केदारनाथ यात्रा 2025 की शुरुआत 2 मई से होने वाली है। उससे पहले ही उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से एक परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। दरअसल, यात्रा करवाते समय जिन खच्चरों का इस्तेमाल किया जाता है, उनका मेडिकल परीक्षण किया जा रहा था। इस परीक्षण में 12 खच्चरों के अंदर H3N8 इन्फ्लूएंजा वायरस की पुष्टि की गई है। जांच 300 से अधिक खच्चरों की की गई थी।
हालांकि, स्वास्थय विभाग ने सभी संक्रमित खच्चरों को क्वारंटाइन कर दिया है, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। यहां IVRI मुक्केश्वर की रिसर्च टीम वायरस के प्रसार और रोकथाम पर शोध कर रही है। यह वायरस मुख्यतः घोड़े, कुत्ते और पक्षियों में पाया जाता है लेकिन कई बार मनुष्य भी इस वायरस की चपेट में आ जाते हैं। चलिए एक्सपर्ट से जानते हैं H3N8 इन्फ्लूएंजा वायरस के बारे में सबकुछ।
क्या है H3N8 इन्फ्लूएंजा वायरस?
हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि यह वायरस एक संक्रामक वायरल इंफेक्शन है, जो संक्रमित जानवरों और मरीजों से फैलता है। यह वायरस मुख्य रूप से घोड़े, कुत्ते और पक्षियों में पाया जाने वाला वायरस है लेकिन दुर्लभ मामलों में यह इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। यह वायरस साल 2002 में बत्तखों में मिला था। अब केदारनाथ के खच्चरों में भी इस वायरस की पुष्टि हुई है। ऐसे में यात्रा के लिए जाने वाले लोगों को कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत है।
ये भी पढ़ें- बैली फैट घटाने के लिए शाम 6 बजे के बाद कभी न खाएं ये फूड्स
H3N8 वायरस का प्रभाव किस पर ज्यादा होता है?
इस वायरस का असर जानवरों और पक्षियों में ज्यादा होता है, जैसे कि यहां बताया गया है।
1. कुत्ते
H3N8 इन्फ्लूएंजा वायरस कुत्तों में ब्रोन्काइटिस और बुखार का कारण बन सकता है। यह आमतौर पर कुत्तों की सांस की नली में सूजन पैदा करता है।
2. घोड़े
घोड़े भी इस वायरस की चपेट में आ जाते हैं और यह इन्हें खांसी, बुखार और अन्य सांस से संबंधित समस्याओं से पीड़ित कर सकते हैं।
3. पक्षियों
कई पक्षी जैसे की बत्तख, हंस और मुर्गों में भी इस वायरस के फैलने की संभावनाएं तेजी रहती है।
इंसानों पर असर
H3N8 वायरस मनुष्यों में बहुत दुर्लभ तौर पर पाया जाता है। यह कुछ मामलों में मनुष्यों को प्रभावित कर सकता है। इंसानों में भी गर्भवती महिलाएं, 65 साल से अधिक आयु वाले लोग, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को और छोटे बच्चों को इस वायरस का खतरा ज्यादा रहता है।
कैसे फैलता है यह वायरस?
यह वायरस संक्रमित पक्षियों, कुत्तों और घोड़ों के रेस्पिरेटरी अंगों से निकलने वाली बूंदों से फैलता है। संक्रमित जानवरों से निकली बूंदें हवा में घुलकर जानवरों और मनुष्यों तक पहुंच सकती हैं। संक्रमित सतहों के संपर्क में आने से भी यह वायरस स्प्रेड होता है।
H3N8 वायरस के शुरुआती संकेत
इसके लक्षण जानवरों और मनुष्यों में अलग-अलग हो सकते हैं।
कुत्तों और घोड़ों में इस वायरस से पीड़ित होने के बाद बुखार, खांसी, नाक बहना, थकान, भूख में कमी, और सांस लेने में कठिनाई जैसे संकेत मिलते हैं। वहीं, यदि कोई इंसान इस वायरस से संक्रमित होता है तो सामान्य फ्लू जैसे लक्षण हो सकते हैं जैसे बुखार, खांसी, गले में खराश होना और सिरदर्द होना। छींके आना, उल्टी आना और दस्त भी इंसानों में इसके लक्षण हो सकते हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
मुंबई के डॉक्टर लैंसलॉट पिंटो बताते हैं कि यह वायरस लोगों में भी आसानी से फैल सकता है। हालांकि, इस वायरस के अधिकांश मामले जानवरों में ही पाए जाते हैं। इस वायरस के दो प्रकार होते हैं, जिसमें H और N के अलग-अलग कॉम्बिनेशन हो सकते हैं। यह मरीज की पुष्टि के बाद पता चलता है। हर साल यह सीजनल इंफ्लूएंजा के तौर पर एक्टिव होता है। अमेरिका या नर्द न हेमिस्फेयर में यह दिसंबर के महीने में सक्रिय रहता है, वहीं अपने देश में इसके मामले मानसून में सामने आते हैं। इसके मरीजों में बुखार, सिरदर्द, गला खराब से लेकर डायरिया भी संकेत होते हैं। कोरोना या किसी भी अन्य रेस्पिरेटरी इंफेक्शन की तरह, यह भी लोगों में फैल सकता है।
केदारनाथ यात्रियों के लिए सावधानियां
- केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को इस वायरस के लक्षणों के बारे में पहचान करने की जरूरत है।
- अगर कोई बीमार होता रहता है, तो यात्रा से पहले जरूर मेडिकल चेकअप करवा लें।
- यात्रियों को पहले से खुद के शरीर को फिट रखने की जरूरत है ताकि किसी भी प्रकार का संक्रमण उन्हें न घेरे।
- साफ-सफाई का ख्याल रखना जरूरी है। इसके लिए आपको किसी भी जानवर के संपर्क में आने के बाद हाथ धोना चाहिए।
- मास्क जरूर पहनें ताकि सांस और फेफड़ों के इंफेक्शन से बचा जा सके।
- यात्री अपने साथ जरूरी दवाओं और सेनिटाइजर जैसी चीजों को लेकर जाना न भूलें।
प्रशासन भी रखें ख्याल
इसके अलावा, लोकल स्वास्थ्य विभाग की टीम को खच्चरों के लिए इन्फ्लूएंजा का टीका उपलब्ध करवाना चाहिए। अगर किसी जानवर में यात्रा के दौरान भी H3N8 वायरस के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो तुरंत पशु चिकित्सक से उसकी जांच करवाएं। यात्रा मार्ग पर स्थित अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और आपातकालीन मेडिकल शिविरों का विवरण प्रशासन द्वारा किया जाना चाहिए, ताकि यदि किसी यात्री को इन्फ्लूएंजा के लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें तुरंत उपचार मिल सके।
ये भी पढ़ें- पेट दर्द भी कही टीबी के लक्ष्ण तो नहीं? जानें बचाव के तरीके
Disclaimer: ऊपर दी गई जानकारी पर अमल करने से पहले विशेषज्ञों से राय अवश्य लें। News24 की ओर से जानकारी का दावा नहीं किया जा रहा है।