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आतंक के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में बड़ा एक्शन, 20 जिलों में VPN सेवाएं दो महीने के लिए बैन

जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ बड़ा फैसला लिया गया है, जहां प्रशासन ने अनधिकृत VPN सेवाओं पर रोक लगा दी है. सभी 20 जिलों में यह प्रतिबंध लागू कर दिया गया है, जिसका मकसद देश विरोधी गतिविधियों पर रोक लगाना है. पढ़ें श्रीनगर से आसिफ सुहाफ की खास रिपोर्ट.

Author Written By: Raja Alam Updated: Jan 8, 2026 21:44

जम्मू कश्मीर प्रशासन ने पूरे केंद्र शासित प्रदेश के सभी 20 जिलों में अनधिकृत वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क यानी VPN सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लागू कर दिया है. इस फैसले का मकसद आतंकियों और उनके मददगारों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे एन्क्रिप्टेड संचार नेटवर्क को तोड़ना बताया गया है. जिला मजिस्ट्रेटों ने राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और साइबर सुरक्षा के खतरे का हवाला देते हुए आदेश जारी किए हैं. यह रोक फिलहाल दो महीने के लिए लगाई गई है, लेकिन सुरक्षा हालात की समीक्षा के बाद इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है. प्रशासन का कहना है कि यह कदम मौजूदा हालात में बेहद जरूरी है और इसका मकसद आम लोगों को परेशान करना नहीं बल्कि सुरक्षा को मजबूत करना है.

जम्मू-कश्मीर के इन जिलों में बैन हुआ VPN

यह प्रतिबंध कश्मीर घाटी के सभी 10 जिलों श्रीनगर, बडगाम, शोपियां, कुलगाम, अनंतनाग, कुपवाड़ा, गांदरबल, बांदीपोरा, पुलवामा और बारामुला में लागू किया गया है. इसके साथ ही जम्मू क्षेत्र के प्रमुख जिलों में भी यह आदेश प्रभावी है. आदेश के तहत पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मोबाइल फोन की जांच कर रही हैं और अनधिकृत VPN पाए जाने पर कार्रवाई की जा रही है. नियम तोड़ने वालों पर एफआईआर दर्ज की जा सकती है और पूछताछ भी की जा रही है. अब तक सत्यापन अभियानों में करीब 800 से 1000 लोगों से पूछताछ हो चुकी है. अधिकारियों का दावा है कि यह जांच उन लोगों पर केंद्रित है जो VPN का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों या सीमा पार संपर्क के लिए कर रहे हैं.

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देश विरोधी तत्वों ने किया नेटवर्क का गलत इस्तेमाल

डिविजनल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने इस कदम को मौजूदा सुरक्षा हालात में जरूरी बताया है. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें समाज विरोधी और देश विरोधी तत्वों ने नेटवर्क का गलत इस्तेमाल किया है. कड़ी निगरानी रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस ने नए आपराधिक कानून के तहत जरूरी प्रावधान लागू किए हैं. यह कदम कुछ समय के लिए है और नियमित रूप से इसकी समीक्षा की जाएगी. सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक खुफिया जानकारी मिली थी कि आतंकी, उनके सहयोगी और समर्थक VPN का इस्तेमाल कर पहचान छिपाकर आपस में तालमेल बना रहे थे और निगरानी से बच रहे थे.

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इल्तिजा मुफ्ती ने लगाया अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक का आरोप

सरकार जहां लोगों से सहयोग की अपील कर रही है और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने को कह रही है, वहीं इस फैसले की आलोचना भी हो रही है. कुछ राजनीतिक नेताओं और संगठनों का कहना है कि इससे आम नागरिकों की निजता और सूचना तक पहुंच प्रभावित होगी. पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने इस फैसले को अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक बताया और सरकार पर आरोप लगाया कि वह जमीनी समस्याओं से ध्यान हटा रही है. हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम किसी के अधिकार छीनने के लिए नहीं बल्कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है और हालात सामान्य होते ही इसकी समीक्षा की जाएगी.

First published on: Jan 08, 2026 09:44 PM

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