अमेरिका ही नहीं… भारत भी इन देशों को देता है कर्ज, जानिए सबसे ज्यादा कर्जदार कौन?

भारत अब सिर्फ कर्ज लेने वाला देश नहीं, बल्कि कई देशों को आर्थिक मदद और रियायती कर्ज देने वाला बड़ा साझेदार बन चुका है. भारत ने अब तक कई देशों को 32 अरब डॉलर से ज्यादा की लाइन ऑफ क्रेडिट दी है. इनमें सबसे ज्यादा कर्ज भूटान को मिला है.

India Extends Loans to many Countries

Credit: AI

जब भी कर्ज की बात होती है तो लोगों के मन में अक्सर यही सवाल आता है कि क्या भारत भी दूसरे देशों को पैसा उधार देता है. इसका जवाब है- हां. पिछले कुछ सालों में भारत ने कई देशों को आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे और जरूरी परियोजनाओं के लिए अरबों डॉलर का रियायती कर्ज दिया है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत अब तक कई देशों को 32 अरब डॉलर से ज्यादा की लाइन ऑफ क्रेडिट मुहैया करा चुका है. भारत ये मदद खासतौर से EXIM बैंक के जरिए देता है. इस योजना का मकसद मित्र देशों में सड़क, रेलवे, बिजली, अस्पताल, खेती, बंदरगाह, आईटी और अन्य विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना है. इन कर्जों पर सामान्य बाजार की तुलना में कम ब्याज लिया जाता है और चुकाने के लिए लंबा समय दिया जाता है.

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सबसे ज्यादा कर्ज किस देश को मिला?

भारत से सबसे ज्यादा रियायती कर्ज भूटान को मिला है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भूटान को लगभग 2,068.56 करोड़ रुपये की लाइन ऑफ क्रेडिट दी गई है. इसके बाद श्रीलंका, नेपाल, मालदीव और म्यांमार का नंबर आता है. इन देशों में ट्रांसपोर्ट, एनर्जी, रेल, सड़क और बाकी पबल्कि प्रोजेक्ट्स के लिए भारत मदद मुहैया करवा रहा है. भारत सिर्फ अपने पड़ोसी देशों तक ही सीमित नहीं है. अफ्रीका के 42 देशों को भी करीब 12 अरब डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट दी जा चुकी है. इसके अलावा लैटिन अमेरिका, ओशिनिया और मध्य एशिया के कई देशों को भी भारत आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रहा है.

क्यों देता है भारत दूसरे देशों को कर्ज?

भारत ने नेपाल को 700 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है. वहीं, मालदीव को 400 करोड़, मॉरीशस को 370 करोड़, म्यांमार को 250 करोड़, श्रीलंका को 245 करोड़, अफगानिस्तान को 200 करोड़, अफ्रीकी देश को 200 करोड़, बांग्लादेश को 120 करोड़, सेशेल्स को 40 करोड़ और लैटिन अमेरिकी देश को 30 करोड़ रुपये दिए हैं. भारत का मकसद सिर्फ आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि मित्र देशों के साथ रणनीतिक और व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना भी है. विकास प्रोजेक्ट्स में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ती है, जिससे दोनों देशों को फायदा होता है. इससे क्षेत्रीय सहयोग, व्यापार और कनेक्टिविटी को भी मजबूती मिलती है.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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