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‘उत्तर दा पुत्तर’ : परफेक्ट वास्तु की तलाश में निकले फिजिक्स प्रोफेसर की कहानी में है इमोशनल ड्रामा एंड कॉमेडी का तड़का

अन्नू कपूर की नई फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' एक अलग विषय लेकर आती है. फिल्म एक ऐसे फिजिक्स प्रोफेसर की कहानी है, जो विज्ञान पढ़ाता है लेकिन खुद वास्तु और तंत्र-मंत्र पर अटूट विश्वास रखता है. आइए जानते हैं, कैसी है यह फिल्म.

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अन्नू कपूर की नई फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ एक अलग विषय लेकर आती है. फिल्म एक ऐसे फिजिक्स प्रोफेसर की कहानी है, जो विज्ञान पढ़ाता है लेकिन खुद वास्तु और तंत्र-मंत्र पर अटूट विश्वास रखता है. इसी विरोधाभास के बीच निर्देशक रविंदर सिवाच ने कॉमेडी, इमोशन और पारिवारिक रिश्तों को जोड़ते हुए एक मनोरंजक कहानी पेश की है. आइए जानते हैं, कैसी है यह फिल्म.

कहानी

दिल्ली के फिजिक्स प्रोफेसर साई राम टुटेजा (अन्नू कपूर) की फिजिक्स से ज़्यादा मेटा फिजिक्स की बात करते है और विश्वास भी करते है. फिल्म के शुरुवाती दृश्य में स्टूडेंट्स को फिजिक्स समझाने का दृश्य फिल्म के मूड को सेट कर देता है. शुभ-अशुभ और वास्तु पर उनका अतिविश्वास पहले ही दृश्य से दर्शकों को हंसा देता है.

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साई राम टुटेजा अपने परिवार के लिए एक “परफेक्ट वास्तु” वाला घर तलाशते हैं. परफेक वास्तु वाला घर किराए पर मिलने के बाद वह पूरे आत्मविश्वास से दावा करते हैं कि सही वास्तु हर परेशानी का समाधान है. लेकिन तभी छत का पुराना पंखा गिर जाता है और उनके ससुर व साले घायल हो जाते हैं. यही घटना कहानी को नया मोड़ देती है.

पत्नी गिन्नी (रुखसार रहमान) नाराज होकर घर छोड़ देती हैं. पत्नी को मनाने और अपना परिवार फिर से जोड़ने के लिए साई राम अपने दोस्त मन्नू (बृजेंद्र काला) के साथ परफेक्ट वास्तु वाले घर की खोज की एक नई यात्रा पर निकलते हैं. इस सफर में नेक चड्ढा (पवन मल्होत्रा), चोपड़ा (नितिन अरोड़ा), वास्तुकार वर्मा (इश्तियाक खान) और एस.बी. सिद्धू (जीवेशु अहलूवालिया) जैसे कई दिलचस्प किरदार कहानी में शामिल होते हैं. इन सभी की मौजूदगी फिल्म में लगातार हास्य, ड्रामा और कई अप्रत्याशित मोड़ लेकर आती है,

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निर्देशन

निर्देशक रविंदर सिवाच की यह पहली फिल्म जरूर है, लेकिन निर्देशन में कहीं भी नएपन की झिझक महसूस नहीं होती. वह कहानी को बिना भटकाए सीधे मुद्दे पर ले जाते हैं और शुरुआत से अंत तक दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं.

लेखक संदीप कपूर ने दिल्ली की स्थानीय संस्कृति, वहां की भाषा और आम जिंदगी से जुड़े किरदारों को बेहद स्वाभाविक ढंग से लिखा है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि विज्ञान पढ़ाने वाला एक प्रोफेसर खुद वास्तु और तंत्र-मंत्र का कट्टर समर्थक है। यही विरोधाभास फिल्म की सबसे बड़ी खासियत बन जाता है. निर्देशक ने कॉमेडी और भावनाओं के बीच अच्छा संतुलन बनाए रखा है, जिसकी वजह से फिल्म कहीं भी बोझिल नहीं लगती.

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परफॉर्मेंस

अन्नू कपूर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं. प्रोफेसर साई राम टुटेजा के रूप में उनकी कॉमिक टाइमिंग शानदार है और भावनात्मक दृश्यों में भी वह पूरी ईमानदारी से अपने किरदार को निभाते हैं.

रुखसार रहमान ने गिन्नी के किरदार में प्रभावशाली अभिनय किया है और पति-पत्नी के रिश्ते की भावनाओं को सहजता से पर्दे पर उतारा है. पवन मल्होत्रा भ्रष्ट सरकारी अधिकारी नेक चड्ढा के किरदार में हमेशा की तरह असर छोड़ते हैं और कई मजेदार दृश्य अपने नाम कर लेते हैं.

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इश्तियाक खान सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं. नितिन अरोड़ा चोपड़ा के किरदार में पूरी तरह फिट बैठते हैं. वहीं जीवेशु अहलूवालिया फिल्म के सबसे बड़े सरप्राइज साबित होते हैं. एस.बी. सिद्धू के उनके किरदार में अलग अंदाज़, शानदार कॉमिक टाइमिंग और भरपूर ऊर्जा देखने को मिलती है. राजेंद्र सेठी और सुमित गुलाटी भी अपने-अपने किरदारों के साथ कहानी को मजबूती देते हैं.

फाइनल वर्डिक्ट

‘उत्तर दा पुत्तर’ सिर्फ हंसाने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि यह मनोरंजन के साथ एक अहम सवाल भी छोड़ जाती है, जिंदगी में आखिर बड़ा क्या है, कर्म या किस्मत? फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसका अनोखा विषय, दिल्ली का देसी फ्लेवर और अतरंगी किरदार हैं. कॉमेडी और इमोशन का संतुलन इसे एक बेहतरीन फैमिली एंटरटेनर बनाता है.

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अन्नू कपूर, पवन मल्होत्रा और जीवेशु अहलूवालिया की दमदार परफॉर्मेंस फिल्म को और ऊंचाई देती है. अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जिसमें साफ-सुथरी कॉमेडी, पारिवारिक भावनाएं और एक अच्छा संदेश हो, तो ‘उत्तर दा पुत्तर’ इस सप्ताह सिनेमाघरों में पूरे परिवार के साथ देखने लायक फिल्म है.

First published on: Jul 23, 2026 09:34 PM

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