AL Nino Prediction: सर्दी अलविदा कहने वाली है और गर्मी दस्तक देने वाली है। राजधानी दिल्ली का तापमान फरवरी के दूसरे हफ्ते में ही 26 डिग्री है तो महीने के आखिर तक यह 30 डिग्री तक पहुंच सकता है। अनुमान लगा लीजिए कि मार्च और अप्रैल के महीने में दिल्ली में तापमान का क्या हाल होगा और फिर जून-जुलाई में इस बार कितनी गर्मी पड़ सकती है?
जी हां, इस बार गर्मी के मौसम में 2024-2025 की रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बाद सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ सकती है औ साल 2028 तक यह दौर जारी रहेगा, यानी अगले 3 साल भारत समेत पूरी दुनिया को भीषण गर्मी झेलनी पड़ सकती है। इसकी वजह प्रशांत महासागर में अल नीनो का एक्टिव होना और जलवायु परिवर्तन के कारण घटती बारिश से मौसम चक्र का टूटना है।
The presumed upcoming El Nino will help cement and quantify global warming acceleration, showing that 2ºC global warming is likely to be reached in the 2030s, not at midcentury.
— James Edward Hansen (@DrJamesEHansen) February 6, 2026
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चौथा सबसे गर्म साल रह सकता है 2026
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) देशभर के कई राज्यों में अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी हो गई और न्यूनतम तापमान भी बढ़ने लगा है। ऐसे में मौसम वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि साल 2026 भी 23-24-25 की तरह सबसे गर्म साल साबित हो सकता है। इसकी वजह हाई लेवल की कार्बन-डाई-ऑक्साइड गैस का उत्सर्जन होना है और प्रशांत महासागर में अल नीनो एक्टिव होने की संभावना है। अल नीनो के कारण तापमान में बढ़ोतरी होगी और बारिश का पैटर्न भी बदेगा।
2027 में भी तापमान तोड़ सकता रिकॉर्ड
वहीं अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के मौसम विज्ञानियों का कहना है कि साल 2026 में एक्टिव होने का अल नीनो के साल 2027 तक मजबूत तरीके से विकसित होने का अनुमान है, जिसके चलते साल साल 2027 में वैश्विक तापमान रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचेगा और इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ेगा। अगर ऐसा हुआ तो साल 2027 पिछले 3 साल के मुकाबले बहुत ज्यादा गर्म होगा। भारत में जहां तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा, वहीं जंगलों में अग्निकांड होने के आसार रहेंगे।
El Niño will develop within a few months according to new ECMWF guidance.
— Ben Noll (@BenNollWeather) February 6, 2026
There's a high chance (75% of ensemble members) it will reach moderate strength this summer — which should suppress hurricane activity.
Places that typically see big impacts from El Niño should prepare! pic.twitter.com/Oc3XaLylbl
भारत के मौसम पर कैसा रहेगा असर?
बता दें कि अल नीनो के असर से मार्च से अप्रैल 2026 तक दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत में तापमान सामान्य रह सकता है। वहीं गरज-चमक के साथ होने वाली बारिश भीषण गर्मी से राहत दिलाएगी, जिस वजह से गर्मी थोड़े समय के लिए ही रहेगी। मई से जून के मध्य तक उत्तर और पश्चिम भारत में लू चलने से भयंकर कर्मी पड़ेगी, लेकिन बारिश होने की संभावना नहीं है। क्योंकि अल नीनो के असर से तापमान बढ़ेगा और बारिश का पैटर्न बदलेगा, जिस वजह से ज्यादा गर्मी पड़ेगी।
कमजोर ला नीना खत्म होने की ओर बढ़ा
मौसम वैज्ञानिकों ने कहा है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ENSO) के तहत अल नीनो, ला नीना और तटस्थ मौसम की परिस्थिति रहती है, जिससे गर्म, ठंडा और बारिश के मौसम का पैटर्न प्रभावित होता है। वर्तमान में ला नीना एक्टिव है, जो अब कमजोर पड़ने लगा है और जल्दी खत्म हो जाएगा। गर्मियों की शुरुआत होते ही अल नीनो विकसित होने लगेगा और भारतीय उपमहाद्वीप में तापमान बढ़ने लगेगा। साथ ही मानसून की बारिश पर इसका असर पड़ सकता है।
El Niño is coming. Over the past few months, substantial warmth has built up in the West Pacific as the La Niña and -IOD mature — this warmth is beginning to migrate eastward in the form of a downwelling kelvin wave. When this feature surfaces, the La Niña is likely to terminate. pic.twitter.com/QC2EbCiN5u
— Deelan Jariwala (@WxTca) January 7, 2026
ओडिशा में इस तरह का मौसम रहेगा
अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अनुसार, मार्च, अप्रैल और मई में तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है, लेकिन यह 2024 और 2023 जितना भीषण गर्मी वाला नहीं होगा। भारत में गर्मी की शुरुआत ओडिशा राज्य से होती है ओर पिछले कई साल से देखा जा रहा है कि ओडिशा में गर्मी फरवरी में ही शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। क्योंकि अल नीनो का असर जून-जुलाई तक पड़ने की संभावना है, जिससे मानसून की बारिश अनियमित रहेगी।
ओडिशा में लू ज्यादा नहीं चलेगी और उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण रुक-रुक कर बारिश होगी, लेकिन स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण गर्मी बढ़ जाएगी। ओडिशा में बढ़ते शहरीकरण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण के कारण गर्मी पिछले कुछ साल से असामान्य रूप से अधिक पड़ेगी।










