Geetam Shrivastava
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Bhooth Bangla Review, (Geetam Shrivastava): अक्षय कुमार की फिल्म ‘भूत बंगला’ को देखते हुए सबसे पहले जो एहसास आता है, वो है déjà vu जैसे आप कुछ जाना-पहचाना देख रहे हैं, लेकिन उसमें वो जान नहीं है, जो कभी हुआ करती थी. अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी से जो उम्मीदें बनती हैं, फिल्म की शुरुआत के बाद से धीरे-धीरे टूटने लगती हैं और क्लाइमैक्स तक आते-आते पूरी तरह खत्म हो चुकी होती हैं. फिल्म ‘भूत बंगला’ के ट्रेलर ने काफी उम्मीदें बांधी थीं. ऐसा लग रहा था कि ‘भूल भुलैया’ वाला जादू फिर से चल जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं होता है.
फिल्म की कहानी मंगलपुर गांव की है, जहां वधुसुर नाम का भूत है, जो नई नवेली दुल्हनों को गायब कर देता है. फिर इसका कनेक्शन निकलता है लंदन में रहे जीशू सेन गुप्ता के परिवार से जिनके बेटे हैं अक्षय कुमार और मिथिला पारकर. पूरी फिल्म में किसी भी तरह से अक्षय कुमार, जीशू सेन गुप्ता के बेटे नहीं लगते, मिथिला पारकर की शादी होनी है लेकिन वो क्यों एक भारी अंधविश्वासी घर और मिथिला के लिए कोई स्टेंड ना लेने वाले इंसान शादी क्यों कर रही हैं ये समझ के बिल्कुल बाहर है. हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि मिथला की शादी मंगलपुर के उसी भूत बंगले में होनी तय होती है बाकी की कहानी यही है कि वधुसुर कौन है और ऐसा क्यों कर रहा है? दरअसल, ये फिल्म देखते हुए आप समझ जाएंगे कि इसकी स्क्रिप्ट 1979 में आई ‘जानी दुश्मन’, ‘भूल भुलैया’ हॉलीवुड फिल्म ‘लाइट्स आउट’ और क्लाइमैक्स ‘शैतान’ फिल्म की खिचड़ी है.
फिल्म की कास्टिंग मजबूत है और सारे मंझे हुए कलाकार हैं. इसमें अक्षय कुमार, परेश रावल, राजपाल यादव, जीशू सेन गुप्ता, राजेश शर्मा और तब्बू जब जब स्क्रीन पर आती हैं तो सीन्स में जान आती है, लेकिन कहानी इतनी कमजोर है कि फिल्म की कास्टिंग भी इसे नहीं बचा पाती.
‘धुरंधर’ की सफलता के बाद इस फिल्म का पैटर्न भी वही रखा गया. पेड प्रिव्यू रखे गए फिल्म की लंबाई भी 2 घंटे 44 मिनट की है और स्टेटेजी ये रखी गई कि ‘धुरंधर’ फैमीली मूवी नहीं थी तो, इसे लोग परिवार के साथ देखने आएंगे लेकिन इस फिल्म को भी U/A सर्टिफिकेट मिला है बल्कि कुछ हिस्से तो आपको परिवार के साथ देखने में अनकम्पर्टेबल भी करते हैं. जब फिल्म में आपको अश्लील और जबरदस्ती ठूसे हए जोक्स की जरूरत पड़ जाए और उस पर भी हसी ना आए, यहां तक की ‘आमी जे तोमार’ जैसे जाने की तर्ज पर गाए बनाए जाए और बेअसर हों तो अंदाजा लगा लीजिए कि फिल्म की कहानी और ट्रीटमेंट किस हद तक कमजोर है.
फिल्म के VFX बिल्कुल एवरेज हैं. गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक कुछ भी असरदार नहीं है. फिल्म की कॉमेडी इसकी सबसे बड़ी ताकत होनी चाहिए थी, लेकिन वही सबसे कमजोर कड़ी बन जाती है. एक वक्त के बाद 2 घंटे 44 मिनट का रनटाइम फिल्म को और थका देता है, जिससे इसकी कमजोरियां और उभरकर सामने आती हैं.
सबसे दिलचस्प बात यह है कि फिल्म बार-बार आपको पुरानी यादों की तरफ ले जाने की कोशिश करती है. फिल्म का शूट भी जयपुर के उसी चोमू पैलेस में हुआ है जहां ‘भूल भुलैया’ और ‘बोल बच्चन’ जैसी फिल्म शूट हुई हैं. स्टोरीटेलिंग का भी वही पैटर्न है. फिल्म के गाने भी ‘आमी जे तोमार’ और ‘हरे राम हरे राम’ की तर्ज पर रखे गए हैं, लेकिन फिर भी फिल्म को कुछ मदद नहीं मिल पाती बल्कि सब आउटडेटेड जैसा लगता है, लेकिन खुद कोई नया या यादगार पल नहीं बना पाती है. फिल्म को 5 में से 2.5 स्टार.
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