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DMRC News: दिल्ली मेट्रो चरण 4 गोल्डन लाइन दिल्ली मेट्रो फेज 4 का निर्माण कर रही है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने अपनी गोल्डन लाइन पर एक और उपलब्धि हासिल की है, जो तुगलकाबाद से एरोसिटी तक फैली हुई है। डीएमआरसी ने मां आनंदमयी मार्ग और तुगलकाबाद रेलवे कॉलोनी स्टेशन के बीच 0.792 किलोमीटर लंबी सुरंग का काम पूरा कर लिया। साथ ही 96 मीटर लंबी टीबीएम (टनल बोरिंग मशीन) की मदद से सुरंग बनाने में भी सफलता हासिल की गई। डीएमआरसी एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर के हिस्से के रूप में इस खंड पर ऊपर और नीचे की आवाजाही के लिए दो समानांतर गोलाकार सुरंगों का निर्माण कर रहा है। दूसरी समानांतर सुरंग पर जुलाई 2025 में सफलता मिलने की उम्मीद बताई जा रही है।
इस नई सुरंग का निर्माण लगभग 18 मीटर की औसत गहराई पर किया गया है। इसमें लगभग 566 रिंग लगाए गए हैं, जिनका इनर डीएमटीर 5.8 मीटर है। सुरंग का निर्माण अर्थ प्रेशर बैलेंसिंग मेथड (EPBM) की तकनीक का इस्तेमाल करके किया गया है, जिसमें प्रीकास्ट टनल रिंग से बनी कंक्रीट लाइनिंग है। इन टनल रिंग को मुंडका में स्थापित एक पूरी तरह से मशीनीकृत कास्टिंग यार्ड में कास्ट किया गया था। कंक्रीट सेगमेंट को जल्दी मजबूती प्राप्त करने के लिए स्टीम क्योरिंग सिस्टम से ठीक किया गया था।
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अब तक स्वीकृत चरण 4 के कार्य के तहत 40.109 किलोमीटर भूमिगत लाइनों का निर्माण किया जा रहा है। एरोसिटी-तुगलकाबाद कॉरिडोर में कुल 19.343 किलोमीटर भूमिगत खंड हैं।
दिल्ली मेट्रो की भूमिगत सुरंगों की खुदाई टीबीएम मशीन का इस्तेमाल करके की जा रही है। टीबीएम एक ऐसी मशीन है जिसका इस्तेमाल मिट्टी और चट्टानी परतों के माध्यम से एक गोलाकार क्रॉस-सेक्शन वाली सुरंगों की खुदाई के लिए किया जाता है। उन्हें चट्टान से लेकर रेत तक किसी भी चीज को छेदने के लिए डिजाइन किया जा सकता है। टीबीएम ने दुनिया भर में सुरंग बनाने के काम में महारत हासिल की है, जिससे इमारतों और अन्य सतही संरचनाओं को नुकसान पहुंचाए बिना सुरंग खोदना संभव हो गया है। डीएमआरसी सुरंग निर्माण काम के लिए चरण 1 से ही टीबीएम का इस्तेमाल कर रही है। चरण 3 में, जब लगभग 50 किलोमीटर भूमिगत खंड का निर्माण किया गया था, तब राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 30 टीबीएम तैनात की गई थीं।
फेज-4 के बनने से दिल्ली मेट्रो में कुल 65.20 किलोमीटर नई लाइनों का विस्तार हो रहा है। जिनमें से 40 किलोमीटर से ज्यादा हिस्सा अंडरग्राउंड होगा। गोल्डन लाइन (तुगलकाबाद–एरोसिटी कॉरिडोर) इसकी सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है। यह दिल्ली के दक्षिणी हिस्से को IGI एयरपोर्ट से कनेक्ट करेगी। इससे लोगों को अपने सफर को पूरा करने में कम से कम समय लगेगा, इसके साथ ही उन्हें कई इंटरचेंज से भी छुटकारा मिल सकेगा, खासकर उन लोगों को जो हर रोज यात्रा करते हैं।
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