Supreme Court Bar Association: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के इस्तीफे की मांग करने वाले सोशल मीडिया कैंपेन की आलोचना की है. उन्होंने चेतावनी दी है कि ऐसी मांगों से न्यायपालिका में जनता का भरोसा कम हो सकता है. 12 अक्टूबर को जारी अलग-अलग प्रस्तावों में, इन दोनों कानूनी संगठनों ने इस बात पर जोर दिया कि सुप्रीम कोर्ट को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए और बाहरी दबाव से मुक्त रहना चाहिए. उन्होंने वकीलों और नागरिकों से न्यायपालिका की गरिमा और संस्थागत अधिकार का सम्मान करने की भी गुजारिश की.
बार संगठनों ने संयम बरतने को कहा
SCBA ने कहा कि न्यायिक प्रणाली नागरिकों को कानूनी उपाय और उचित राहत पाने का मौका देती है. उसने चिंता जताई कि CJI को निशाना बनाने वाले सार्वजनिक बयानों से संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है. एसोसिएशन ने अपने सदस्यों और जनता से अपनी राय व्यक्त करते समय संयम बरतने की अपील की. इसके प्रस्ताव पर मानद सचिव प्रज्ञा बघेल ने हस्ताक्षर किए.
SCAORA ने भी कानून के शासन को बनाए रखने और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की न्यायपालिका की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर दिया. उसने कहा कि न्यायिक कामकाज से जुड़ी शिकायतों का समाधान मुख्य न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग करने वाले कैंपेन के बजाय स्थापित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाना चाहिए. इस प्रस्ताव पर SCAORA की मानद सचिव युगंधरा पवार झा ने दस्तखत किए.
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के बाद आए प्रस्ताव
ये बयान दिल्ली में चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन और वकीलों पर पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के आरोपों के बीच आए हैं. SCBA और अन्य याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शनों के दौरान वकीलों को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. कोर्ट संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सहमत हो गया है. सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने जोर दिया कि लोकतांत्रिक विरोध-प्रदर्शनों से सुप्रीम कोर्ट के कामकाज में रुकावट नहीं आनी चाहिए और न ही वकीलों, मुक़दमेबाजो और कोर्ट के कर्मचारियों की आवाजाही में रुकावट पैदा होनी चाहिए.
कानूनी तरीकों पर जोर
दोनों एसोसिएशनों ने कहा कि असहमति और शिकायतों का समाधान उचित कानूनी तरीकों से किया जाना चाहिए. उन्होंने संस्था में जनता का भरोसा बनाए रखते हुए न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया. उनके प्रस्ताव असहमति व्यक्त करने के अधिकार और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान और न्याय के निर्बाध प्रशासन के बीच संतुलन बनाने के महत्व को रेखांकित करते हैं.