Gaurav Pandey
लिखने-पढ़ने का शौक है। राजनीति में दूर-दूर से रुचि है। अखबार की दुनिया के बाद अब डिजिटल के मैदान में हूं। आठ साल से ज्यादा समय से देश-विदेश की खबरें लिख रहा हूं। दैनिक जागरण और अमर उजाला जैसे संस्थानों में सेवाएं दी हैं।
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पवन मिश्रा, नई दिल्ली
India China : दूसरी बार रक्षा मंत्री बनने के बाद भी राजनाथ सिंह अपने पुराने अंदाज में ही दिख रहे हैं। उन्होंने एक के बाद एक कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। इस बार फैसला धोखेबाज चीन को उसकी ही भाषा में जवाब देने के लिए नार्थ ईस्ट के राज्यों से शुरू किया जा रहा है, यानी शुरुआत तिब्बत से होगी। सेना से मिली जानकारी के मुताबिक तिब्बत के 30 इलाकों के नाम बदल दिए जाएंगे। इसके लिए सेना ने मंथन करना शुरू कर दिया है। बहुत जल्द नक्शा भी जारी कर दिया जाएगा।
बता दें कि गलवां झड़प के बाद भारत और तिब्बत के बीच 20 से अधिक बार कमांडर लेवल की बातचीत हो चुकी है। ये वार्ताएं कई घंटों तक चली हैं, लेकिन नतीजा कुछ भी नहीं निकला है। यानी विवाद अब भी जारी है। रक्षा मामलों के जानकारों की अगर मानें तो अगर इंडियन आर्मी तिब्बत के इलाकों का नाम बदलती है, तो फिर से ड्रैगन के साथ तनाव बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि ड्रैगन खुद को सुपर पावर समझता है। वह भारत के इस तरह के कदम को युद्ध जैसा जवाब ही समझ बैठेगा।
हालांकि, ऐसा नही है कि भारतीय सेना अचानक ही इस फैसले पर आई है। सेना की रिपोर्ट के मुताबिक चीन वर्षों से अरुणाचल को अपना हिस्सा बताता आ रहा है। भारत को उकसाने के लिए उसने अपने नक्शे में अरुणाचल के कई हिस्सों के नाम बदल दिए हैं। लेकिन धोखेबाज चीन इंडियन आर्मी को अभी भी 1962 वाली आर्मी समझने की भूल कर रहा है। ड्रैगन को उसी की भाषा में समझाने के लिए, भारतीय सेना ने चीन की दुखती नस पर हाथ रख दिया है। देखना यह है कि चीन इसे कैसे लेता है।
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