400 साल पुराना मंदिर, 100 दरवाजे थे...जानें उस शक्तिपीठ का इतिहास जहां से PM मोदी का दिया मुकुट हुआ चोरी

Jeshoreshwari Temple Shaktipeeth: मां दुर्गा का एक शक्तिपीठ बांग्लादेश में भी है, जिसे जशोरेश्वरी काली मंदिर के नाम से जाना जाता है। साल 2021 में प्रधानमंत्री मोदी इस मंदिर का यात्रा कर चुके हैं। उस दौरान प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भेंट किया गया मां काली का मुकुट चोरी होने के कारण यह सुर्खियों में है। आइए इस शक्तिपीठ के बारे में जानते हैं…

Jeshoreshwari Temple Shaktipeeth in Bangladesh

प्रधानमंत्री मोदी ने यहां पूरे विधि विधान से पूर्जा अर्चना करके आशीर्वाद लिया था।

Jeshoreshwari Temple Shaktipeeth History: हिंदू मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ हैं। ज्यादातर शक्तिपीठ भारत में मौजूद हैं, लेकिन एक शक्तिपीठ पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी है, जिसे दुनिया जशोरेश्वरी काली मंदिर (Jeshoreshwari Kali ShaktiPeeth) के नाम से जानती है। इस शक्तिपीठ में मां काली के दर्शन साल 2021 में प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल यात्रा के दौरान किए थे।

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उन्होंने मंदिर में विराजमान मां काली को चांदी और सोने की परत चढ़ा मुकुट भेंट किया था, जो चोरी हो गया है। बांग्लादेश के सतखीरा शहर के श्यामनगर उपजिला के गांव ईश्वरीपुर में बने मां काली के इस जेशोरेश्वरी मंदिर में चोरी होने का मामला दोनों देशों में सुर्खियों में है। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार से पुष्टि हुई। पीढ़ियों से इस मंदिर की देखभाल एक परिवार कर रहा है। आजकल इस मंदिर के संरक्षक इसी परिवार के ज्योति चट्टोपाध्याय हैं।

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क्या है मंदिर का इतिहास?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह मंदिर करीब 400 साल पुराना है। इस मंदिर को 12वीं शताब्दी में अनारी नामक ब्राह्मण ने बनवाया था। उस समय बनवाया गया मंदिर इतना विशाल था कि इसमें 100 दरवाजे थे। 13वीं शताब्दी में लक्ष्मण सेन नामक शख्स ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। दंतकथा है कि 16वीं शताब्दी में राजा प्रताप आदित्य ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। उन्होंने झाड़ियों में मानव हथेली के आकार की एक चमचमाती चीज देखी।

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देवी का रूप मानकर उन्होंने उस जगह पर मंदिर बनाने का ऐलान कर दिया। क्योंकि महाराज मां काली के भक्त थे तो उन्होंने यहां मां काली का मंदिर बनवाया। वैसे इतिहास में इस मंदिर के निर्माता को लेकर कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। वहीं कहा जाता है कि 1971 के युद्ध में इस मंदिर को काफी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद मुख्य मंदिर के पास एक मंच बनाया गया, जिसे नटमंडिर नाम दिया गया। इस मंच से आज मां काली के दर्शन किए जाते हैं। पुराने मंदिर में आज सिर्फ खंभे देखे जा सकते हैं।

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कष्ट और डर दूर करने को दर्शन करने आते लोग

मान्यता है कि इस मंदिर में आकर मां काली के दर्शन करने से सभी प्रकार के कष्ट, दुख और डर से छुटकारा मिल जाता है। इस मंदिर में किसी भी धर्म-संप्रदाय के लोग आ सकते हैं। अब यहां हर शनिवार और मंगलवार को दोपहर के समय इस मंदिर में खास पूजा होती है। हर साल नवरात्रि के दिनों में मां काली की पूजा के दिन मंदिर में विशेष समारोह होता होता और मेला भी लगाया जाता है।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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