सुभाष के झा: हिंदी सिनेमा की कुछ फिल्में ऐसी होते हैं, जिनकी चर्चा सालों बाद भी होती है। साल 2008 में रिलीज हुई फिल्म ‘फिराक’ भी इस लिस्ट में आती है। ‘फिराक’ सांप्रदायिक हिंसा पर बनी एक बेहतरीन फिल्म थी, जिसे लोगों ने खूब प्यार भी दिया था। इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुए 17 साल हो गए हैं और अब फिल्म की रि-रिलीज की मांग की जा रही है।
नंदिता दास की पहली फिल्म
फिल्म ‘फिराक’ नंदिता दास की पहली निर्देशित फिल्म है। इस फिल्म के 17 साल पूरे होने पर नंदिता दास ने कहा कि आज जब फिल्मों की रिलीज की बाढ़-सी आती है, तो मैं चाहती हूं कि ये फिल्म फिर से सिनेमाघरों में रिलीज की जाए और ये सच में बहुत ही अच्छा होगा। उन्होंने आगे कहा कि मैं जानती हूं कि फिल्म यूट्यूब पर फ्री में मौजूद है, लेकिन ये एक अच्छी फिल्म है और लोगों को पसंद भी है।
थिएटर में सबके साथ फिल्म देखना अलग एक्सपीरियंस
उन्होंने आगे कहा कि मेरा हमेशा से मानना रहा है कि आपको पता है कि कला कितनी कीमती होती है। समय के साथ इसमें भी बदलाव होता है और ये जीवित रहती है और सिनेमा भी इससे अलग नहीं है। उन्होंने आगे कहा आप थिएटर में सबके साथ ग्रुप में फिल्म देखते हैं और ये एक ऐसा एक्सपीरियंस है, जो आपको पूरी तरह से प्रभावित करता है।
मेरे दिल के बहुत करीब है…
उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि किसी दिन यह फिर से रिलीज होगी क्योंकि उस समय बहुत से लोग इसे थिएटर में नहीं देख सकते थे। साथ ही आप जानते हैं कि उस समय सोशल मीडिया भी नहीं था। इसलिए इस बारे में लोगों को बताना बहुत मुश्किल था और मुझे लगता है कि अगर इसे फिर से रिलीज किया जाए तो बहुत से लोग इसे देखने में दिलचस्पी भी लेंगे। उनका कहना है कि मेरे लिए ये फिल्म हमेशा खास रहेगी यह मेरी पहली फिल्म थी और ये मेरी दिल के बेहद करीब है। ये मेरी लाइफ के चुनौतीपूर्ण अनुभवों में से एक था।
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