Cyber Security Tips: सोशल मीडिया पर इन दिनों अपने पर्स या वॉलेट को एल्युमीनियम फॉयल में लपेटने का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है. यह कोई मज़ाक या भ्रम नहीं है, बल्कि डिजिटल चोरी और डेटा ट्रैकिंग से बचने के लिए अपनाया जा रहा एक आसान और सस्ता उपाय है. हमारे पर्स में रखे कई तरह के आधुनिक कार्ड्स से वायरलेस सिग्नल निकलते हैं, जिन्हें दूर बैठे हैकर्स आसानी से स्कैन कर सकते हैं.
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आजकल कई सरकारी आईडी, पासपोर्ट कार्ड, ट्रांजिट पास और क्रेडिट-डेबिट कार्ड में RFID और NFC तकनीक का उपयोग होता है. सुरक्षा अध्ययनों के अनुसार, लंबी दूरी वाले RFID चिप्स को विशेष स्कैनर्स की मदद से 30 से 162 फीट की दूरी से भी पढ़ा जा सकता है. इस प्रकार की डिजिटल हैकिंग का मुख्य खतरा सीधे खाते से पैसे निकालना नहीं, बल्कि किसी व्यक्ति की लोकेशन को लगातार ट्रैक करना और उसकी अनूठी आईडी संख्या को बिना इजाज़त स्कैन करना है.
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क्या एल्युमीनियम फॉयल सच में सुरक्षा देता है?
भौतिकी के नियमों के अनुसार एल्युमीनियम एक सुचालक धातु है जो रेडियो तरंगों को रोकने या बिखेरने का काम करती है. यह फैराडे केज (Faraday Cage) के सिद्धांत पर काम करता है और वायरलेस स्कैनर से निकलने वाले सिग्नलों को कार्ड की चिप तक पहुंचने से रोकता है. हालांकि, रसोई का फॉयल पतला होता है और आसानी से फट सकता है, जिससे सिग्नल अंदर प्रवेश कर सकता है. इसलिए यह एक त्वरित और सस्ता उपाय तो है, लेकिन पूरी तरह से सुरक्षित विकल्प नहीं है.
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सुरक्षा के लिए क्या हैं बेहतर विकल्प?
सभी कार्ड्स एक समान दूरी से स्कैन नहीं होते हैं; जैसे NFC क्रेडिट कार्ड कम दूरी पर काम करते हैं, जबकि सरकारी आईडी और पासपोर्ट कार्ड काफी दूर से पढ़े जा सकते हैं. यदि एल्युमीनियम फॉयल में वॉलेट लपेटना झंझट भरा लगता है, तो साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ RFID-ब्लॉकिंग वॉलेट या फैराडे स्लीव्स का उपयोग करने की सलाह देते हैं. यह टिकाऊ और आसान तरीका है जो आपके सभी वायरलेस कार्ड्स को डिजिटल चोरी से बचाकर रखता है.
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