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Paatal Lok 2 Review: अपराध के ‘जाल’ से कैसे बाहर निकलेंगे इंस्पेक्टर हाथीराम? जानिए कैसी है कहानी!
Paatal Lok 2 Review: जयदीप अहलावत की क्राइम सीरीज पाताल लोक का दूसरा सीजन अब अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो गया है। आखिर कैसी है इस बार के सीजन की कहानी, चलिए आपको बताते हैं।
Movie Casts:Jaideep Ahlawat, Ishwak Singh, Gul Panag, Tillotama Shome, and Anurag Arora
Paatal Lok 2 Review: 'पाताल लोक' का पहला सीजन रिलीज होने के बाद से ही इस शो ने अपने दर्शकों को अपने मजबूत और गहरे कंटेंट से चौंका दिया था। अब पाताल लोक के दूसरे सीजन ने भी यही काम किया है, लेकिन इस बार शो ने अपनी कहानी को एक नए आयाम में पेश किया है, जो न सिर्फ दिल्ली बल्कि भारत के पूर्वोत्तर हिस्से की राजनीति, अपराध और सामाजिक संरचना को उधेड़ता है। आखिर कैसी है इस बार के सीजन की कहानी, चलिए आपको बताते हैं।
कैसी है सीरीज की कहानी?
इस बार शो की शुरुआत होती है नागालैंड सदन में एक बड़े नेता जॉनथम थॉम की हत्या से। जॉनथम थॉम, जो दिल्ली और नागालैंड के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थे, उनकी मौत के बाद कई रहस्यों का पर्दाफाश होता है। इस हत्या के पीछे की सच्चाई के साथ जुड़े हुए हैं एक दिहाड़ी मजदूर रघु पासवान की गुमशुदगी, एक नाइट क्लब में डांस करने वाली लड़की रोज लिजो और इस सबके बीच घटी घटनाओं का सघन जाल।
सीजन 2 के आठ एपिसोड्स में म्यांमार से दिल्ली के बीच ड्रग्स की तस्करी, नॉर्थ-ईस्ट में लोकल नेताओं की बड़ी-बड़ी बातें, भ्रष्ट राजनेताओं और पुलिस के बीच जटिल नेक्सस, अनाथ बच्चों द्वारा जुर्म की दुनिया में कदम रखना और एक सिस्टम की गड़बड़ी को उजागर किया गया है। इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी का किरदार, जो पहले सीजन में भी एक सच्चे पुलिस अफसर के रूप में नजर आया था, इस सीजन में भी हमें अपने जज्बे और कर्तव्य के प्रति वफादारी से भरपूर नजर आता है। हालांकि, इस बार उनकी व्यक्तिगत जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव आते हैं और वो इस बार सिस्टम को बचाने की कोशिश करते हैं, जबकि खुद को डूबने से बचाने की जगह वह उस पर सवार रहते हैं।
सीजन में उत्तर-पूर्वी कहानियों को दिखाया गया
इस सीजन का एक महत्वपूर्ण पहलू ये है कि इसमें उत्तर-पूर्वी भारत की कहानियों को बखूबी दिखाया गया है, जो आमतौर पर बड़े पर्दे पर कम ही दिखाई देती हैं। ये शो न केवल वहां के राजनीतिक संघर्षों को दिखाता है, बल्कि वहां के लोगों की उम्मीदों, निराशाओं और उनके जीवन की वास्तविकता को भी उजागर करता है।
पाताल लोक सीजन 2 के निर्माता अविनाश अरुण और सुदीप ने अपने डायरेक्शन से इसे पहले सीजन जितना ही दिलचस्प और पेचीदा बना दिया है। पहले एपिसोड से ही आपको एक सस्पेंस और थ्रिल की भावना महसूस होती है, जो आपको अंत तक बंधे रखता है। किरदारों का नेचुरल प्रोग्रेशन और कहानी की जटिलता आपको एक भावनात्मक और मानसिक यात्रा पर ले जाती है, जहां हर मोड़ पर एक नया झटका इंतजार करता है।
जयदीप अहलावत ने फिर जीता दिल
जयदीप अहलावत का हाथीराम चौधरी के किरदार में शानदार प्रदर्शन दर्शकों को पूरी तरह से प्रभावित करता है। पांच साल बाद इस किरदार को निभाते हुए वह पहले से कहीं ज्यादा प्रभावी और गहरे नजर आते हैं। तिलोत्तमा सोम और इश्वाक सिंह जैसे कलाकारों ने भी अपनी भूमिका को बखूबी निभाया है। गुल पनाग का छोटा सा किरदार भी प्रभाव छोड़ता है, जो दर्शकों के दिल में एक छाप छोड़ जाता है।
पाताल लोक 2 के इस सीजन को देखकर ऐसा लगता है कि भारतीय सिनेमा के लिए ये एक बड़ा कदम है। अगर आप भी एक जटिल और संवेदनशील कहानी का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो यह सीजन आपके लिए एक शानदार अनुभव हो सकता है। इस सीरीज एक-एक एपिसोड को देखने के बाद यही महसूस होता है कि ये शो दर्शकों को अपने साथ बांधे रखते हैं।
इस शो को मिलते हैं 5 में से 4 स्टार
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Paatal Lok 2 Review: ‘पाताल लोक’ का पहला सीजन रिलीज होने के बाद से ही इस शो ने अपने दर्शकों को अपने मजबूत और गहरे कंटेंट से चौंका दिया था। अब पाताल लोक के दूसरे सीजन ने भी यही काम किया है, लेकिन इस बार शो ने अपनी कहानी को एक नए आयाम में पेश किया है, जो न सिर्फ दिल्ली बल्कि भारत के पूर्वोत्तर हिस्से की राजनीति, अपराध और सामाजिक संरचना को उधेड़ता है। आखिर कैसी है इस बार के सीजन की कहानी, चलिए आपको बताते हैं।
कैसी है सीरीज की कहानी?
