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World Radio Day 2026: Spotify और YouTube के जमाने में भी कार में FM ही क्यों सुनते हैं लोग?

बॉक्स रेडियो से लेकर कार FM और स्मार्टफोन तक, समय बदला लेकिन रेडियो का जादू नहीं. 90s की यादें, पसंदीदा RJ की आवाज और ड्राइव के दौरान बजते गाने आज भी लोगों को इससे जोड़े रखते हैं. World Radio Day पर जानिए क्यों डिजिटल दौर में भी रेडियो लोगों के दिलों में जिंदा है.

Author Written By: Mikita Acharya Updated: Feb 13, 2026 10:02
world radio day
म्यूजिक ऐप्स के दौर में भी क्यों सबसे पसंदीदा है रेडियो.

World Radio Day: 13 फरवरी को वर्ल्ड रेडियो डे मनाया जाता है. एक समय था जब घरों में बड़े बॉक्स रेडियो के आसपास पूरा परिवार इकट्ठा होता था. न्यूज बुलेटिन, नाटक और गाने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे. 60-70 के दशक में ट्रांजिस्टर आया तो रेडियो जेब में आ गया. विविध भारती, फिल्मी गाने और क्रिकेट कमेंट्री ने इसे और लोकप्रिय बना दिया. 

90s और 2000s नॉस्टैल्जिया का दौर

90 के दशक में FM रेडियो की एंट्री ने सब कुछ बदल दिया. साफ आवाज, मजेदार RJ और शहर की लाइफस्टाइल से जुड़े शो लोगों के बीच हिट हो गए. यही वो दौर था जब ‘बिनाका गीतमाला’ जैसी पुरानी यादों की जगह मॉर्निंग शो, डेडिकेशन प्रोग्राम और लव मैसेज ने ले ली. 2000 के दशक में मोबाइल फोन में FM आने से रेडियो और भी पर्सनल हो गया. लोग बस, ऑफिस या यात्रा के दौरान कभी भी अपने पसंदीदा स्टेशन सुनने लगे.

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Photo-Freepik

लोगों की यादों में आज भी जिंदा है रेडियो

किसी के लिए रेडियो पढ़ाई के समय का बैकग्राउंड म्यूजिक है, तो किसी के लिए बचपन की सुबहें. कई लोग आज भी अपने पसंदीदा RJ की आवाज से दिन की शुरुआत करते हैं. यही वजह है कि टेक्नोलॉजी बदलने के बाद भी रेडियो की भावनात्मक कनेक्टिविटी बनी हुई है.

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कार में आज भी सबसे पसंदीदा क्यों है रेडियो?

म्यूजिक ऐप्स और प्लेलिस्ट के दौर में भी ड्राइविंग के दौरान FM सबसे ज्यादा सुना जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है सिंपल और फ्री एंटरटेनमेंट. ड्राइव करते समय गाने, ट्रैफिक अपडेट, मौसम की जानकारी और RJ की लाइव बातचीत सफर को आसान और मजेदार बना देती है. इसके अलावा, रेडियो में इंटरनेट या प्लेलिस्ट चुनने की जरूरत नहीं होती, बस स्टेशन लगाइए और सफर का आनंद लीजिए.

आपदा और गांवों में भी रेडियो की ताकत

रेडियो की सबसे बड़ी खासियत इसकी पहुंच है. बिजली या इंटरनेट न होने की स्थिति में भी यह सूचना पहुंचा सकता है. बाढ़, तूफान या अन्य आपदाओं के समय रेडियो लोगों तक जरूरी जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है. वहीं कम्युनिटी रेडियो गांवों में खेती, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी जानकारी देने का काम कर रहे हैं.

सिर्फ म्यूजिक नहीं, एक इमोशनल कनेक्शन

रेडियो सिर्फ गाने सुनने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह यादों से जुड़ा एक एहसास है. कई लोगों के लिए यह पढ़ाई के समय का बैकग्राउंड म्यूजिक है, तो किसी के लिए बचपन की सुबहें. पसंदीदा RJ की आवाज, सुनने वालों के मैसेज और लाइव बातचीत इसे दूसरे प्लेटफॉर्म से अलग बनाती है. यही वजह है कि डिजिटल दौर में भी रेडियो का भावनात्मक रिश्ता बना हुआ है.

डिजिटल दौर में भी बरकरार है रेडियो का चार्म

आज रेडियो स्मार्टफोन, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और पॉडकास्ट तक पहुंच चुका है. 1895 में वायरलेस सिग्नल से शुरू हुआ यह सफर अब डिजिटल दुनिया में भी जारी है. भारत में 1927 से शुरू हुआ रेडियो आज भी गांव और शहर को जोड़ने का मजबूत माध्यम बना हुआ है. टेक्नोलॉजी भले बदल गई हो, लेकिन एक सच्चाई आज भी कायम है आवाज का जादू और रेडियो का साथ कभी पुराना नहीं होता.

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First published on: Feb 13, 2026 09:57 AM

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