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Explainer: आजादी से अब तक कितनी बढ़ी समुद्री शक्ति? जानें परंपरा से परिवर्तन तक नौसैनिक ताकत का ऐतिहासिक सफर

हिंद महासागर में बिजनसेस और ऊर्जा सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण लाइन को तैयार कर लिया है. चीन की नौसैनिक सरगर्मी के कारण यह एक विवादित क्षेत्र बन गया है. आपको बता दे कि भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण दुश्मन के अटैक को रोकने के लिए पूरी तरह से सक्षम हो गए है.

Author Written By: Pawan Mishra Updated: Dec 10, 2025 21:08

अगर सेना की बात करें तो स्ट्रेटेजिक महत्वाकांक्षा और टेक्निकल डेवलोपमेन्ट को नवसेना की समुद्री विरासत से वैश्विक नौसैनिक शक्ति बनने तक की भारत की यात्रा को एक अलग ही तरह की पहचान मिली है. इसका ताजा उदाहरण आईएनएस सूरत और आईएनएस नीलगिरि, आईएनएस तमाल और आईएनएस वाग्शीकी डिलीवरी, स्वदेशी जहाज निर्माण में लगातार बढ़ते शक्ति को प्रमाणित कर रहा है. इतना ही नही आत्मनिर्भरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता और हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे की समुद्री विकाश में ज्यादा से ज्यादा इजाफा हो इसके लिए लगातार प्रयास किये जा रहे है.

आपको बता दें कि जैसे-जैसे इंडो-पैसिफिक भूराजनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है, उन्नत युद्धपोत बनाने की भारत की क्षमता उसके समुद्री हितों की रक्षा के लिए अभिन्न अंग है. यह परिवर्तन दक्षिण पूर्व एशियाई देशों को बाहरी दबावों के बीच अपनी समुद्री सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए खुद के लिए एक सबक और सिख की तरह ले रहा है.

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भारत की समुद्री विरासत

अगर बात करें भारत की समुद्री विरासत की तो भारत का समुद्री इतिहास सिंधु घाटी सभ्यता से मिलता है, जिसके लोथल स्थित गोदी मेसोपोटामिया और मिस्र के साथ व्यापार के केंद्र थे. 10वीं और 11वीं शताब्दी के दौरान दक्षिण पूर्व एशिया में चोल राजवंश के नौसैनिक अभियानों ने समुद्री व्यापार मार्गों पर भारत के प्रभाव को मजबूत किया, जिससे देश हिंद महासागर में एक सांस्कृतिक और आर्थिक पुल के रूप में स्थापित हुआ.

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औपनिवेशिक युग ने इस विरासत को खत्म कर दिया था. ब्रिटिश नीतियों ने शाही हितों को पूरा करने के लिए भारत के जहाज निर्माण उद्योगों को खत्म कर दिया था. स्वतंत्रता के बाद, भारत ने अपने समुद्री ताकत को फिर से खड़ा करना शुरू कर दिया था. जिसकी शुरुआत 1970 के दशक में नीलगिरि श्रेणी के युद्धपोत जैसी परियोजनाओं के साथ हुई थी. कई तरह के रुकावट संसाधन और तकनीकी बाधाओं के बावजूद,एक आत्मनिर्भर नौसैनिक बल की नींव रखी गई.

आधुनिक जहाज निर्माण के दिशा में भारतीय नवसेना


आज, भारत के जहाज निर्माण में गवर्मेंट और निजी सेक्टर मिलकर काम कर रहे है. मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल), कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल), और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के दिग्गजों ने लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) और अदानी ग्रुप जैसे निजी कंपनी ने युद्धपोत निर्माण का बीड़ा उठाया है.

एमडीएल ने 2024 में एक ही दिन विशाखापत्तनम श्रेणी के विध्वंसक आईएनएस सूरत और प्रोजेक्ट 17ए फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरि की डिलीवरी बढ़ी हुई दक्षता की ताकत को दिखाया है. सीएसएल द्वारा भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का निर्माण, भारत की नौसैनिक यात्रा में एक महत्वपूर्ण क्षण है. इस बीच, निजी कंपनी भी इसमें अपनी भागीदारी दिखाने लगी है,मुंद्रा पोर्ट पर अदानी समूह की ₹45,000 करोड़ की परियोजना सेना की शक्ति को बढ़ाने के साथ ही रोजगार को भी बढ़ावा दे रही है.

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हिंद महासागर में बिजनसेस और ऊर्जा सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण लाइन को तैयार कर लिया है. चीन की नौसैनिक सरगर्मी के कारण यह एक विवादित क्षेत्र बन गया है. आपको बता दे कि भारत के स्वदेशी जहाज निर्माण दुश्मन के अटैक को रोकने के लिए पूरी तरह से सक्षम हो गए है. भारत ने वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस जैसे देशों के साथ समुद्री साझेदारी को मजबूत किया है. फ्रांस, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के साथ ही भारतीय सेना की ताकत को बढ़ा रहा है.

चुनौतियां और अवसर

अपनी प्रगति के बावजूद, भारत का जहाज निर्माण क्षेत्र अभी चुनौतियों का सामना कर रहा है, कियोंकि चीन की तरफ से सालाना 20 युद्धपोत बनाने के साथ, भारत की प्रत्येक 2-3 जहाजों का निर्माण के साथ ही अधिक से अधिक निवेश करने की आवश्यकता है. यही कारण है कि प्रस्तावित ₹25,000 करोड़ के कोष के साथ समुद्री विकास कोष, इन कमियों को दूर करने की कोशिश है. सागर डिफेंस इंजीनियरिंग जैसी कंपनियां तटीय निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए नई प्रगति की तरफ इशारा कर रहा है.

आपको बता दें कि पनडुब्बी विकास का अगला चरण, प्रोजेक्ट 75आई सहित, एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम पर केंद्रित है, जो भारत की ताकत को और ज्यादा मजबूती दे रहा है. वर्तमान में भारत, दक्षिण पूर्व एशिया सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहा है, नौसैनिक कूटनीति को बढ़ाकर और समुद्री ढांचे को बढ़ावा देकर, भारत हिंद-प्रशांत और उससे आगे नौसैनिक शक्ति के भविष्य को आकार देने के लिए तैयार है.

First published on: Dec 10, 2025 09:08 PM

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