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बिना कानूनी डिग्री बन गए सुप्रीम कोर्ट के CJI, जानिए कौन थे कैलाशनाथ वांचू? अनोखी है कहानी
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक ऐसा पोस्ट शेयर किया जिसने इस कहानी को फिर से चर्चा में ला दिया. उन्होंने लिखा, 'क्या आपको पता है कि 1967-68 में भारत के मुख्य न्यायाधीश कैलाशनाथ वांचू ने कानून की कोई पढ़ाई नहीं की थी?'
Who Was Kailashnath Wanchoo: सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत सोमवार (24 नवंबर) को भारत के 53वें CJI (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) के रूप में शपथ लेने वाले हैं. देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए न्यायाधीश सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट का अगला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई ) नियुक्त किया है. जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने की चर्चा तो इन दिनों सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक है, लेकिन क्या आप जानते हैं? देश में एक ऐसे भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) हुए हैं, जिन्हें लेकर ऐसा दावा किया जाता था कि उनके पास वकालत की डिग्री नहीं थी.
निशिकांत दुबे ने दिलाई पूर्व CJI की याद
बीते सोमवार बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक ऐसा पोस्ट शेयर किया जिसने इस कहानी को फिर से चर्चा में ला दिया. उन्होंने लिखा, 'क्या आपको पता है कि 1967-68 में भारत के मुख्य न्यायाधीश कैलाशनाथ वांचू ने कानून की कोई पढ़ाई नहीं की थी?' आइए जानते हैं कौन थे भारत के 10वें CJI कैलाशनाथ वांचू?
कैलाशनाथ वांचू का जन्म इलाहाबाद के एक कश्मीरी पंडित परिवार में 25 फरवरी 1903 को हुआ था. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए किया और 1924 में इंडियन सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर लंदन जाकर ट्रेनिंग ली. हालांकि उन्होंने विधि की औपचारिक डिग्री (LLB) कभी नहीं हासिल की, पर ऑक्सफर्ड में अपनी ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने आपराधिक कानून का गहन अध्ययन किया और कानून की व्यवहारिक समझ बनाई.
कैसे बने मुख्य न्यायाधीश?
देश की आजादी से पहले वे संयुक्त प्रांत में जॉइंट मजिस्ट्रेट, कलेक्टर और बाद में सेशंस जज बने. 1947 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक्टिंग जज नियुक्त हुए और फिर राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचे. 11 अगस्त 1958 को सुप्रीम कोर्ट के जज बनाए गए. उनका CJI बनना खुद एक अनोखी घटना थी. पहले CJI के. सुब्बाराव ने 1967 में अचानक इस्तीफा दिया, तब अनुभव में वरिष्ठ वांचू को 24 अप्रैल 1967 को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया. करीब 11 महीने तक उन्होंने इस पद पर कार्य किया और इस दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए.
Who Was Kailashnath Wanchoo: सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत सोमवार (24 नवंबर) को भारत के 53वें CJI (चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया) के रूप में शपथ लेने वाले हैं. देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपनी संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए न्यायाधीश सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट का अगला मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई ) नियुक्त किया है. जस्टिस सूर्यकांत के CJI बनने की चर्चा तो इन दिनों सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक है, लेकिन क्या आप जानते हैं? देश में एक ऐसे भी मुख्य न्यायाधीश (CJI) हुए हैं, जिन्हें लेकर ऐसा दावा किया जाता था कि उनके पास वकालत की डिग्री नहीं थी.
निशिकांत दुबे ने दिलाई पूर्व CJI की याद
बीते सोमवार बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक ऐसा पोस्ट शेयर किया जिसने इस कहानी को फिर से चर्चा में ला दिया. उन्होंने लिखा, ‘क्या आपको पता है कि 1967-68 में भारत के मुख्य न्यायाधीश कैलाशनाथ वांचू ने कानून की कोई पढ़ाई नहीं की थी?’ आइए जानते हैं कौन थे भारत के 10वें CJI कैलाशनाथ वांचू?
कैलाशनाथ वांचू का जन्म इलाहाबाद के एक कश्मीरी पंडित परिवार में 25 फरवरी 1903 को हुआ था. उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए किया और 1924 में इंडियन सिविल सर्विसेज की परीक्षा पास कर लंदन जाकर ट्रेनिंग ली. हालांकि उन्होंने विधि की औपचारिक डिग्री (LLB) कभी नहीं हासिल की, पर ऑक्सफर्ड में अपनी ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने आपराधिक कानून का गहन अध्ययन किया और कानून की व्यवहारिक समझ बनाई.
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कैसे बने मुख्य न्यायाधीश?
देश की आजादी से पहले वे संयुक्त प्रांत में जॉइंट मजिस्ट्रेट, कलेक्टर और बाद में सेशंस जज बने. 1947 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक्टिंग जज नियुक्त हुए और फिर राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक पहुंचे. 11 अगस्त 1958 को सुप्रीम कोर्ट के जज बनाए गए. उनका CJI बनना खुद एक अनोखी घटना थी. पहले CJI के. सुब्बाराव ने 1967 में अचानक इस्तीफा दिया, तब अनुभव में वरिष्ठ वांचू को 24 अप्रैल 1967 को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया. करीब 11 महीने तक उन्होंने इस पद पर कार्य किया और इस दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए.