Sonam Wangchuk Hunger Strike Update: प्रसिद्ध पर्यावरणविद और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने 25 दिनों से जारी अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को समाप्त करने के संकेत दिए हैं. दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए और अस्पताल तक पहुंचे इस आंदोलन में वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि वे अपना अनशन खत्म करने को तैयार हैं, बशर्ते केंद्र सरकार विरोध प्रदर्शन में शामिल युवाओं और छात्रों पर कोई कानूनी या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न करने का स्पष्ट आश्वासन दे.
विशेष बात यह है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और छात्र संगठनों की शुरुआती सबसे प्रमुख मांग, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, अब वांगचुक की अनशन समाप्त करने की सीधी शर्तों की सूची में प्राथमिकता पर नहीं है. वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अपनी मुख्य मांग पर अड़ी हुई है.

केंद्र की खुली पेशकश: आपकी सहूलियत, जगह और समय आपका

दूसरी ओर, गतिरोध दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की बड़ी पहल की है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार की ओर से बातचीत के लिए अब तक चार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं. सरकार ने कहा है कि वह छात्रों की सुविधा के अनुसार किसी भी स्थान और किसी भी समय बातचीत करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

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बातचीत का नया प्रस्ताव खारिज

सरकारी सूत्रों और न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सरकार ने CJP को अगले दौर की बातचीत के लिए नया प्रस्ताव भेजा था, जिसे संगठन ने ठुकरा दिया है. इससे पहले 20 जुलाई को सीजेपी के प्रतिनिधियों ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की थी, लेकिन बात किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी. CJP का कहना है कि सरकार को अगर गंभीरता से बात करनी है तो ठोस कदम उठाए.

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'इस्तीफे' की जगह 'छात्र सुरक्षा' क्यों बनी मुख्य शर्त?

NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुआ यह प्रदर्शन 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के दौरान हिंसक मोड़ ले चुका था, जहां दिल्ली पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं. इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य तेजी से बदला. प्रदर्शन के दौरान पुलिस बल प्रयोग और FIR दर्ज होने के बाद वांगचुक का प्राथमिक ध्यान अब आंदोलनकारी छात्रों के करियर को पुलिस मुकदमों से बचाने पर केंद्रित हो गया है. उन्होंने मंत्रियों को लिखे पत्र में कहा कि इन युवाओं का एकमात्र 'अपराध' एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना था. मैं जीवित रहना चाहता हूं और अपने काम पर लौटना चाहता हूं, लेकिन उन युवाओं की कीमत पर नहीं जिनके लिए यह लड़ाई शुरू हुई थी.

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सरकार का आश्वासन और संसद में चर्चा का प्रस्ताव

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा अस्पताल में वांगचुक से मुलाकात के बाद सरकार ने आश्वासन दिया है कि संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक और शिक्षा तंत्र की जवाबदेही पर सार्थक चर्चा कराई जाएगी. परीक्षा में गड़बड़ी से मानसिक तनाव और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार होगा.

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CJP और वांगचुक की मांगों में विरोधाभास?

हालांकि सोनम वांगचुक ने स्वास्थ्य चिंताओं और लगभग 65 सांसदों के आग्रह के बाद अपनी शर्तों को व्यावहारिक रूप दिया है, लेकिन आंदोलन का समर्थन कर रहे राजनीतिक और छात्र संगठन CJP का कहना है कि उनकी मांगें यथावत हैं. CJP नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक NEET घोटाले में प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती और प्रभावित परिवारों को राहत नहीं मिलती, उनका वैचारिक संघर्ष जारी रहेगा.

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