Rajesh Bharti
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TDS Message : अगर आप किसी कंपनी में जॉब करते हैं और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं तो आपको इनकम टैक्स विभाग की ओर से एक मेसेज आया होगा। डिपार्टमेंट ने यह मेसेज ऐसे टैक्सपेयर्स को भेजा जा रहा है जो किसी कंपनी में जॉब करते हैं। इस मेसेज में टैक्सपेयर्स के TDS के बारे में जानकारी दी गई है। अगर आपके पास भी ऐसा मेसेज आया है तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है।
दरअसल, जो भी शख्स जॉब करता है और ITR फाइल करता है तो कई बार TDS बनता है। दरअसल, कई बार कंपनी सैलरी से कुछ हिस्सा काट लेती है और उसे इनकम टैक्स विभाग में जमा करा देती है। बाद में इस रकम को ITR फाइल करते समय क्लेम कर सकते हैं। टैक्स सेविंग्स के सोर्स न बताने और टैक्स देनदारी बनने पर भी कई बार TDS काट लिया जाता है। हालांकि इसे भी क्लेम किया जा सकता है। अगर किसी शख्स की कुछ रकम इनकम टैक्स विभाग के पास जमा है तो उसे टैक्सपेयर्स ITR फाइल करते समय क्लेम कर सकते हैं। साधारण भाषा में इस रकम को TDS कह सकते हैं।

इनकम टैक्स विभाग की ओर से आया मेसेज
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्सपेयर्स को मेसेज भेजकर बता रहा है कि 31 दिसंबर को खत्म हुई तिमाही में कंपनी की तरफ से काटे गए TDS और वित्तीय वर्ष 23-24 के लिए क्युमुलेटिव TDS कितना बन रहा है। अगर मेसेज में TDS की कुछ रकम लिखी है तो उसे 31 जुलाई से पहले ITR भरने के दौरान क्लेम कर सकते हैं। करीब 1 महीने में ही TDS की रकम आपके खाते में आ जाएगी। मेसेज में आपके PAN के शुरुआत और आखिरी नंबर भी लिखे हुए दिखाई देंगे।
TDS के बारे में जानकारी देने के लिए इनकम टैक्स विभाग ने साल 2016 में मेसेज अलर्ट की यह सुविधा शुरू की थी। इसका मकसद टैक्सपेयर्स को TDS डिडक्शन के बारे में जानकारी देना था। इसके बाद से यह सुविधा अभी तक जारी है।
अगर आपका कुछ TDS बन रहा है तो आप इसे ITR फाइल करते समय क्लेम कर सकते हैं। TDS में बताई रकम को आप कंपनी की ओर से मिलने वाले फॉर्म-16 से भी मिला लें। कंपनियां मई-जून तक फॉर्म-16 अपने एम्प्लॉई को जारी कर देती हैं। ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है।
यह भी पढ़ें : ITR: Form 16 के अलावा ये फॉर्म भी जरूर चेक करें, नहीं तो आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस
अगर आप किसी कंपनी में जॉब करते हैं तो यह फॉर्म कंपनी की ओर से दिया जाता है। इसके दो पार्ट A और B होते हैं। कंपनी आपकी सैलरी से जो भी TDS काटती है और उसे सरकार के पास जमा कराती है। इस फॉर्म में यह सब जानकारी होती है। साथ ही इसमें कंपनी का TAN, असेसमेंट इयर, एंप्लॉई और कंपनी का PAN, अड्रेस, सैलरी ब्रेकअप, टैक्सेबल इनकम आदि की भी जानकारी होती है। साथ ही अगर आप रकम को कहीं इन्वेस्ट करते हैं और कंपनी को इसके बारे में बताया है तो इसकी भी जानकारी इसमें होती है। फॉर्म 16 आपकी इनकम का सबूत भी होता है।
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