महाराष्ट्र के धुले में श्मशान भूमि से राख और अवशेषों की चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. परिजनों का आरोप है कि अंतिम संस्कार के बाद जब वे अस्थियां चुनने के लिए श्मशान पहुंचते हैं, तो वहां राख ही गायब मिलती है. यह घटना केवल चोरी की नहीं है, बल्कि मृतकों के सम्मान और उनके परिवारों की धार्मिक आस्था से जुड़ा एक बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है. राख न मिलने के कारण दुखी परिजनों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है.
कीमती धातुओं के लिए घिनौना काम
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि कुछ असामाजिक तत्व सोने और चांदी के लालच में इस तरह की घिनौनी हरकत को अंजाम दे रहे हैं. हिंदू परंपराओं के अनुसार कई बार मृतक के मुख या शरीर पर सोने-चांदी के छोटे टुकड़े या आभूषण रखे जाते हैं. जलने के बाद ये धातुएं राख में मिल जाती हैं. आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं कीमती धातुओं को खोजने के चक्कर में चोर पूरी राख ही उठा ले जाते हैं. परिजनों के लिए जो राख उनके अपने की अंतिम निशानी होती है, उसे लालच के चलते इस तरह चुराना समाज की गिरती मानसिकता को दर्शाता है.
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सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली
इस पूरी घटना ने श्मशान भूमि की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि वहां न तो रात में पर्याप्त रोशनी का इंतजाम है और न ही कोई सुरक्षा गार्ड तैनात रहता है. सीसीटीवी कैमरों की कमी के कारण रात के अंधेरे में अपराधी आसानी से ऐसी वारदातों को अंजाम देकर निकल जाते हैं. लोगों का कहना है कि श्मशान जैसी पवित्र और शांत जगह पर सुरक्षा का न होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही है. इसी वजह से असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं और वे मृतकों की राख तक को निशाना बना रहे हैं.
प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शमशान भूमि पर 24 घंटे सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. उन्होंने वहां तुरंत सीसीटीवी कैमरे लगाने और पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था करने की अपील की है. इसके साथ ही रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाने की भी मांग की गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. यह मामला कानून के साथ-साथ मानवीय गरिमा का भी है, इसलिए लोग चाहते हैं कि राख चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो ताकि समाज में दोबारा ऐसी शर्मनाक घटना न घटे.
महाराष्ट्र के धुले में श्मशान भूमि से राख और अवशेषों की चोरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. परिजनों का आरोप है कि अंतिम संस्कार के बाद जब वे अस्थियां चुनने के लिए श्मशान पहुंचते हैं, तो वहां राख ही गायब मिलती है. यह घटना केवल चोरी की नहीं है, बल्कि मृतकों के सम्मान और उनके परिवारों की धार्मिक आस्था से जुड़ा एक बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मुद्दा है. राख न मिलने के कारण दुखी परिजनों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश देखा जा रहा है.
कीमती धातुओं के लिए घिनौना काम
स्थानीय नागरिकों का दावा है कि कुछ असामाजिक तत्व सोने और चांदी के लालच में इस तरह की घिनौनी हरकत को अंजाम दे रहे हैं. हिंदू परंपराओं के अनुसार कई बार मृतक के मुख या शरीर पर सोने-चांदी के छोटे टुकड़े या आभूषण रखे जाते हैं. जलने के बाद ये धातुएं राख में मिल जाती हैं. आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं कीमती धातुओं को खोजने के चक्कर में चोर पूरी राख ही उठा ले जाते हैं. परिजनों के लिए जो राख उनके अपने की अंतिम निशानी होती है, उसे लालच के चलते इस तरह चुराना समाज की गिरती मानसिकता को दर्शाता है.
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सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुली
इस पूरी घटना ने श्मशान भूमि की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोप है कि वहां न तो रात में पर्याप्त रोशनी का इंतजाम है और न ही कोई सुरक्षा गार्ड तैनात रहता है. सीसीटीवी कैमरों की कमी के कारण रात के अंधेरे में अपराधी आसानी से ऐसी वारदातों को अंजाम देकर निकल जाते हैं. लोगों का कहना है कि श्मशान जैसी पवित्र और शांत जगह पर सुरक्षा का न होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही है. इसी वजह से असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं और वे मृतकों की राख तक को निशाना बना रहे हैं.
प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि शमशान भूमि पर 24 घंटे सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. उन्होंने वहां तुरंत सीसीटीवी कैमरे लगाने और पर्याप्त लाइटिंग की व्यवस्था करने की अपील की है. इसके साथ ही रात के समय पुलिस गश्त बढ़ाने की भी मांग की गई है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. यह मामला कानून के साथ-साथ मानवीय गरिमा का भी है, इसलिए लोग चाहते हैं कि राख चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो ताकि समाज में दोबारा ऐसी शर्मनाक घटना न घटे.