गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मुश्किलें नहीं हो रही खत्म! AI समिट में रोबोट के बाद अब ड्रोन को लेकर हुआ विवाद

गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही है और अब ऐसा लगने लगा है कि ये कहानी जल्दी खत्म नहीं होने वाली है. चीनी रोबोडॉग विवाद की वजह से इंडिया AI इम्पैक्ट समिट से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को बाहर कर दिया गया है. इसके बाद नोएडा की इस यूनिवर्सिटी ने अब एक और प्रोडक्ट – एक सॉकर ड्रोन, जो कथित तौर पर साउथ कोरिया में बना है, को लेकर भी जांच का सामना किया है. इसे लेकर भी गलगोटिया के एक प्रोफेसर ने दावा किया कि इसे यूनिवर्सिटी ने बनाया है.

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Galgotias University Controversy: गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही है और अब ऐसा लगने लगा है कि ये कहानी जल्दी खत्म नहीं होने वाली है. चीनी रोबोडॉग विवाद की वजह से इंडिया AI इम्पैक्ट समिट से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को बाहर कर दिया गया है. इसके बाद नोएडा की इस यूनिवर्सिटी ने अब एक और प्रोडक्ट – एक सॉकर ड्रोन, जो कथित तौर पर साउथ कोरिया में बना है, को लेकर भी जांच का सामना किया है. इसे लेकर भी गलगोटिया के एक प्रोफेसर ने दावा किया कि इसे यूनिवर्सिटी ने बनाया है.

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कम्युनिकेशन प्रोफेसर नेहा सिंह, जो रोबोडॉग्स विवाद में भी शामिल थीं, का एक और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह एक रिपोर्टर को इन-हाउस “सॉकर ड्रोन” के बारे में समझा रही हैं. नेहा सिंह ने कहा कि ड्रोन की “एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग” कैंपस में ही की गई थी.

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सिंह ने कहा, ‘यह एक दिलचस्प डिवाइस है. इसकी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर इसके एप्लिकेशन तक, सब कुछ यूनिवर्सिटी में ही डेवलप किया गया है.’ उन्होंने यह भी दावा किया कि गलगोटियाज ने अपने कैंपस में भारत का पहला ‘ड्रोन सॉकर एरिना’ डेवलप किया है.

उन्होंने आगे कहा, ‘इसमें एक सिमुलेशन लैब और एक एप्लीकेशन एरिना है… यह कैंपस में भारत का पहला सॉकर एरिना है. यहां, प्रोडक्ट को और बेहतर फीचर्स के साथ डेवलप किया जा रहा है.’

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ड्रोन सॉकर क्या है?

सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि गलगोटियास का प्रोडक्ट साउथ कोरिया के हेलसेल ग्रुप के बनाए सॉकर ड्रोन जैसा ही है. यह प्रोडक्ट कमर्शियली उपलब्ध है.

इंडिया टुडे ने पाया कि यह प्रोडक्ट skyballdrone.com पर मिलने वाले स्ट्राइकर V3 ARF प्रोफेशनल ड्रोन सॉकर सेट जैसा ही था. इसकी कीमत लगभग $453 (Rs 40,800) है.

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रिमोट से कंट्रोल होने वाले, क्वाडकॉप्टर ड्रोन सुरक्षा वाले गोल पिंजरों में बंद होते हैं. गलगोटियास का दिखाया गया पिंजरा हेलसेल वेबसाइट पर दिखाए गए मॉडल से मिलता-जुलता लगता है.

इसका इस्तेमाल ड्रोन सॉकर नाम के एक खेल में होता है, जो एक इनडोर टीम गेम है. इस खेल में 3-5 खिलाड़ियों की टीम को अपने विरोधियों को मात देनी होती है और पॉइंट स्कोर करने के लिए ड्रोन को एक लटके हुए हूप (बास्केटबॉल की तरह) से गुजारना होता है.

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वेबसाइट पर, हेलसेल का दावा है कि ड्रोन सॉकर का आइडिया सबसे पहले उसी ने दिया था और 2015 में यह प्रोडक्ट बनाया था. यह नया स्पोर्ट 2017 में साउथ कोरिया में लॉन्च किया गया था और इसे वर्ल्ड एयर स्पोर्ट्स फेडरेशन से मान्यता मिली हुई है.

कांग्रेस ने भी उठाया मुद्दा

कांग्रेस ने X पर इस मुद्दे को हाईलाइट किया. वही, पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा था.

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यूथ कांग्रेस ने ट्वीट किया, ‘पहले चीन, अब कोरिया. गलगोटिया ‘उधार’ लिए गए इनोवेशन के वर्ल्ड टूर पर हैं. उन्होंने कैंपस में स्क्रैच से भारत का पहला ड्रोन सॉकर बनाने का दावा किया, लेकिन असल में यह कोरिया का स्ट्राइकर V3 ARF है. आत्मनिर्भर या सिर्फ ‘आत्मनिर्भर-खरीदे’ मोदी जी?’

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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