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Shashi Tharoor shares cryptic post: कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर ने पार्टी के साथ मतभेद की अफवाहों के बीच एक रहस्यमयी पोस्ट शेयर की है। तिरुवनंतपुरम के सांसद ने अंग्रेजी कवि थॉमस ग्रे की कविता ‘ओड ऑन ए डिस्टेंट प्रॉस्पेक्ट ऑफ ईटन कॉलेज’ की एक लाइन साझा की। एक्स पर उन्होंने लिखा, ‘थॉट ऑफ दे डे- जहां अज्ञानता ही सुख है, वहां बुद्धिमान होना मूर्खता है।’ थरूर की यह प्रतिक्रिया लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद आई है। इसके बाद से ही राजनीतिक गलियारों में अटकलें शुरू हो गई हैं। ऐसा लग रहा है कि शशि थरूर के मन में कोई सियासी खिचड़ी पक रही है।
हालांकि, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने रविवार को पार्टी के भीतर हुई आलोचना पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। हाल ही में उन्होंने केरल की एलडीएफ सरकार की इंडस्ट्रियल पॉलिसी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सकारात्मक रूप से चर्चा की थी, जिससे पार्टी के कुछ नेताओं ने नाराजगी जताई थी। नई दिल्ली हवाई अड्डे पर पत्रकारों ने जब इस बारे में कांग्रेस सांसद से सवाल किया तो उन्होंने कहा, ‘कोई टिप्पणी नहीं। आज भारत-पाकिस्तान के मैच का आनंद लीजिए।’ इससे पहले सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अंग्रेजी के मशहूर कवि थॉमस ग्रे का एक उद्धरण साझा किया था।
Thought for the day! pic.twitter.com/hXDxn9p0rv
— Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) February 22, 2025
शशि थरूर ने रविवार को कहा कि केरल में पार्टी संगठन ‘नेतृत्व की कमी’ से जूझ रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर कांग्रेस अपनी मूल वोटबैंक से आगे बढ़कर लोगों को नहीं जोड़ती, तो उसे यहां लगातार तीसरी बार विपक्ष में बैठना पड़ सकता है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि केरल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस में हूं, लेकिन अगर पार्टी को मेरी जरूरत नहीं है तो मेरे पास भी विकल्प मौजूद है। हालांकि, थरूर ने पार्टी बदलने की अफवाहों का खंडन करते हुए कहा कि भले ही विचारों में अंतर हो, लेकिन वह ऐसा नहीं मानते। केरल के तिरुवनंतपुरम से 4 बार के सांसद थरूर ने हाल ही में केरल की वामपंथी विजयन सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात की तारीफ की थी। उन्होंने केरल में पार्टी नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठाए थे। इसी वजह से कांग्रेस हाईकमान शशि थरूर से नाराज था। इतना ही नहीं, हाल ही में शशि थरूर ने एक लेख में एलडीएफ सरकार के तहत औद्योगिक विकास की सराहना की थी, जिससे केरल में पार्टी के भीतर हंगामा मच गया था।
थरूर ने इन विवादों पर ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मलयालम पॉडकास्ट में कहा था कि उन्होंने कभी भी खुद को एक राजनेता के रूप में नहीं सोचा और न ही अपने विचार संकीर्ण रखे। उन्होंने कहा था कि वह पार्टी के लिए मौजूद हैं, अगर पार्टी को उनकी जरूरत हो। लेकिन अगर कांग्रेस को उनकी सेवाओं की जरूरत नहीं है तो उनके पास किताबें लिखने, भाषण देने और दुनियाभर में प्रोग्राम्स में शामिल होने जैसे अन्य विकल्प मौजूद हैं।
इससे पहले 18 फरवरी को शशि थरूर ने राहुल गांधी से मुलाकात की थी। उन्होंने पार्टी में किनारे किए जाने पर राहुल से नाराजगी जताई थी। थरूर ने राहुल गांधी से कहा था कि पार्टी के भीतर मेरी क्या भूमिका है? सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने उनके सवाल पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इसके बाद थरूर ने खुद को दरकिनार किए जाने पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा, ‘मुझे संसद में महत्वपूर्ण चर्चाओं में बोलने का मौका नहीं मिलता। पार्टी में मुझे इग्नोर किया जा रहा है। मैं पार्टी में अपनी स्थिति को लेकर असमंजस में हैं। राहुल गांधी मेरी भूमिका स्पष्ट करें।’ हाल ही में थरूर की टिप्पणियों के बाद से कांग्रेस में अंदरूनी कलह की अटकलें बढ़ गई हैं।
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