है, ट्रस्ट को चैरिटी कमिश्नर संभालता है। आप कैसे कहेंगे कि वह मुसलमान नहीं है तो कैसे संभाल सकता है।
दुनियाभर में वक्फ की 90% से ज्यादा संपत्ति इमामबाड़ों, कब्रिस्तानों, मस्जिद और दरगाहों के रूप में
जानकारी के अनुसार ईरान, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, मलेशिया भारत, बांग्लादेश, मिस्र, तुर्की, और अल्जीरिया समेत अधिकांश ऐसे देश जहां मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं वक्फ बोर्ड काम करता है। कई राज्यों में ये धार्मिक संगठनों या राज्यों की विभिन्न कमेटियों के अधीन है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में वक्फ की 90% से ज्यादा संपत्ति इमामबाड़ों, कब्रिस्तानों, मस्जिद और दरगाहों के रूप में मौजूद है।
पाकिस्तान के पास 881913 वर्ग किलोमीटर जमीन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में वक्फ बोर्ड के पास कुल करीब 3804 वर्ग किलोमीटर जमीन है। जबकि पाकिस्तान में वक्फ बोर्ड के पास तकरीबन 881913 वर्ग किलोमीटर जमीन आती है। ऐसे में पाकिस्तान के पास इंडिया से करीब 200 गुना से भी ज्यादा जमीन है। बता दें पहली बार मुगल काल में इंडिया में वक्फ की प्रथा शुरू हुई थी। इसके पीछे शासकों का मकसद अपनी धार्मिक प्रतिबद्धता दिखाना और जनता के लिए सुविधाएं उपलब्ध करना था।
पाकिस्तान में किसके अधीन काम करता है वक्फ बोर्ड ?
पाकिस्तान मीडिया के अनुसार उनके देश में वक्फ की संपत्तियों की देखरेख और कामकाज इस्लामाबाद और राज्य सरकारों के अंतर्गत आता है। जबकि इंडिया की बात करें तो यहां वक्फ इस्लामी कानून (शरीयत) से लिया गया सिद्धांत है। जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को धर्मार्थ, सामुदायिक या धार्मिक उद्देश्यों के लिए हमेशा के लिए दान कर देता है। इस्लामी कानून में ऐसी संपत्ति किसी भी व्यक्तिगत मालिकाना हक से बाहर हो जाती है और फिर वह अल्लाह की संपत्ति मानी जाती है।
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मैं रामभक्त मुझे अयोध्या न्यास में शामिल करो… वक्फ बिल पर आगबबूला हुए इमरान मसूद का बड़ा बयान
वक्फ संशोधन बिल 2025 लोकसभा में पास हो गया है। बीजेपी ने जहां इसे मुस्लिम समुदाय के विकास और देश की उन्नति के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया तो विपक्ष ने केंद्र सरकार पर बिल पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया है। लोकसभा में इस विधेयक को पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार मस्जिदों के प्रबंधन या धार्मिक क्रियाकलापों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी।
उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि सेंट्रल वक्फ बोर्ड में कम से कम दो महिलाएं, राज्य वक्फ बोर्ड में एक महिला सदस्य जरूर रहेंगी। उनका कहना था कि हम किसी जाति-धर्म की वजह से सांसद नहीं बने हैं, आपका ट्रस्ट है, ट्रस्ट को चैरिटी कमिश्नर संभालता है। आप कैसे कहेंगे कि वह मुसलमान नहीं है तो कैसे संभाल सकता है।
दुनियाभर में वक्फ की 90% से ज्यादा संपत्ति इमामबाड़ों, कब्रिस्तानों, मस्जिद और दरगाहों के रूप में
जानकारी के अनुसार ईरान, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, नाइजीरिया, मलेशिया भारत, बांग्लादेश, मिस्र, तुर्की, और अल्जीरिया समेत अधिकांश ऐसे देश जहां मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं वक्फ बोर्ड काम करता है। कई राज्यों में ये धार्मिक संगठनों या राज्यों की विभिन्न कमेटियों के अधीन है। एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में वक्फ की 90% से ज्यादा संपत्ति इमामबाड़ों, कब्रिस्तानों, मस्जिद और दरगाहों के रूप में मौजूद है।
पाकिस्तान के पास 881913 वर्ग किलोमीटर जमीन
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत में वक्फ बोर्ड के पास कुल करीब 3804 वर्ग किलोमीटर जमीन है। जबकि पाकिस्तान में वक्फ बोर्ड के पास तकरीबन 881913 वर्ग किलोमीटर जमीन आती है। ऐसे में पाकिस्तान के पास इंडिया से करीब 200 गुना से भी ज्यादा जमीन है। बता दें पहली बार मुगल काल में इंडिया में वक्फ की प्रथा शुरू हुई थी। इसके पीछे शासकों का मकसद अपनी धार्मिक प्रतिबद्धता दिखाना और जनता के लिए सुविधाएं उपलब्ध करना था।
पाकिस्तान में किसके अधीन काम करता है वक्फ बोर्ड ?
पाकिस्तान मीडिया के अनुसार उनके देश में वक्फ की संपत्तियों की देखरेख और कामकाज इस्लामाबाद और राज्य सरकारों के अंतर्गत आता है। जबकि इंडिया की बात करें तो यहां वक्फ इस्लामी कानून (शरीयत) से लिया गया सिद्धांत है। जिसमें कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति को धर्मार्थ, सामुदायिक या धार्मिक उद्देश्यों के लिए हमेशा के लिए दान कर देता है। इस्लामी कानून में ऐसी संपत्ति किसी भी व्यक्तिगत मालिकाना हक से बाहर हो जाती है और फिर वह अल्लाह की संपत्ति मानी जाती है।
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