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Azaad Movie Review: रुला गया इंसान और घोड़े के बीच का प्यार, Aaman-Rasha ने एक्टिंग से जीता दिल

Azaad Movie Review: अजय देवगन, अमन देवगन और राशा ठडानी की फिल्म अजाद आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। आखिर कैसी है फिल्म की कहानी, चलिए आपको बताते हैं।

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Azaad Movie Review: कौन कहता है कि फिल्मों में लवस्टोरी सिर्फ एक लड़के और लड़की के बीच में ही हो सकता है, कुछ कहानियां अमन देवगन और राशा ठडानी की फिल्म आजाद जैसी भी हो सकती हैं, जिनमें प्यार तो हीरो-हीरोईन के बीच में ही दिखाया गया है लेकिन कहानी एक इंसान और घोड़े के रिश्ते पर बेस्ड है। बस यही कहानी दिल को छू लेती है। फिल्म के कुछ पॉजिटिव प्वाइंट्स हैं तो कहीं कहीं फिल्म के नेगेटिव प्वाइंट्स भी देखने को मिल जाते हैं। आखिर कैसी है फिल्म की कहानी, स्टारकास्ट ने कैसा काम किया है, चलिए आपको फिल्म के बारे में सबकुछ बताते हैं।

अजय देवगन के फैंस के लिए ट्रीट

सबसे पहले तो बॉलीवुड एक्टर अजय देवगन ने फिल्म में अपनी मौजूदगी से फैंस को तोहफा दिया है। उन्हें फिल्म में देखकर उनके फैंस को जरूर मजा आएगा। बेशक उनका रोल इतना बड़ा ना हो लेकिन जिस तरह अजय अपने योद्धा वाले अवतार में एक्शन करके दुश्मनों को मजा चखाते नजर आ रहे हैं, स्क्रीन पर उन्होंने कमाल कर दिया है। एक्ट्रेस डायना पेंटी फिल्म में उनकी प्रेमिका बनी हैं, जिनकी शादी जबरदस्ती एक जमींदार के बेटे से करा दी गई है लेकिन वो आज भी अजय यानी अपने विक्रम सिंह की राह देख रही है।

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अमन-राशा का बेहतरीन डेब्यू 

अब बात पहले करते हैं अजय देवगन के भांजे और फिल्म से अपना एक्टिंग डेब्यू कर रहे अमन देवगन और रवीना टंडन की बेटी राशा ठडानी की। अमन और राशा ने फिल्म में कमाल का काम किया है, उनकी एक्टिंग को देखकर लगता ही नहीं है कि ये उनकी पहली फिल्म है। चाहे वो राशा के एक्सप्रेशन्स हों या अमन का अभिनय टैलेंट, इस डिपार्टमेंट में तो फिल्म को 5 में से 5 नंबर देने का मन करता है। अमन देवगन ने फिल्म में एक ऐसा किरदार निभाया है जो गांव के एक गरीब परिवार में पैदा हुआ है और अब तक अपनी जिंदगी में कुछ नहीं कर पाया है, वहीं राशा यानी जानकी जमींदार की बेटी हैं, जिनकी शादी उनके पापा एक अंग्रेज से कराना चाहते हैं।

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कैसी है फिल्म की कहानी? 

फिल्म की कहानी पुराने टाइम में लेकर जाती है जहां अंग्रेज शासक अपना राज पूरी तरह से भारत के चप्पे-चप्पे पर कायम करना चाहते हैं। वहीं जमींदार यानी अमीर परिवार आस-पास के गांववालों को विदेशों में मजदूरी कराने के लिए जबरदस्ती भेज रहे हैं। अंग्रेज उन्हें हुकुम देते हैं और उनके हुकुम पर जमींदार गांववालों के साथ जबरदस्ती करते हैं।

गरीब गांववाले पूरी तरह से जमींदार के कर्ज में डूबे हुए हैं इसलिए वो लाचार और बेबस लोगों की तरह उनकी हर बात मानते हैं। लेकिन फिल्म का हीरो गोविंद अपनी पूरी जिंदगी ऐसे डर-डर के जी हुजूरी नहीं करना चाहता। वो फिल्म की शुरुआत में ही एक घोड़े का जिक्र करता है, अपनी नानी से कहता है कि हमें नहीं लगता कि हम कभी अपना घोड़ा ढूंढ पाएंगे, जिसपर उनकी नानी कहती हैं कि अगर तुम ना ढूंढ पाओ तो वो तुम्हें ढूंढ लेगा।

