साल 2026 अपने साथ भारत के लिए ढेर सारी खुशियां लाया है. भारत को 7 मेगा प्रोजेक्ट्स मिलने वाले हैं. जो देश की जनता के लिए बेहद खास होंगे. करीब 4 लाख करोड़ की लागत वाले ये प्रोजेक्ट्स देश के विकास में एक नया कीर्तिमान बनाएंगे. चलिए हम आपको इनके बारे में विस्तार से बताते हैं
दिल्ली में बनेगा नेशनल म्यूजियम
साल 2026 में राजधानी दिल्ली में दुनिया का सबसे बड़ा नेशनल म्यूजियम बनकर तैयार होगा, जो भारत के 5 हजार साल के इतिहास के बारे में लोगों को बताएगा. केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय में मौजूद केंद्रीय सचिवालय की जगह इसे बना जाएगा. 1.55 लाख मीटर वर्ग में फैले इस संग्रहालय में 950 कमरे होंगे. इसमें 25 हजार से ज्यादा कलाकृतियां होंगी. म्यूजियम के फेज-1 की शुरुआत जून 2026 में होगी और फेज-2 की शुरुआत मंत्रालयों की शिफ्टिंग के बाद होगी. इसके बनने से टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
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बिहार में विराट रामायण मंदिर
2026 में भारत को सबसे बड़ा रामायण मंदिर मिलने वाला है. जिसकी शुरुआत जून 2023 में हुई थी. ये मंदिर बिहार के चंपारण में बनाया जा रहा है. इसमें कंबोडिया के अंकोरवाट, भारत के रामेश्वरम् और मीनाक्षी मंदिर जैसी झलक दिखेंगी. विराट रामायण मंदिर 3.76 लाख वर्ग मीटर में फैल हुआ है. इसमें 22 मंदिर बनाए गए हैं. दावा है कि इसमें एक साथ 20 हजार लोग बैठकर पूजा कर सकेंगे. विराट रामायण मंदिर को बनाने की जिम्मेदारी पटना के महावीर मंदिर ट्रस्ट ने ली है. उम्मीद है कि 2026 के आखिरी महीनों में इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा. मंदिर के बनने से बिहार में पर्यटन बढ़ेगा, जिससे होटल, दुकान, टैक्सी जैसे स्थानीय रोजगार पैदा होंगे. रामायण की विरासत को बढ़ावा मिलेगा. इस मंदिर में तमिलनाडु से लाया गया दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग स्थापित होगा जिससे उत्तर और दक्षिण भारत करीब आएंगे.
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
यूपी के जेवर में एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट तैयार किया जा रहा है. 1,334 हैक्टेयर में फैले नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में सालाना 5 लाख एयर ट्रैफिक मूवमेंट की जा सकेगी और 22 करोड़ से ज्यादा यात्री ट्रैवल कर पाएंगे. 2026 की शुरुआत में फेज-1 होगा और बाकी के 3 फेज 2050 तक पूरे होंगे. 29 हजार 561 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस एयरपोर्ट से दिल्ली-NCR और यूपी में बेहतर एयर कनेक्टिविटी और सस्ती फ्लाइट मिलेगी. इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलेगा. लॉजिस्टिक, कॉमर्स और इंडस्ट्री बूस्ट होगी.
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कच्छ में खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क
गुजरात के कच्छ में दुनिया का सबसे बड़ा पावर प्लांट बनने जा रहा है. खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क को बनाने का जिम्मा अडाणी ग्रुप ने लिया है. दावा है कि ये इतना बड़ा होगा कि इसे स्पेस से भी देखा सकेगा.538 किमी वर्ग में फैले इस एनर्जी पार्क में 30 गीगावॉट बिजली का उत्पादन होगा. इसमें ऑटोमेटेड रोबोटिक क्लीनिंग सिस्टम और AI-बेस्ड मॉनिटरिंग होगी. 2026 में पहले फेज शुरू होगा और 2030 तक पूरा प्लांट चालू हो जाएगा. इसमें सोलर एनर्जी से बिजली पैदा होगी, जिससे कार्बन एमिशन कम होगा और प्रदूषण घटेगा. 1.8 करोड़ घरों को सस्ती बिजली मिलेगी.
धोलेरा फैब और सानंद OSAT प्लांट्स
गुजरात में देश का पहला चिप मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट तैयार होगा, जिसका नाम है धोलेरा फैब और सानंद OSAT प्लांट्स. अब तक भारत में चिप डिजाइन या असेंबल होते थे, लेकिन अब इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत गुजरात में विदेशी कंपनियों के साथ चिप मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं. 320 एकड़ से ज्यादा एरिया में बनने वाले इस प्लांट में 50 हजार वेफर्स हर महीने बनेंगे और एक वेफर से हजारों चिप बनेंगे. ये AI बेस्ड ऑटोमेटिक प्लांट होगा. इसका उद्घाटन दिसंबर 2026 में किया जाएगा. प्लांट के तैयार किए जाने से चीन, ताइवान से इंपोर्ट निर्भरता कम होगी. डिफेंस में इस्तेमाल होने वाली चिप्स भारत में बनेगी. एपल, टेस्ला जैसी बड़ी कंपनियां भारत में अपना उत्पादन बढ़ाएंगी.
वेस्टर्न-ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
देश का सबसे बड़ा मालवाहक गलियारा वेस्टर्न-ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है. 9 राज्यों से गुजरने वाले ईस्टर्न और वेस्टर्न कॉरिडोर भारतीय रेल नेटवर्क में माल ढुलाई को अलग करने के लिए बनाए गए हैं, ताकि सवारी और माल गाड़ियां तेज और कम लागत में चल सकें. इस कॉरिडोर पर 150 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से मालगाड़ी दौड़ेंगी. ये दोनों कॉरिडोर मार्च 2026 तक चालू हो जाएंगे. मालगाड़ियों के अलग ट्रैक होने से पैसेंजर ट्रेन को इंतजार नहीं करना होगा. किराया और सफर का वक्त कम होगा. प्रदूषण और कार्बन एमिशन कम होगा, जिससे 17 हजार करोड़ रुपये का खर्चा बचेगा
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चार धाम हाई-वे प्रोजेक्ट
साल 2026 के आखिर तक देश के सबसे बड़ा तीर्थयात्रा प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा. चार धाम हाई-वे प्रोजेक्ट में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ को जोड़ने के लिए सड़क बनाई जा रही है. 900 किमी लंबी डबल लेन लंबी सड़क को बनाने में 12 हजार करोड़ रुपये की लागत लगेगी. इसके शुरू होने से यात्री हर मौसम में चार धामों की यात्रा कर सकेंगे, सफर में कम समय लगेगा और कनेक्टिविटी बेहतर होगी. ये रोड भारत-चीन सीमा को देहरादून और मेरठ आर्मी कैंप से जोड़ती है. इससे सैन्य टुकड़ियां, हथियार, खाने-पीने का सामान सीमा पर तेजी से भेजे जा सकेंगे.










