Niharika Gupta
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International Ozone Day 2022: अंतर्राष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस, प्रत्येक वर्ष 16 सितंबर को मनाया जाता है, सभी देशों को हमारी ओजोन परत को संरक्षित करने के लिए पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान देने के लिए प्रोत्साहित करता है। ओजोन ग्रह के लिए एक प्रकार की ढाल के रूप में कार्य करता है और इसकी पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए आवश्यक है।
विश्व ओजोन दिवस हर साल 16 सितंबर को मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों के उत्पादन और खपत को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि है, जो आज ही के दिन 1987 में लागू हुई थी। इस दिन को ओजोन परत के क्षरण को क्यों और कैसे रोका जाना चाहिए, इस पर जागरूकता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
वर्ष 2022 में वर्ल्ड ओजोन डे की थीम, “मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल@35: पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करने वाला वैश्विक सहयोग” रखी गई है।
वैज्ञानिकों ने साल 1970 के अंत में ओजोन परत में छेद होने का दावा किया था। इसके बाद 80 के दशक में दुनियाभर की कई सरकारों ने इस समस्या को लेकर चिंतन करना शुरू कर दिया। साल 1985 में ओजोन लेयर की रक्षा के लिए वियना कन्वेंशन को अपनाया। इसके बाद 19 दिसंबर 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 16 दिसंबर की तारीख को अंतरराष्ट्रीय ओजोन डे मनाने का फैसला किया। साल 1995 में पहला वर्ल्ड ओजोन डे मनाया गया।
ओजोन परत एक समताप मंडल की परत है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरण के हानिकारक दुष्प्रभावों से पृथ्वी की रक्षा करती है। वायुमंडल में ओजोन की उपस्थिति के कारण हानिकारक पराबैंगनी किरणों को प्रभावी ढंग से परिरक्षित किया जाता है। यदि ओजोन परत पूरी तरह से समाप्त हो जाती है तो यह जीवित प्राणियों और हमारे ग्रह को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी। अगर हम यूवी किरणों के सीधे संपर्क में आते हैं, तो यह त्वचा कैंसर जैसी हानिकारक बीमारियों का कारण बन सकती है।
विभिन्न मानवीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप, वातावरण में छोड़े गए क्लोरीन और ब्रोमीन परमाणु जैसे रसायन ओजोन परत के क्षरण के लिए बहुत अधिक जिम्मेदार हैं। लगातार प्रयासों के कारण ओजोन परत में छेद आखिरकार बंद हो गया।
दरअसल, ओजोन परत ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली गैस है और ये पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है, जो सूर्य से आने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों से हमें (मानव जाति) बचाने का काम करती है। यहां आपको बताते चलें कि फ्रांस के भौतिकविदों फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने 1913 में इस परत की खोज की थी।
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