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यही से शुरू होती है फिल्म की कहानी, जहां जमींदार की बेटी भी घुड़सवारी की शौकीन है, वही उसकी मुलाकात होती है गोविंद से जो घोड़ों को साफ करने का काम करता है। आस-पास के सारे घोड़े जमींदारों के ही हैं, इसलिए वो जो चाहे वो कर सकते हैं। एक-दो बार गोविंद को बिना किसी गलती के पकड़कर जमींदार कूट देते हैं, बस तभी से उसे वहां से बागी होने का ख्याल आ जाता है। वो बागी हो भी जाता है और अपने परिवार को बिना बताए घर से भाग जाता है।

गोविंद को वहां पर दिखता है एक घोड़ा जिसका नाम है आजाद। आजाद देखने में सिर्फ घोड़ा लगता है लेकिन वो सारी चीजें इंसानों जैसी ही करता है। वो लोगों को देखता है, उन्हें परखता है और फुर्तीला तो इतना है कि ‘चीता’ से भी तेज दौड़ता होगा। गोविंद को वो घोड़ा भा जाता है लेकिन अपने मालिक का वफादार घोड़ा गोविंद को अपने आसपास भी भटकने नहीं देता।

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कई जगहों पर स्लो लगती है कहानी

घोड़े आजाद का मालिक कोई और नहीं बल्कि विक्रम सिंह ही होता है। वही विक्रम सिंह जो बीहड़ में अपनी फौज तैयार करके गांववालों को अंग्रेजों के जुल्म से बचाता है। जब-जब गांववालों को जबरदस्ती अंग्रेज अपने साथ ले जा रहे होते हैं, विक्रम अपनी टोली के साथ उनपर वार करता है और गांववालों को बचा लेता है। गोविंद की मुलाकात विक्रम सिंह से होती है और फिर उसे विक्रम सिंह की पूरी कहानी के बारे में पता चलता है कि कैसे उससे उसके प्यार को जमींदारों ने छीन लिया। हालांकि कुछ-कुछ मौकों पर फिल्म की कहानी थोड़ी स्लो भी लगती है।

इसके बाद फिल्म में विक्रम सिंह की ही टोली का एक आदमी जमींदार से हाथ मिलाकर उसे धोखा दे देता है और विक्रम सिंह की जान चली जाती है। वहीं से शुरू होती है गोविंद की लड़ाई। वो और आजाद अब अकेले बच जाते हैं जिन्हें अब जमींदारों से हिसाब बराबर करना है। अब कैसे आजाद और गोविंद एक दूसरे के करीब आते हैं और कैसे जमींदार की बेटी जानकी इसमें गोविंद की मदद करती है, इसे जानने के लिए आपको फिल्म जरूर देखनी चाहिए।

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कुल मिलाकर फिल्म को 5 में से 3 स्टार

First published on: Jan 17, 2025 10:01 AM

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About the Author

Himanshu Soni

हिमांशु सोनी न्यूज 24 में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं। एक एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट के तौर पर टीवी, फिल्म जगत और ओटीटी की कोई खबर हिमांशु की पैनी नजरों से बच नहीं पाती। हिमांशु की एंटरटेनमेंट के अलावा स्पोर्ट्स की खबरों पर भी अच्छी पकड़ है। हिमांशु पिछले 5 साल से मीडिया में हैं। इस दौरान हिमांशु ने नेटवर्क 18 ग्रुप, इंडिया टुडे ग्रुप डिजिटल (ITGD), टीवी 9 ग्रुप जैसे बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। हिमांशु ने डिजीटल पर एंकर और कंटेंट राइटर की भूमिका निभाई है। हिमांशु हरियाणा के यमुनानगर के रहने वाले हैं। इंजीनियरिंग के छात्र रह चुके हिमांशु हिन्दी पत्रकारिता में मास्टर्स और पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान यूनिवर्सिटी के सिल्वर मेडलिस्ट हैं।

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