Rashima Mandana As Yeshubai Bhonsale: विक्की कौशल की फिल्म ‘छावा’ में रश्मिका मंदाना ने मराठा साम्राज्य की रानी येसूबाई भोंसले की भूमिका निभाई है। इस फिल्म में दर्शकों को येसूबाई के संघर्षों, उनकी निडरता और हिम्मत की कहानी बखूबी देखने को मिल रही है। येसूबाई भोंसले का जीवन उनके पति छत्रपति संभाजी महाराज की पत्नी होने से कहीं ज्यादा था। उनका योगदान मराठा साम्राज्य को बचाने में भी बहुत अहम था। चलिए आपको बताते हैं यूसेबाई के बारे में।
कौन थीं येसेबाई भौंसले?
येसूबाई भोंसले का जन्म राजाऊ शिरके के घर हुआ था, जो एक बड़े मराठा सरदार थे। उनकी शादी छत्रपति संभाजी महाराज से हुई थी और उन्होंने साम्राज्य को लेकर कई मुश्किलों का सामना किया। 1689 में जब उनके पति संभाजी महाराज को औरंगजेब ने क्रूरता से मृत्यु के घाट उतार दिया, तो येसूबाई ने मराठा साम्राज्य को एकजुट रखने के लिए अद्भुत राजनीति और साहस का परिचय दिया।
27 सालों तक औरंगजेब की कैद में रहीं येसूबाई
येसूबाई का जीवन गवाह था मराठा साम्राज्य की मुश्किलों का, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। वो लगभग 27 सालों तक औरंगजेब की कैद में रहीं, लेकिन उन्होंने अपने साम्राज्य की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया। साल 1719 में उन्हें औरंगजेब से रिहा किया गया और 4 जुलाई को वो सातारा लौट आईं, जिसे आज भी ‘वीरता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
येसुबाई के नेतृत्व में 1730 के आसपास वाराणसी की संधि ने मराठा साम्राज्य की एकता को बनाए रखा। उनकी रणनीतिक दृष्टि और कूटनीति के कारण मराठा साम्राज्य ने मुश्किलों के बावजूद अपनी ताकत बनाए रखी।
रश्मिका ने किरदार पर क्या कहा?
फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रश्मिका मंदाना ने इस भूमिका को निभाने पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘ये मेरे लिए बड़े गर्व की बात है। एक लड़की जो दक्षिण से आई है, उसे महारानी येसूबाई का किरदार निभाना मिलना सबसे विशेष और सम्मान की बात है।’
लक्ष्मण उत्तेकर द्वारा निर्देशित छावा में विक्की कौशल ने छत्रपति संभाजी महाराज की भूमिका निभाई है, जबकि रश्मिका मंदाना ने उनकी पत्नी येसूबाई का किरदार निभाया है। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार शुरुआत की है और दर्शकों से खूब सराहना मिल रही है।
येसुबाई भोंसले की कहानी केवल मराठा साम्राज्य की एक सशक्त रानी की कहानी नहीं है, बल्कि ये एक ऐसी महिला के संघर्ष की कहानी है जिसने साम्राज्य को बर्बाद होने से बचाया। रश्मिका मंदाना की सशक्त और भावनात्मक अभिनय ने इस किरदार को और भी जीवंत बना दिया है, जिससे दर्शकों को येसुबाई के साहस और शक्ति का एहसास होता है।
यह भी पढ़ें: Dhoom Dhaam Review: कॉमेडी-ड्रामा के कन्फ्यूजन में आया चक्कर, जानें कैसी है फिल्म की कहानी