तमिलनाडु के करुर में हुई दुखद भगदड़ के मामले में अभिनेता से राजनेता बने टीवीके प्रमुख जोसेफ विजय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले की कमान संभाल ली है और सोमवार दोपहर 12 बजे से दिल्ली स्थित मुख्यालय में विजय से पूछताछ शुरू कर दी है. सीबीआई के एक एसपी और इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी विजय से उन तमाम पहलुओं पर सवाल-जवाब कर रहे हैं, जो इस हादसे की वजह बने. गौरतलब है कि पिछले साल अक्टूबर में इस केस को राज्य पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपा गया था ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके.
अनुमानित संख्या से बहुत ज्यादा भीड़
सीबीआई की पूछताछ का मुख्य केंद्र उस दिन कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और विजय के पहुंचने में हुई देरी पर है. सूत्रों की मानें तो एजेंसी यह जानना चाहती है कि विजय के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने में करीब सात घंटे की देरी क्यों हुई. आरोप है कि इस लंबे इंतजार की वजह से ही वहां मौजूद लोगों का सब्र जवाब देने लगा था. जांच टीम यह भी पता लगा रही है कि जब भीड़ 10 हजार की अनुमानित संख्या से बढ़कर 30 हजार तक पहुंच गई थी, तब पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर इसे नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाए थे.
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बुनियादी इंतजाम पर उठे सवाल
एजेंसी इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि करुर में इस कार्यक्रम को आयोजित करने का फैसला किसका था और इसके लिए जरूरी परमिशन ली गई थी या नहीं. विजय से पूछा जा रहा है कि क्या कार्यक्रम से पहले किसी संभावित खतरे या रिस्क का अंदाजा लगाया गया था और क्या वहां पानी या सुरक्षित आने-जाने जैसे बुनियादी इंतजाम मौजूद थे. एक अहम सवाल विजय के काफिले को लेकर भी है कि वह भारी भीड़ के बीच से कैसे गुजरा और क्या उस दौरान लोकल पुलिस के साथ कोई तालमेल किया गया था. सीबीआई भगदड़ की सटीक जानकारी मिलने के समय और विजय के वहां से निकलने के समय के बारे में भी स्पष्टता चाहती है.
गवाहों के बयान और अब तक की कार्रवाई
सीबीआई इस केस में अब तक काफी होमवर्क कर चुकी है और पूछताछ के दौरान वह विजय को रैली की अनुमति से जुड़े दस्तावेज और गवाहों के बयान भी दिखाएगी. इससे पहले एजेंसी तमिलनाडु पुलिस के उन कर्मियों से भी पूछताछ कर चुकी है जो उस दिन विजय की सुरक्षा में तैनात थे. उन्हें करुर बेस कैंप में बुलाकर विजय की गतिविधियों और आवाजाही के समय के बारे में सवाल किए गए थे. इसके अलावा जिला कलेक्टर एम. थंगावेल और एसपी के. जोस के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं. इन सभी बयानों और सबूतों के आधार पर अब विजय से आमना-सामना कराया जा रहा है ताकि सच सामने आ सके.
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