भारत और फ्रांस ने अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को नई दिशा देने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने रक्षा, उन्नत तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई.
ज्वॉइंट स्टेटमेंट में क्या कहा गया?
ज्वॉइंट स्टेटमेंट के मुताबिक, साल 2024 में तय डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप के तहत भारत और फ्रांस उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म के संयुक्त अनुसंधान, सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन को तेज करेंगे. इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और आधुनिक सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना है. रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की Defence Research and Development Organisation और फ्रांस की Direction générale de l’armement के बीच नवंबर 2025 में हुए तकनीकी समझौते को अहम बताया गया. इससे दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक सहयोग को संस्थागत आधार मिलेगा.
ये भी पढ़ें: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार से उतरते ही PM मोदी ने लगाया गले, VIDEO में देखें कैसे गर्मजोशी से किया स्वागत
राफेल खरीद एक बड़ी उपलब्धि
एयरोस्पेस और रक्षा सौदों की बात करें तो 26 Rafale-M लड़ाकू विमानों की खरीद को बड़ी उपलब्धि माना गया. इसके साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हेलीकॉप्टर और जेट इंजन तकनीक में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया. फ्रांसीसी कंपनी Safran और भारत की Hindustan Aeronautics Limited के बीच इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर परियोजना में जारी सहयोग की भी सराहना की गई. भारत में LEAP और M-88 इंजनों के लिए MRO सुविधाओं की स्थापना, Bharat Electronics Limited के साथ HAMMER मिसाइल प्रोडक्शन और TATA Advanced Systems, Airbus द्वारा H125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन को ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता बताया गया.
रक्षा अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने का फैसला
नौसैनिक सहयोग में ‘मेड इन इंडिया’ स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बी परियोजना की सफलता को हाईलाइट किया गया. इसके अलावा 2025 में हुए वरुण, शक्ति और गरुड़ सैन्य अभ्यासों को सफल बताते हुए 2026 में सहयोग और बढ़ाने पर सहमति बनी. अंतरिक्ष क्षेत्र में Indian Space Research Organisation (ISRO) और National Centre for Space Studies (NASA) के बीच रक्षा अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने का फैसला लिया गया. आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर भी दोनों देशों ने Financial Action Task Force के मानकों के अनुसार सख्त रुख अपनाने की बात दोहराई.
ये भी पढ़ें: क्या है मोदी-मैक्रों के बीच होने वाली 3.25 लाख करोड़ की महाडील? जो चीन-पाकिस्तान की उड़ा देगी नींद
भारत और फ्रांस ने अपने रणनीतिक और रक्षा संबंधों को नई दिशा देने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने रक्षा, उन्नत तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई.
ज्वॉइंट स्टेटमेंट में क्या कहा गया?
ज्वॉइंट स्टेटमेंट के मुताबिक, साल 2024 में तय डिफेंस इंडस्ट्रियल रोडमैप के तहत भारत और फ्रांस उन्नत रक्षा प्लेटफॉर्म के संयुक्त अनुसंधान, सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन को तेज करेंगे. इसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना और आधुनिक सैन्य क्षमताओं को मजबूत करना है. रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में भारत की Defence Research and Development Organisation और फ्रांस की Direction générale de l’armement के बीच नवंबर 2025 में हुए तकनीकी समझौते को अहम बताया गया. इससे दोनों देशों के बीच रक्षा तकनीक सहयोग को संस्थागत आधार मिलेगा.
ये भी पढ़ें: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार से उतरते ही PM मोदी ने लगाया गले, VIDEO में देखें कैसे गर्मजोशी से किया स्वागत
राफेल खरीद एक बड़ी उपलब्धि
एयरोस्पेस और रक्षा सौदों की बात करें तो 26 Rafale-M लड़ाकू विमानों की खरीद को बड़ी उपलब्धि माना गया. इसके साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत हेलीकॉप्टर और जेट इंजन तकनीक में साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया. फ्रांसीसी कंपनी Safran और भारत की Hindustan Aeronautics Limited के बीच इंडियन मल्टी रोल हेलीकॉप्टर परियोजना में जारी सहयोग की भी सराहना की गई. भारत में LEAP और M-88 इंजनों के लिए MRO सुविधाओं की स्थापना, Bharat Electronics Limited के साथ HAMMER मिसाइल प्रोडक्शन और TATA Advanced Systems, Airbus द्वारा H125 हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन को ‘मेक इन इंडिया’ की बड़ी सफलता बताया गया.
रक्षा अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने का फैसला
नौसैनिक सहयोग में ‘मेड इन इंडिया’ स्कॉर्पीन-क्लास पनडुब्बी परियोजना की सफलता को हाईलाइट किया गया. इसके अलावा 2025 में हुए वरुण, शक्ति और गरुड़ सैन्य अभ्यासों को सफल बताते हुए 2026 में सहयोग और बढ़ाने पर सहमति बनी. अंतरिक्ष क्षेत्र में Indian Space Research Organisation (ISRO) और National Centre for Space Studies (NASA) के बीच रक्षा अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने का फैसला लिया गया. आतंकवाद और साइबर सुरक्षा पर भी दोनों देशों ने Financial Action Task Force के मानकों के अनुसार सख्त रुख अपनाने की बात दोहराई.
ये भी पढ़ें: क्या है मोदी-मैक्रों के बीच होने वाली 3.25 लाख करोड़ की महाडील? जो चीन-पाकिस्तान की उड़ा देगी नींद