दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर पंजाब कांग्रेस को लेकर एक बहुत ही अहम बैठक हुई जो करीब तीन घंटे तक चली. इस बैठक में राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल जैसे बड़े नेताओं के सामने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को उनके बयानों के लिए कड़ी फटकार लगाई गई. आलाकमान ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. चन्नी को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे मीडिया या सोशल मीडिया पर पार्टी के खिलाफ कोई भी बात न कहें. अगर कोई नेता गुटबाजी के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.
चन्नी के किस बयान पर मचा बवाल?
दरअसल पिछले कुछ दिनों से चरणजीत सिंह चन्नी के एक बयान ने कांग्रेस नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. चन्नी ने आरोप लगाया था कि पंजाब कांग्रेस में दलितों को सही हक नहीं मिल रहा है और बड़े पदों पर सिर्फ जाट सिख नेताओं का ही कब्जा है. उनके इस बयान से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा और केंद्रीय नेताओं को काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. बैठक में चन्नी को याद दिलाया गया कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए ही उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था. नेताओं ने कहा कि जब राहुल गांधी खुद पिछड़ों और दलितों के हक की बात कर रहे हैं तो ऐसे में चन्नी का यह बयान पार्टी को कमजोर करने वाला है.
यह भी पढ़ें: First Phase of Census 2027: जनगणना 2027 की अधिसूचना जारी, आपसे पूछे जाएंगे कौन-कौन से सवाल? देखें पूरी लिस्ट
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को किया खारिज
कांग्रेस नेतृत्व ने बैठक में यह भी साफ कर दिया कि पंजाब में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है. संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष अपने पदों पर बने रहेंगे. पार्टी ने किसी भी तरह के नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज कर दिया है और सभी नेताओं को मिलकर काम करने की सलाह दी है. आलाकमान का मानना है कि पंजाब में जीत तभी हासिल होगी जब पूरी पार्टी एकजुट होकर सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी. अब किसी भी नेता को अपनी व्यक्तिगत राय सार्वजनिक करने की इजाजत नहीं होगी.
गुटबाजी पर लगाम लगाने की तैयारी
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पंजाब कांग्रेस के पुराने झगड़ों ने पार्टी को पहले ही बहुत नुकसान पहुंचाया है. सिद्धू और कैप्टन के बीच चली खींचतान के बाद अब पार्टी फिर से वैसा माहौल नहीं चाहती है. इसलिए वरिष्ठ नेताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपनी बातें केवल पार्टी फोरम के भीतर ही रखें. अनुशासन को लेकर दी गई इस नसीहत का मकसद कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देना है कि पार्टी में केवल योग्यता और एकजुटता को ही प्राथमिकता मिलेगी. कांग्रेस अब पंजाब में एक नई ऊर्जा के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है ताकि खोई हुई जमीन वापस पाई जा सके.
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के घर पर पंजाब कांग्रेस को लेकर एक बहुत ही अहम बैठक हुई जो करीब तीन घंटे तक चली. इस बैठक में राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल जैसे बड़े नेताओं के सामने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को उनके बयानों के लिए कड़ी फटकार लगाई गई. आलाकमान ने साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर किसी भी तरह की अनुशासनहीनता को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. चन्नी को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि वे मीडिया या सोशल मीडिया पर पार्टी के खिलाफ कोई भी बात न कहें. अगर कोई नेता गुटबाजी के जरिए दबाव बनाने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.
चन्नी के किस बयान पर मचा बवाल?
दरअसल पिछले कुछ दिनों से चरणजीत सिंह चन्नी के एक बयान ने कांग्रेस नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी थीं. चन्नी ने आरोप लगाया था कि पंजाब कांग्रेस में दलितों को सही हक नहीं मिल रहा है और बड़े पदों पर सिर्फ जाट सिख नेताओं का ही कब्जा है. उनके इस बयान से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा और केंद्रीय नेताओं को काफी शर्मिंदगी झेलनी पड़ी. बैठक में चन्नी को याद दिलाया गया कि पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए ही उन्हें मुख्यमंत्री बनाया था. नेताओं ने कहा कि जब राहुल गांधी खुद पिछड़ों और दलितों के हक की बात कर रहे हैं तो ऐसे में चन्नी का यह बयान पार्टी को कमजोर करने वाला है.
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नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को किया खारिज
कांग्रेस नेतृत्व ने बैठक में यह भी साफ कर दिया कि पंजाब में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं होने वाला है. संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष अपने पदों पर बने रहेंगे. पार्टी ने किसी भी तरह के नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज कर दिया है और सभी नेताओं को मिलकर काम करने की सलाह दी है. आलाकमान का मानना है कि पंजाब में जीत तभी हासिल होगी जब पूरी पार्टी एकजुट होकर सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी. अब किसी भी नेता को अपनी व्यक्तिगत राय सार्वजनिक करने की इजाजत नहीं होगी.
गुटबाजी पर लगाम लगाने की तैयारी
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि पंजाब कांग्रेस के पुराने झगड़ों ने पार्टी को पहले ही बहुत नुकसान पहुंचाया है. सिद्धू और कैप्टन के बीच चली खींचतान के बाद अब पार्टी फिर से वैसा माहौल नहीं चाहती है. इसलिए वरिष्ठ नेताओं को सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपनी बातें केवल पार्टी फोरम के भीतर ही रखें. अनुशासन को लेकर दी गई इस नसीहत का मकसद कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश देना है कि पार्टी में केवल योग्यता और एकजुटता को ही प्राथमिकता मिलेगी. कांग्रेस अब पंजाब में एक नई ऊर्जा के साथ जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है ताकि खोई हुई जमीन वापस पाई जा सके.