खाई में मौत और प्रेमी की मौजूदगी…, राजा-सोनम रघुवंशी केस से कितनी मिलती है केतन-सिया की कहानी?

मेघालय की खाई से लेकर लोनावला के लोहगढ़ किले तक, एक साल के भीतर दो रसूखदार पिताओं के बेटों की बेरहमी से हत्या कर दी गई. दोनों ही मामलों में सगा हमसफर (पत्नी और मंगेतर) ही कातिल निकली. जानिए कैसे प्यार और धोखे की इस साजिश ने दो हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए बर्बाद कर दिया.

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वक्त का फासला करीब एक साल का और दूरी सैकड़ों किलोमीटर की, लेकिन जब पुलिस ने दो अलग-अलग कत्ल के पन्ने खोले तो उनके पीछे की खौफनाक समानता देखकर हर कोई दंग रह गया. दो अमीर परिवारों के नौजवान लड़के अपनी जिंदगी की नई शुरुआत करने जा रहे थे. दोनों को लगा कि वे अपनी जीवनसंगिनी के साथ सुनहरे भविष्य की नींव रख रहे हैं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिन्हें वे अपना हमसफर समझ रहे हैं, वही उनकी मौत की स्क्रिप्ट लिख रही थीं.

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मेघालय की खाई में मिला था राजा रघुवंशी का शव

पहला मामला 2 जून 2025 का है. इंदौर के प्रतिष्ठित ‘रघुवंशी ट्रांसपोर्ट’ परिवार के सबसे छोटे बेटे राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम से हुई थी. शादी के महज 9 दिन बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए. लेकिन वहां एक गहरी खाई में राजा रघुवंशी का लहूलुहान शव मिला. जांच में पता चला कि सोनम का अपनी पिता की फैक्ट्री के क्लर्क राज कुशवाहा से अफेयर था. सोनम ने अपने इसी प्रेमी के साथ मिलकर पति राजा की हत्या की साजिश रची थी. आज दोनों जेल में हैं.

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लोनावला में दोहराई गई वही खौफनाक कहानी

ठीक एक साल बाद, 18 जून 2026 को महाराष्ट्र के लोनावला में भी ऐसी ही वारदात हुई. पुणे के बड़े कंस्ट्रक्शन बिजनेसमैन विशाल अग्रवाल के बेटे केतन अग्रवाल अपनी मंगेतर सिया गोयल का जन्मदिन मनाने लोहगढ़ किले पर ट्रैकिंग के लिए गए थे. सिया ने पहले कहानी गढ़ी कि फोटो खिंचवाते वक्त केतन का पैर फिसल गया. लेकिन जब पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस के एसएसपी संदीप सिंह गिल ने मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स (CDR) खंगाले, तो सच सामने आ गया.

सिया इस शादी से खुश नहीं थी और अपने सहकर्मी चेतन चौधरी से प्यार करती थी. सिया और उसके प्रेमी चेतन ने मिलकर केतन को जानबूझकर गहरी खाई में धक्का दे दिया था. वारदात के वक्त चेतन भी वहीं मौजूद था.

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17 करोड़ का महल बुक था, गूंजने वाली थी शहनाई

केतन और सिया की शादी इसी साल नवंबर में उदयपुर के एक आलीशान महल में होने वाली थी, जिसके लिए 17 करोड़ रुपये दिए जा चुके थे. मेहमानों के लिए दो प्राइवेट जेट तक बुक थे. लेकिन शादी की शहनाई गूंजने से पहले ही अग्रवाल परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया. इन दोनों मामलों ने आज पूरे समाज और अरेंज मैरिज के फैसलों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.

समानता नंबर 1: शादी और सगाई के तुरंत बाद वारदात

दोनों ही मामलों में कत्ल का वक्त और तरीका लगभग एक जैसा था। पहला मामला मई 2025 का है, जहां इंदौर के प्रतिष्ठित ट्रांसपोर्ट परिवार के राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम से हुई थी। शादी के महज कुछ ही दिन बाद दोनों हनीमून के लिए मेघालय गए, जहां राजा की हत्या कर दी गई। ठीक एक साल बाद, जून 2026 में पुणे के बड़े कंस्ट्रक्शन बिजनेसमैन के बेटे केतन अग्रवाल के साथ भी ऐसा ही हुआ। नवंबर में होने वाली भव्य शादी से पहले वे अपनी मंगेतर सिया गोयल का जन्मदिन मनाने लोनावला गए थे, जहां उनकी जान ले ली गई।

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समानता नंबर 2: गहरी खाई और झूठी कहानी

दोनों मामलों में हत्या का जरिया प्रकृति की खूबसूरत वादियों को बनाया गया। मेघालय में राजा रघुवंशी का शव चेरापूंजी के पास एक गहरी खाई में मिला था। वहीं, लोनावला में केतन अग्रवाल को भी लोहगढ़ किले के पास 400 फीट गहरी खाई में धकेल दिया गया। दोनों ही घटनाओं में आरोपियों ने शुरुआत में इसे एक ‘हादसा’ बताने की कोशिश की। सिया ने तो बाकायदा कहानी गढ़ी थी कि फोटो खिंचवाते वक्त केतन का पैर फिसल गया था।

समानता नंबर 3: पुराना प्यार और खौफनाक साजिश

पुलिस जांच में जो सबसे बड़ा और चौंकाने वाला सच सामने आया, वो था पुराना अफेयर। राजा रघुवंशी की पत्नी सोनम अपनी पिता की फैक्ट्री के क्लर्क राज कुशवाहा से प्यार करती थी और उसी के साथ मिलकर उसने पति की हत्या की साजिश रची। दूसरी तरफ, केतन की मंगेतर सिया भी इस शादी से खुश नहीं थी। वह अपने सहकर्मी चेतन चौधरी से प्यार करती थी। सिया और उसके प्रेमी चेतन ने मिलकर ही केतन को खाई में धक्का दिया था।

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Vijay Jain

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विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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