इस बार शो की शुरुआत होती है नागालैंड सदन में एक बड़े नेता जॉनथम थॉम की हत्या से। जॉनथम थॉम, जो दिल्ली और नागालैंड के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी थे, उनकी मौत के बाद कई रहस्यों का पर्दाफाश होता है। इस हत्या के पीछे की सच्चाई के साथ जुड़े हुए हैं एक दिहाड़ी मजदूर रघु पासवान की गुमशुदगी, एक नाइट क्लब में डांस करने वाली लड़की रोज लिजो और इस सबके बीच घटी घटनाओं का सघन जाल।
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सीजन 2 के आठ एपिसोड्स में म्यांमार से दिल्ली के बीच ड्रग्स की तस्करी, नॉर्थ-ईस्ट में लोकल नेताओं की बड़ी-बड़ी बातें, भ्रष्ट राजनेताओं और पुलिस के बीच जटिल नेक्सस, अनाथ बच्चों द्वारा जुर्म की दुनिया में कदम रखना और एक सिस्टम की गड़बड़ी को उजागर किया गया है। इंस्पेक्टर हाथीराम चौधरी का किरदार, जो पहले सीजन में भी एक सच्चे पुलिस अफसर के रूप में नजर आया था, इस सीजन में भी हमें अपने जज्बे और कर्तव्य के प्रति वफादारी से भरपूर नजर आता है। हालांकि, इस बार उनकी व्यक्तिगत जिंदगी में भी कई उतार-चढ़ाव आते हैं और वो इस बार सिस्टम को बचाने की कोशिश करते हैं, जबकि खुद को डूबने से बचाने की जगह वह उस पर सवार रहते हैं।
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सीजन में उत्तर-पूर्वी कहानियों को दिखाया गया
इस सीजन का एक महत्वपूर्ण पहलू ये है कि इसमें उत्तर-पूर्वी भारत की कहानियों को बखूबी दिखाया गया है, जो आमतौर पर बड़े पर्दे पर कम ही दिखाई देती हैं। ये शो न केवल वहां के राजनीतिक संघर्षों को दिखाता है, बल्कि वहां के लोगों की उम्मीदों, निराशाओं और उनके जीवन की वास्तविकता को भी उजागर करता है।
पाताल लोक सीजन 2 के निर्माता अविनाश अरुण और सुदीप ने अपने डायरेक्शन से इसे पहले सीजन जितना ही दिलचस्प और पेचीदा बना दिया है। पहले एपिसोड से ही आपको एक सस्पेंस और थ्रिल की भावना महसूस होती है, जो आपको अंत तक बंधे रखता है। किरदारों का नेचुरल प्रोग्रेशन और कहानी की जटिलता आपको एक भावनात्मक और मानसिक यात्रा पर ले जाती है, जहां हर मोड़ पर एक नया झटका इंतजार करता है।
जयदीप अहलावत ने फिर जीता दिल
जयदीप अहलावत का हाथीराम चौधरी के किरदार में शानदार प्रदर्शन दर्शकों को पूरी तरह से प्रभावित करता है। पांच साल बाद इस किरदार को निभाते हुए वह पहले से कहीं ज्यादा प्रभावी और गहरे नजर आते हैं। तिलोत्तमा सोम और इश्वाक सिंह जैसे कलाकारों ने भी अपनी भूमिका को बखूबी निभाया है। गुल पनाग का छोटा सा किरदार भी प्रभाव छोड़ता है, जो दर्शकों के दिल में एक छाप छोड़ जाता है।
पाताल लोक 2 के इस सीजन को देखकर ऐसा लगता है कि भारतीय सिनेमा के लिए ये एक बड़ा कदम है। अगर आप भी एक जटिल और संवेदनशील कहानी का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो यह सीजन आपके लिए एक शानदार अनुभव हो सकता है। इस सीरीज एक-एक एपिसोड को देखने के बाद यही महसूस होता है कि ये शो दर्शकों को अपने साथ बांधे रखते हैं।