देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा नीतिगत फैसला लिया है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस (सूचना का प्रस्तुतीकरण) आदेश, 2026’ जारी कर ऊर्जा से जुड़े डेटा को ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का विषय घोषित कर दिया है. 18 मार्च को जारी अधिसूचना के बाद अब निजी और सरकारी दोनों क्षेत्रों की कंपनियों को अपना परिचालन डेटा सरकार के साथ साझा करना अनिवार्य होगा.
गोपनीयता प्रावधान निष्प्रभावी
नए आदेश के तहत मौजूदा गोपनीयता नियम लागू नहीं होंगे. कंपनियां अब व्यावसायिक गोपनीयता का हवाला देकर जानकारी देने से इंकार नहीं कर सकेंगी.
इस फैसले का सीधा असर ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख इकाइयों पर पड़ेगा, जिनमें शामिल हैं:
• तेल रिफाइनरियां और एलएनजी आयातक
• पाइपलाइन ऑपरेटर और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूटर (CGD)
• पेट्रोकेमिकल कंपनियां और लॉजिस्टिक्स इकाइयां
क्या जानकारी देनी होगी
कंपनियों को पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) को नियमित कुछ मामलों में दैनिक आधार पर डेटा देना होगा. इसमें शामिल हैं:
• उत्पादन और आयात का रियल-टाइम डेटा
• स्टॉक और आपातकालीन भंडार की स्थिति
• विभिन्न क्षेत्रों में ऊर्जा खपत का पैटर्न
मध्य-पूर्व संकट बना कारण
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब मध्य-पूर्व में जारी तनाव के चलते भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ी है. भारत की आयात निर्भरता भी इस फैसले की बड़ी वजह मानी जा रही है:
• 88% कच्चा तेल आयात
• 50% प्राकृतिक गैस आयात
• 60% एलपीजी की आपूर्ति विदेशों से
इस व्यवस्था से सरकार को वैश्विक संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने, आपूर्ति श्रृंखला को संभालने और घरेलू संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी.










