US Fed Meeting 2026: मिडिल ईस्ट के तनाव और तेल की कीमतों ने बढ़ाई फेड की चिंता; ब्याज दरों में नहीं क‍िया कोई बदलाव

महंगाई की मार या युद्ध का साया? अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। जेरोम पॉवेल ने मिडिल ईस्ट के तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को इकोनॉमी के लिए बड़ी चुनौती बताया है। आखिर क्यों टल गया रेट कट का फैसला और भारतीय शेयर बाजार पर इसका क्या होगा असर? फेड की मीटिंग की 5 सबसे बड़ी बातें यहां समझें।

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जेरोम पावेल ने कहा क‍ि महंगाई 2 फीसदी के आसपास रह सकती है

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व ने अपनी ताजा बैठक में ब्याज दरों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच फेड ने इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद अमेरिका में ब्याज दरें 3.5% से 3.75% के स्तर पर ही स्थिर रहेंगी। फेड चेयर जेरोम पॉवेल ने साफ कर दिया है कि जब तक महंगाई काबू में नहीं आती, तब तक राहत की उम्मीद कम है।

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तेल की कीमतों ने बिगाड़ा गणित

फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने माना कि ईरान युद्ध और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आया उछाल महंगाई के लिए बड़ा खतरा है। पॉवेल ने कहा क‍ि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई को ऊपर धकेल सकती हैं, लेकिन इसका असर कितना गहरा होगा, यह फिलहाल अनिश्चित है। फिलहाल फेड वेट एंड वॉच (Wait and Watch) की मुद्रा में है।

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महंगाई अब भी लक्ष्य से दूर
फेड का मुख्य लक्ष्य महंगाई को 2% के स्तर पर लाना है। हालांकि, ताजा आंकड़ों के अनुसार फरवरी की PCE महंगाई दर 2.8% रही। कोर PCE महंगाई 3.0% पर बनी हुई है। पॉवेल ने स्पष्ट किया कि 2022 के मुकाबले महंगाई जरूर कम हुई है, लेकिन अभी भी यह खतरे के निशान से ऊपर है।

क्या आगे कम होंगी ब्याज दरें?
मार्केट को उम्मीद थी कि फेड जल्द ही रेट कट (ब्याज दरों में कटौती) का एलान करेगा, लेकिन पॉवेल ने इन उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि भविष्य में दरें तभी घटेंगी जब महंगाई में लगातार गिरावट दिखेगी। अगर महंगाई कंट्रोल में नहीं आई, तो रेट कट को लंबे समय के लिए टाला जा सकता है।

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स्टैगफ्लेशन (Stagflation) का डर खारिज
जब पॉवेल से पूछा गया कि क्या अमेरिका 1970 के दशक जैसी स्टैगफ्लेशन (महंगाई और मंदी का एक साथ होना) की स्थिति में है, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने माना कि प्राइवेट सेक्टर में नौकरियां पैदा होने की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है, लेकिन अमेरिकी इकोनॉमी अब भी काफी मजबूत और लचीली है।

भारतीय बाजार और निवेशकों पर असर
अमेरिकी फेड का यह फैसला भारतीय शेयर बाजार के लिए न्यूट्रल माना जा रहा है। क्‍योंक‍ि दरों में कटौती नहीं हुई है, इसलिए अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी रह सकती है, जिससे भारतीय बाजार में विदेशी फंड्स की वापसी में देरी हो सकती है। डॉलर की मजबूती बरकरार रहने से रुपये पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, दरों में बढ़ोतरी न होना बाजार को किसी बड़े पैनिक से बचाएगा।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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